नील गेहरेल्स स्विफ्ट वेधशाला की कक्षा बढ़ाने के लिए नासा का ‘स्विफ्ट बूस्ट’ मिशन
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा अपने प्रसिद्ध नील गेहरेल्स स्विफ्ट वेधशाला (Neil Gehrels Swift Observatory) को बचाने के लिए ‘स्विफ्ट बूस्ट’ मिशन की तैयारी कर रही है। नवंबर 2004 में प्रक्षेपित यह अंतरिक्ष वेधशाला बढ़ती सौर गतिविधियों के कारण वायुमंडलीय घर्षण (एटमॉस्फेरिक ड्रैग) से धीरे-धीरे अपनी कक्षा खो रही है और यदि समय रहते इसकी ऊंचाई नहीं बढ़ाई गई तो यह 2026 के अंत तक पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश कर सकती है। इस मिशन का उद्देश्य वेधशाला की कक्षा को ऊंचा उठाकर उसके वैज्ञानिक जीवनकाल को कई वर्षों तक बढ़ाना है।
नील गेहरेल्स स्विफ्ट वेधशाला क्या है?
नील गेहरेल्स स्विफ्ट वेधशाला अमेरिका का एक वैज्ञानिक अंतरिक्ष उपग्रह है, जिसे ब्रह्मांड में होने वाली उच्च-ऊर्जा खगोलीय घटनाओं, विशेषकर गामा-रे विस्फोटों (Gamma-Ray Bursts) और अन्य खगोलीय स्रोतों के अध्ययन के लिए विकसित किया गया था। इसका प्रक्षेपण नवंबर 2004 में किया गया था। इस उपग्रह को मूल रूप से सर्विसिंग, डॉकिंग या किसी अन्य अंतरिक्ष यान द्वारा पकड़कर मरम्मत करने के लिए डिजाइन नहीं किया गया था। यही कारण है कि इसकी कक्षा बढ़ाने का वर्तमान मिशन तकनीकी दृष्टि से अत्यंत चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
स्विफ्ट बूस्ट मिशन की विशेषताएं
स्विफ्ट बूस्ट मिशन का प्रक्षेपण 27 जून 2026 को नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन पेगासस एक्सएल रॉकेट के माध्यम से किया जाना निर्धारित है। यह रॉकेट सीधे जमीन से नहीं, बल्कि स्टारगेजर विमान द्वारा प्रशांत महासागर स्थित क्वाजालीन एटोल तक ले जाकर हवा में प्रक्षेपित किया जाएगा। इस मिशन में लिंक (LINK) नामक रोबोटिक सर्विसिंग अंतरिक्ष यान का उपयोग किया जाएगा, जिसे अमेरिका की एरिज़ोना स्थित कैटालिस्ट स्पेस टेक्नोलॉजीज ने विकसित किया है। नासा ने सितंबर 2025 में इस परियोजना के लिए 30 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुबंध प्रदान किया था और अंतरिक्ष यान का निर्माण मात्र 250 दिनों में पूरा किया गया।
लिंक अंतरिक्ष यान कैसे करेगा कार्य?
लिंक अंतरिक्ष यान का द्रव्यमान लगभग 424 किलोग्राम (935 पाउंड) है। इसमें रिएक्शन कंट्रोल थ्रस्टर, रोबोटिक भुजाएं तथा उन्नत रेंडेज़वस सेंसर लगाए गए हैं। यह अंतरिक्ष यान बिना किसी पूर्व तैयारी वाले उपग्रह के निकट पहुंचेगा, उसे सुरक्षित रूप से पकड़कर उससे जुड़ जाएगा और अपने थ्रस्टरों की सहायता से उसकी कक्षा को ऊंचा उठाएगा। यह मिशन अमेरिकी सरकारी वैज्ञानिक उपग्रह पर रोबोटिक कक्षीय सर्विसिंग तकनीक का महत्वपूर्ण परीक्षण भी होगा।
मिशन का महत्व और भविष्य
वायुमंडलीय घर्षण कम करने और कक्षा को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से स्विफ्ट वेधशाला के वैज्ञानिक अवलोकनों को फरवरी 2026 से अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। यदि स्विफ्ट बूस्ट मिशन सफल रहता है, तो वेधशाला की वैज्ञानिक गतिविधियां 2026 की शरद ऋतु तक पुनः शुरू हो सकती हैं। इस मिशन के सफल होने पर वेधशाला का परिचालन जीवन कम-से-कम पांच वर्ष और संभवतः एक दशक तक बढ़ाया जा सकता है। साथ ही, यह भविष्य में पुराने उपग्रहों की मरम्मत और कक्षा सुधार जैसी तकनीकों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नील गेहरेल्स स्विफ्ट वेधशाला का प्रक्षेपण नवंबर 2004 में किया गया था।
- स्विफ्ट बूस्ट मिशन का प्रक्षेपण 27 जून 2026 को निर्धारित है।
- पेगासस एक्सएल रॉकेट को स्टारगेजर विमान के माध्यम से हवा में ले जाकर प्रक्षेपित किया जाता है।
- क्वाजालीन एटोल प्रशांत महासागर में स्थित एक महत्वपूर्ण प्रक्षेपण क्षेत्र है।
स्विफ्ट बूस्ट मिशन केवल एक अंतरिक्ष वेधशाला की कक्षा बढ़ाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह अंतरिक्ष में रोबोटिक सर्विसिंग तकनीक के भविष्य की दिशा भी तय कर सकता है। यदि यह मिशन सफल होता है, तो आने वाले वर्षों में पुराने वैज्ञानिक उपग्रहों के जीवनकाल को बढ़ाना अधिक व्यावहारिक और किफायती बन सकेगा।