महत्वपूर्ण खनिजों की नीलामी से आत्मनिर्भर खनिज आपूर्ति की तैयारी
भारत में रणनीतिक और औद्योगिक जरूरतों के लिए जरूरी खनिजों की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में खान मंत्रालय ने पटना में एक प्रमोशनल रोडशो आयोजित किया। यह कार्यक्रम 8वीं किस्त के तहत होने वाली महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी से जुड़ा है, जिसमें 20 ब्लॉक नौ राज्यों में शामिल हैं। इनमें 3 माइनिंग लीज और 17 कॉम्पोजिट लाइसेंस हैं।
क्यों अहम हैं ये खनिज
क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल्स वे खनिज होते हैं जो आर्थिक गतिविधियों, औद्योगिक उत्पादन और रक्षा जैसे क्षेत्रों के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं। इनकी सप्लाई चेन को अक्सर राष्ट्रीय योजना के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। इस 8वीं किस्त में ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, लिथियम, वैनेडियम, गैलियम, टाइटेनियम और टंगस्टन जैसे खनिजों वाले ब्लॉक शामिल हैं।
इन खनिजों की मांग इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी, उन्नत मिश्रधातु, रक्षा उपकरण और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों में लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इनकी घरेलू खोज और नीलामी भारत की खनिज आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
नीलामी की प्रक्रिया और ब्लॉकों की संरचना
भारत में खनिज ब्लॉकों का आवंटन माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) ढांचे के तहत नीलामी के जरिए किया जाता है। इसमें तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन के आधार पर बोली लगाई जाती है और प्रक्रिया ई-ऑक्शन के माध्यम से पूरी होती है।
माइनिंग लीज खनिजों के उत्खनन और बिक्री की अनुमति देती है, जबकि कॉम्पोजिट लाइसेंस में पहले खोजबीन का अधिकार और बाद में माइनिंग लीज शामिल होती है। जिन क्षेत्रों में विस्तृत अन्वेषण की जरूरत होती है, वहां कॉम्पोजिट लाइसेंस उपयोगी माना जाता है।
पटना रोडशो में किन संस्थाओं की भूमिका रही
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने की। इसमें बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और बिहार के खान मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार भी शामिल हुए। रोडशो में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड और निजी उद्योग निवेशकों की भागीदारी रही।
कार्यक्रम में एमईसीएल की ओर से ब्लॉकों की संभावनाओं पर प्रस्तुति दी जानी है, जबकि एसबीआईकैप्स बोली दस्तावेजों की प्रक्रिया समझाएगा। एमएसटीसी ई-ऑक्शन प्रणाली पर प्रतिभागियों को जानकारी देगा। इसके साथ ही राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण एवं विकास ट्रस्ट योजना पर भी सत्र रखा गया है, जिसके तहत लाइसेंसधारकों को अन्वेषण लागत का आंशिक प्रतिपूर्ति लाभ मिलता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की स्थापना 1851 में हुई थी और यह खान मंत्रालय के अधीन काम करता है।
- रेयर अर्थ एलिमेंट्स 17 रासायनिक रूप से समान तत्वों का समूह हैं, जिनका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, मैग्नेट और रक्षा क्षेत्र में होता है।
- लिथियम का उपयोग रिचार्जेबल बैटरियों, सिरेमिक और कुछ मिश्रधातुओं में किया जाता है।
- नेशनल जियोसाइंस डेटा रिपॉजिटरी भारत में भूवैज्ञानिक डेटा के डिजिटल प्रबंधन का मंच है।
यह पहल दिखाती है कि भारत अब खनिज संसाधनों की खोज, अन्वेषण और नीलामी को अधिक संगठित और तकनीक-आधारित ढांचे में आगे बढ़ा रहा है। आने वाले समय में ऐसे प्रयास औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।