पश्चिमी घाट में खोजी गई नई टाइगर मॉथ प्रजाति ‘अंतरम इडुक्की’

पश्चिमी घाट में खोजी गई नई टाइगर मॉथ प्रजाति ‘अंतरम इडुक्की’

भारत के जैव विविधता से समृद्ध पश्चिमी घाट क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने एक नई टाइगर मॉथ प्रजाति की खोज की है। जून 2026 में केरल के इडुक्की जिले में खोजी गई इस नई प्रजाति का नाम अंतरम इडुक्की (Antaram idukki) रखा गया है। यह प्रजाति टाइगर मॉथ उपकुल आर्क्टीनी (Arctiinae) तथा एरेबिडी (Erebidae) कुल से संबंधित है। इसकी वैज्ञानिक जानकारी प्रतिष्ठित जर्नल ऑफ द लेपिडॉप्टरिस्ट्स सोसाइटी में प्रकाशित की गई है। इस खोज को पश्चिमी घाट की समृद्ध जैव विविधता और कीट विज्ञान अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

पश्चिमी घाट: जैव विविधता का खजाना

पश्चिमी घाट विश्व के प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट्स में से एक है। यह पर्वतमाला भारत के पश्चिमी भाग में फैली हुई है और केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु तथा गोवा जैसे राज्यों से होकर गुजरती है। यह क्षेत्र हजारों प्रकार के पौधों, पक्षियों, स्तनधारियों, उभयचरों और कीटों का आवास है। विशेष रूप से पतंगों और तितलियों की अनेक दुर्लभ प्रजातियां यहां पाई जाती हैं। पतंगे और तितलियां दोनों लेपिडॉप्टेरा गण (Order Lepidoptera) के सदस्य हैं। वैज्ञानिक इनकी पहचान मुख्य रूप से पंखों के पैटर्न, एंटीना की संरचना और जननांगों की आकृति के आधार पर करते हैं।

अंतरम इडुक्की की विशेषताएं

अंतरम (Antaram) एक नया वंश (Genus) है, जो वर्तमान में केवल केरल के इडुक्की जिले से ही ज्ञात है। इस वंश का नाम संस्कृत शब्द ‘अंतरम्’ से लिया गया है, जिसका अर्थ ‘भिन्नता’ या ‘अंतर’ होता है। यह नई प्रजाति अपनी विशिष्ट बाह्य संरचना और जननांग संबंधी आकृतियों के कारण अन्य ज्ञात प्रजातियों से अलग पहचानी गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस प्रजाति का लार्वा किस पौधे पर निर्भर करता है और इसका संपूर्ण जीवन चक्र क्या है, इसकी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है। अंतरम इडुक्की को अत्यंत दुर्लभ प्रजाति माना गया है। इसके सीमित वितरण क्षेत्र और आवासीय क्षेत्रों में हो रहे पर्यावरणीय क्षरण को इसके संरक्षण के लिए चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

पश्चिमी घाट में हाल की अन्य खोजें

पश्चिमी घाट क्षेत्र में हाल के वर्षों में कई नई पतंग प्रजातियों की खोज हुई है। जून 2026 में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई), पुणे के वैज्ञानिकों ने कर्नाटक के काली टाइगर रिजर्व में माइम्यूसेमिया काली (Mimeusemia kali) नामक फॉरेस्टर मॉथ की नई प्रजाति खोजी। इस खोज का विवरण अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका जूटैक्सा में प्रकाशित हुआ। विशेष बात यह रही कि लगभग 30 वर्षों बाद माइम्यूसेमिया वंश में किसी नई प्रजाति को जोड़ा गया। इसके अलावा नवंबर 2025 में महाराष्ट्र के मेलघाट क्षेत्र में 90 नई पतंग प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया गया था, जिससे उस क्षेत्र में दर्ज कुल पतंग प्रजातियों की संख्या 250 तक पहुंच गई।

संरक्षण और अनुसंधान का महत्व

इडुक्की जिला दक्षिणी पश्चिमी घाट का एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक क्षेत्र है। यहां की विविध जलवायु और वनस्पति अनेक दुर्लभ जीवों को आश्रय प्रदान करती है। नई प्रजातियों की खोज न केवल वैज्ञानिक ज्ञान को समृद्ध करती है, बल्कि जैव विविधता संरक्षण की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी घाट में अभी भी अनेक ऐसी प्रजातियां मौजूद हो सकती हैं जिनकी पहचान होना बाकी है। इसलिए इस क्षेत्र में निरंतर अनुसंधान और संरक्षण प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • लेपिडॉप्टेरा गण में पतंगे (मॉथ) और तितलियां दोनों शामिल होते हैं।
  • एरेबिडी (Erebidae) कुल में टाइगर मॉथ उपकुल आर्क्टीनी (Arctiinae) शामिल है।
  • भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) भारत सरकार के अधीन एक प्रमुख वैज्ञानिक अनुसंधान संस्था है।
  • पश्चिमी घाट विश्व के प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट्स में से एक माना जाता है।
  • काली टाइगर रिजर्व कर्नाटक में स्थित है और पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अंतरम इडुक्की की खोज यह दर्शाती है कि भारत का पश्चिमी घाट क्षेत्र अभी भी जैव विविधता के अनगिनत रहस्यों को अपने भीतर समेटे हुए है। ऐसी खोजें न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान को नई दिशा देती हैं, बल्कि प्राकृतिक आवासों के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को भी उजागर करती हैं।

Originally written on June 24, 2026 and last modified on June 24, 2026.

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