आरबीआई में मोनिशा चक्रवर्ती को नई जिम्मेदारी, विदेशी मुद्रा और बाजार नियमन पर फोकस

आरबीआई में मोनिशा चक्रवर्ती को नई जिम्मेदारी, विदेशी मुद्रा और बाजार नियमन पर फोकस

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने मोनिशा चक्रवर्ती को 3 अगस्त 2026 से कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया है। नई भूमिका में वे विदेशी मुद्रा विभाग और वित्तीय बाजार विनियमन विभाग की जिम्मेदारी संभालेंगी। केंद्रीय बैंक में यह पद महत्वपूर्ण प्रशासनिक और नियामकीय कार्यों से जुड़ा होता है।

आरबीआई में कार्यकारी निदेशक की भूमिका

कार्यकारी निदेशक आरबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल होते हैं और उन्हें बैंक की संरचना में विशिष्ट विभागों की निगरानी सौंपी जाती है। यह पद केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि नीति-कार्यान्वयन और नियामकीय समन्वय के लिहाज से भी अहम माना जाता है। विदेशी मुद्रा प्रबंधन और वित्तीय बाजारों के नियमन जैसे क्षेत्रों में यह जिम्मेदारी विशेष महत्व रखती है।

मोनिशा चक्रवर्ती का पेशेवर अनुभव

पदोन्नति से पहले मोनिशा चक्रवर्ती सुपरविजन विभाग में मुख्य महाप्रबंधक-प्रभारी के रूप में कार्यरत थीं। आरबीआई में उनके पास तीन दशकों से अधिक का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने सुपरविजन, विदेशी मुद्रा तथा सरकारी और बैंक खातों से जुड़े क्षेत्रों में काम किया है।उनका अनुभव बैंकिंग प्रणाली की निगरानी, नियामकीय अनुपालन और वित्तीय प्रशासन जैसे क्षेत्रों में व्यापक माना जाता है। आरबीआई जैसे संस्थान में ऐसे अनुभव वाले अधिकारियों को संवेदनशील विभागों की जिम्मेदारी दी जाती है, क्योंकि इन विभागों का सीधा संबंध वित्तीय स्थिरता और बाजार अनुशासन से होता है।

पहले की जिम्मेदारियां और शैक्षणिक पृष्ठभूमि

मोनिशा चक्रवर्ती एक तकनीकी समिति से भी जुड़ी रही हैं, जिसने आरबीआई की बैलेंस शीट तथा लाभ-हानि खाते के प्रारूप की समीक्षा की थी। इसके अलावा वे बैंकिंग लोकपाल के रूप में भी काम कर चुकी हैं, जो बैंकिंग शिकायतों के समाधान से जुड़ी व्यवस्था का हिस्सा है।उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी मजबूत है। उन्होंने अर्थशास्त्र में डिग्री और दिल्ली विश्वविद्यालय से मास्टर इन बिजनेस इकोनॉमिक्स की उपाधि प्राप्त की है। दिल्ली विश्वविद्यालय देश के प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालयों में से एक है, जिसकी स्थापना 1922 में हुई थी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को आरबीआई अधिनियम, 1934 के तहत हुई थी।
  • आरबीआई का विदेशी मुद्रा विभाग विदेशी मुद्रा प्रबंधन और उससे जुड़े नियामकीय कार्यों को देखता है।
  • आरबीआई का सुपरविजन विभाग बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों जैसी विनियमित संस्थाओं की निगरानी से जुड़ा है।
  • बैंकिंग लोकपाल व्यवस्था बैंकों के खिलाफ शिकायतों के समाधान के लिए उपयोग की जाती है।

मोनिशा चक्रवर्ती की नियुक्ति आरबीआई में अनुभवी अधिकारियों को महत्वपूर्ण नियामकीय जिम्मेदारियां सौंपने की परंपरा को आगे बढ़ाती है। विदेशी मुद्रा और वित्तीय बाजारों से जुड़े उनके नए दायित्व केंद्रीय बैंक की नीतिगत और निगरानी भूमिका के लिहाज से अहम माने जा रहे हैं।

Originally written on August 4, 2026 and last modified on August 4, 2026.

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