पीएसबी कॉन्फ्लुएंस 2026: बैंकिंग सुधारों और युवाओं पर फोकस
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) ने 17–18 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में दो दिवसीय पीएसबी कॉन्फ्लुएंस 2026 का आयोजन किया। इस सम्मेलन में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों और भारतीय बैंक संघ के करीब 125 वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का केंद्र बिंदु बैंकिंग व्यवस्था की मौजूदा प्राथमिकताएं, ऋण विस्तार, जमा जुटाना और अगली पीढ़ी के सुधार रहे।
सम्मेलन में किन मुद्दों पर चर्चा हुई
इस कॉन्फ्लुएंस में सात प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इनमें जमा जुटाना, युवाओं के लिए बैंकिंग, निवेश चक्र को समर्थन, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स, कृषि और बागवानी मूल्य श्रृंखला अवसंरचना, क्रेडिट कार्ड कारोबार का पुनर्गठन और प्राथमिकता क्षेत्र ऋण शामिल थे। पहले दिन की चर्चा मुख्य रूप से जमा जुटाने, युवाओं से जुड़ी बैंकिंग, निवेश को बढ़ावा देने और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स पर केंद्रित रही।
युवा, एनपीए और सार्वजनिक बैंकों की भूमिका
उद्घाटन सत्र में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। सीतारमण ने कहा कि भारत की लगभग 29% आबादी 15–29 आयु वर्ग में आती है, इसलिए बैंकिंग क्षेत्र के लिए युवाओं की जरूरतों के अनुरूप उत्पाद और सेवाएं विकसित करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने मेरा युवा भारत मंच का भी उल्लेख किया, जिस पर 2.6 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के सामने अब सुधारों के अगले चरण को आगे बढ़ाने का अवसर है, क्योंकि गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों यानी एनपीए का स्तर ऐतिहासिक रूप से कम हुआ है। इसका अर्थ यह है कि बैंक अब केवल बैलेंस शीट सुधार पर नहीं, बल्कि ऋण वृद्धि, नवाचार और अर्थव्यवस्था को अधिक सक्रिय समर्थन देने पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
बैंकिंग सुधारों के लिए नई समिति
वित्त मंत्री ने यह भी घोषणा की कि केंद्र सरकार जल्द ही विकसित भारत के लिए बैंकिंग सुधारों पर एक उच्च-स्तरीय समिति गठित करेगी। पीएसबी कॉन्फ्लुएंस 2026 में निकले निष्कर्षों को इस समिति के लिए इनपुट के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे संकेत मिलता है कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की भूमिका को केवल पारंपरिक ऋणदाता तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें विकास, निवेश और रोजगार सृजन के व्यापक एजेंडे से जोड़ना चाहती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- NABARD का पूरा नाम National Bank for Agriculture and Rural Development है।
- SIDBI का पूरा नाम Small Industries Development Bank of India है।
- NHB का पूरा नाम National Housing Bank है।
- Priority Sector Lending के तहत कृषि, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों और कमजोर वर्गों जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता से ऋण दिया जाता है।
पीएसबी कॉन्फ्लुएंस 2026 से यह स्पष्ट हुआ कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अब जमा, ऋण, युवाओं और निवेश से जुड़े नए लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में हैं। आने वाले महीनों में प्रस्तावित बैंकिंग सुधार समिति इस दिशा में नीतिगत बदलावों को और गति दे सकती है।