न्यायमूर्ति एम.एस. लिबरहान का निधन, बाबरी मस्जिद जांच से जुड़ा नाम
मद्रास और आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह लिबरहान का 2 अगस्त 2026 को 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। भारतीय न्यायपालिका में उनकी पहचान एक वरिष्ठ न्यायाधीश के रूप में रही, लेकिन वे सबसे अधिक चर्चा में उस एकल सदस्यीय जांच आयोग के कारण आए, जिसने 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस की जांच की थी।
कानूनी सफर और न्यायिक जिम्मेदारियाँ
न्यायमूर्ति लिबरहान का जन्म 11 नवंबर 1938 को चंडीगढ़ के पास हुआ था। उन्होंने 1964 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में अपने विधिक करियर की शुरुआत की। बाद में वे उच्च न्यायपालिका में पहुंचे और आगे चलकर मद्रास उच्च न्यायालय तथा आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने।पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय भारत के संविधान के अनुच्छेद 214 के तहत स्थापित उच्च न्यायालयों में से एक है। लिबरहान का न्यायिक जीवन इस बात का उदाहरण रहा कि उच्च न्यायपालिका में अनुभव और संवैधानिक जिम्मेदारियाँ किस तरह एक न्यायाधीश की भूमिका को व्यापक बनाती हैं।
लिबरहान आयोग और बाबरी मस्जिद प्रकरण
न्यायमूर्ति लिबरहान का नाम उस जांच आयोग से जुड़ा है, जिसे 16 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस की परिस्थितियों की जांच के लिए नियुक्त किया गया था। यह आयोग एक सदस्यीय था और इसे Commissions of Inquiry Act, 1952 के तहत गठित किया गया था।आयोग ने अपनी रिपोर्ट 30 जून 2009 को सौंपी। यानी रिपोर्ट तैयार होने में 17 साल लगे और इस दौरान 48 बार समय-सीमा बढ़ाई गई। यह भारतीय प्रशासनिक और न्यायिक इतिहास की सबसे लंबी चली जांचों में से एक मानी जाती है।रिपोर्ट में बाबरी मस्जिद विध्वंस को “सुनियोजित” कार्रवाई बताया गया था। अयोध्या स्थित बाबरी मस्जिद 6 दिसंबर 1992 को गिराई गई थी, और इसके बाद देश की राजनीति, न्याय व्यवस्था और सामाजिक विमर्श पर गहरा असर पड़ा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- न्यायमूर्ति एम.एस. लिबरहान का जन्म 11 नवंबर 1938 को हुआ था और उनका निधन 2 अगस्त 2026 को 87 वर्ष की आयु में हुआ।
- उन्होंने 1964 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय से अपने विधिक करियर की शुरुआत की थी।
- वे मद्रास उच्च न्यायालय और आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहे।
- लिबरहान आयोग 16 दिसंबर 1992 को गठित हुआ था और उसने 30 जून 2009 को रिपोर्ट सौंपी थी।
न्यायमूर्ति लिबरहान का जीवन भारतीय न्यायपालिका और संवेदनशील ऐतिहासिक घटनाओं की जांच, दोनों से जुड़ा रहा। उनकी भूमिका उन्हें उन न्यायिक व्यक्तित्वों की श्रेणी में रखती है, जिनका नाम एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रकरण के साथ हमेशा याद किया जाएगा।