असम में हिमंत बिस्वा सरमा का दूसरा कार्यकाल
असम की राजनीति में हिमंत बिस्वा सरमा एक बार फिर केंद्र में हैं। भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की बहुमत जीत के बाद वह 12 मई 2026 को असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं। यह उनका लगातार दूसरा कार्यकाल होगा।
शपथ ग्रहण समारोह की प्रमुख जानकारी
शपथ ग्रहण समारोह गुवाहाटी के खानापारा स्थित वेटरनरी कॉलेज फील्ड में सुबह 11:40 बजे आयोजित किया जाएगा। असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने 10 मई 2026 को हिमंत बिस्वा सरमा को मुख्यमंत्री नियुक्त किया, जिसके बाद नई सरकार गठन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से आगे बढ़ी। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है।
विधानसभा में एनडीए की मजबूत स्थिति
असम विधानसभा में कुल 126 निर्वाचित सदस्य होते हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 64 विधायकों का समर्थन आवश्यक है। इस बार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को 102 विधायकों का समर्थन मिला है, जो स्पष्ट और मजबूत बहुमत माना जाता है। हिमंत बिस्वा सरमा को भाजपा विधायक दल और एनडीए विधायक दल का सर्वसम्मति से नेता चुना गया। इससे उनके नेतृत्व पर गठबंधन की एकजुटता और भरोसा साफ दिखाई देता है।
मुख्यमंत्री पद की संवैधानिक भूमिका
भारत के संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करते हैं। मुख्यमंत्री को विधानसभा में बहुमत का समर्थन प्राप्त होना चाहिए। मुख्यमंत्री राज्य सरकार का निर्वाचित प्रमुख होता है और मंत्रिपरिषद के साथ मिलकर राज्य प्रशासन का संचालन करता है।
असम की राजनीति में महत्व
हिमंत बिस्वा सरमा का दूसरा कार्यकाल असम में भाजपा नेतृत्व की निरंतरता को दर्शाता है। एनडीए की बड़ी जीत से राज्य में विकास, बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार से अपेक्षाएं और बढ़ गई हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- असम विधानसभा एकसदनीय विधायिका है और इसमें 126 सीटें हैं।
- असम में बहुमत का सरल आंकड़ा 64 सीटों का है।
- संविधान का अनुच्छेद 164 मुख्यमंत्री और मंत्रियों की नियुक्ति से संबंधित है।
- राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का नेतृत्व राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी करती है।
हिमंत बिस्वा सरमा का लगातार दूसरा कार्यकाल असम की राजनीति में स्थिरता और एनडीए के मजबूत जनाधार का संकेत है। अब नई सरकार के सामने जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने और राज्य के विकास को नई गति देने की चुनौती होगी।