निजी कंपनियों के लिए खुला LVM3 रॉकेट निर्माण का अवसर

निजी कंपनियों के लिए खुला LVM3 रॉकेट निर्माण का अवसर

भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) ने 10 जून 2026 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (एलवीएम3) की प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्रक्रिया के लिए अभिरुचि अभिव्यक्ति (ईओआई) आमंत्रित की है। इस पहल के तहत निजी भारतीय कंपनियों को एलवीएम3 का निर्माण, संचालन और व्यावसायिक उपयोग करने का अवसर मिलेगा। एलवीएम3 भारत का सबसे शक्तिशाली और सबसे भारी परिचालन लॉन्च वाहन है, जिसे इसकी विशाल क्षमता के कारण “बाहुबली” के नाम से भी जाना जाता है।

एलवीएम3 की विशेषताएं और महत्व

एलवीएम3 एक तीन-चरणीय प्रक्षेपण यान है जिसे इसरो ने भारी पेलोड मिशनों के लिए विकसित किया है। यह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है और कई ऐतिहासिक मिशनों में अपनी भूमिका निभा चुका है। इसी रॉकेट का उपयोग चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 मिशनों के प्रक्षेपण के लिए किया गया था। चंद्रयान-3 की सफलता ने एलवीएम3 की विश्वसनीयता और क्षमता को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2022 और 2023 में इसने ब्रिटेन की वनवेब उपग्रह श्रृंखला के लिए कुल 72 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया था।

प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की प्रक्रिया

इस कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित निजी कंपनी या कंपनियों के समूह को इसरो की ओर से तकनीकी सहायता और बुनियादी ढांचा समर्थन प्रदान किया जाएगा। यह सहयोग अधिकतम 42 महीनों तक या फिर दो एलवीएम3 रॉकेटों के निर्माण और सफल प्रक्षेपण तक जारी रहेगा, जो भी पहले पूरा हो। इस पहल का उद्देश्य निजी क्षेत्र को उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी तक पहुंच प्रदान करना और देश में अंतरिक्ष उद्योग की क्षमताओं को मजबूत बनाना है। इससे भारत की प्रक्षेपण सेवाओं की क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता में भी वृद्धि होने की उम्मीद है।

पात्रता मानदंड

एलवीएम3 कार्यक्रम में भाग लेने के लिए केवल निजी स्वामित्व वाली भारतीय संस्थाएं ही पात्र होंगी। आवेदक संगठन का कम से कम सात वर्षों से संचालन में होना आवश्यक है। साथ ही उसे एयरोस्पेस क्षेत्र में कम से कम पांच वर्षों का अनुभव होना चाहिए। वित्तीय पात्रता के तहत संगठन का औसत वार्षिक कारोबार 800 करोड़ रुपये से अधिक होना चाहिए या उसका बाजार मूल्यांकन कम से कम 2,000 करोड़ रुपये होना चाहिए। इन मानकों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चयनित कंपनियों के पास इतनी जटिल और उन्नत तकनीक को संभालने की क्षमता हो।

अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधार और निजी भागीदारी

भारत सरकार ने वर्ष 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र में व्यापक सुधारों की घोषणा की थी, जिनका उद्देश्य निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना था। इन सुधारों के तहत इन-स्पेस की स्थापना की गई, जो निजी कंपनियों को अंतरिक्ष गतिविधियों में भाग लेने की अनुमति और प्रोत्साहन प्रदान करता है। एलवीएम3 कार्यक्रम भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इससे इसरो को गगनयान जैसे उन्नत और मानव अंतरिक्ष मिशनों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा, जबकि नियमित प्रक्षेपण गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ेगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एलवीएम3 भारत का सबसे भारी और सबसे शक्तिशाली परिचालन प्रक्षेपण यान है।
  • चंद्रयान-3 मिशन का प्रक्षेपण वर्ष 2023 में एलवीएम3 के माध्यम से किया गया था।
  • इन-स्पेस की स्थापना भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने और उसे अधिकृत करने के लिए की गई थी।
  • वनवेब एक ब्रिटेन आधारित उपग्रह समूह है, जिसके 72 उपग्रहों का प्रक्षेपण एलवीएम3 द्वारा 2022 और 2023 में किया गया था।

एलवीएम3 की प्रौद्योगिकी को निजी क्षेत्र के लिए उपलब्ध कराना भारत के अंतरिक्ष उद्योग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे देश में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का व्यावसायीकरण तेज होगा, प्रक्षेपण क्षमता बढ़ेगी और भारत वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में अपनी स्थिति को और मजबूत कर सकेगा। साथ ही यह पहल आत्मनिर्भर भारत और निजी क्षेत्र आधारित अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को भी नई गति प्रदान करेगी।

Originally written on June 11, 2026 and last modified on June 11, 2026.

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