निजी और विदेशी निवेश के लिए खुला भारत का परमाणु क्षेत्र

निजी और विदेशी निवेश के लिए खुला भारत का परमाणु क्षेत्र

भारत ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा नीतिगत बदलाव करते हुए निजी भारतीय कंपनियों और विदेशी साझेदारों के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) Act, 2025 के तहत अब परमाणु संयंत्रों के निर्माण, स्वामित्व और संचालन के लिए विनियमित अनुमति व्यवस्था बनाई गई है। यह कदम लंबे समय से राज्य-नियंत्रित रहे इस क्षेत्र में निवेश, तकनीक और क्षमता विस्तार की नई संभावनाएं जोड़ता है।

SHANTI Act से बदला परमाणु क्षेत्र का ढांचा

इस कानून के साथ Atomic Energy Act, 1962 और Civil Liability for Nuclear Damage Act, 2010 को निरस्त कर दिया गया है। नए ढांचे में निजी कंपनियों को परमाणु परियोजनाओं में भागीदारी की अनुमति दी गई है, लेकिन यह भागीदारी सुरक्षा और नियामकीय मंजूरी की शर्तों के अधीन होगी।

परमाणु ऊर्जा विभाग ने 14 अगस्त 2026 को इस कानून के तहत मसौदा नियम जारी किए। इन नियमों के अनुसार निजी खिलाड़ियों को औपचारिक लाइसेंस से पहले ही साइट तैयारी, भूमि अधिग्रहण और विक्रेता चयन जैसे कामों के लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिल सकती है। हालांकि किसी भी चरण पर यदि सुरक्षा शर्तें पूरी नहीं होतीं, तो नियामक परियोजना को रोक सकते हैं।

विदेशी तकनीक और निवेश के लिए नई गुंजाइश

मसौदा नियमों में उन विदेशी रिएक्टर तकनीकों के आयात और उपयोग की अनुमति भी दी गई है, जिनका विदेशों में सफल परिचालन रिकॉर्ड रहा हो। इसके साथ ही संयुक्त उपक्रमों के जरिए 49% तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की व्यवस्था भी रखी गई है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार परमाणु ऊर्जा को केवल सार्वजनिक क्षेत्र की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नियंत्रित निजी भागीदारी वाले रणनीतिक क्षेत्र के रूप में देख रही है।

2 मई 2026 को अडानी पावर ने दो परमाणु-समर्पित सहायक कंपनियां बनाई थीं—Rawatbhata-Raj Atomic Energy Ltd और Coastal-Maha Atomic Energy Ltd। इन्हें क्रमशः राजस्थान और महाराष्ट्र में संभावित परमाणु परियोजनाओं के लिए गठित किया गया था।

न्यूक्लियर एनर्जी मिशन और 2047 का लक्ष्य

12 अगस्त 2026 को सरकार ने लोकसभा में बताया कि भारत न्यूक्लियर एनर्जी मिशन के तहत दोहरी रणनीति पर काम कर रहा है। इसका लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावॉट-इलेक्ट्रिक (GWe) परमाणु क्षमता हासिल करना है। इस योजना में स्वदेशी 700 मेगावॉट रिएक्टरों के साथ-साथ 2033 तक पांच Small Modular Reactors (SMRs) विकसित करने की बात शामिल है।

SMR छोटे आकार के ऐसे परमाणु रिएक्टर होते हैं, जिन्हें अपेक्षाकृत कम उत्पादन और मॉड्यूलर तैनाती के लिए डिजाइन किया जाता है। ऊर्जा सुरक्षा, कम कार्बन उत्सर्जन और औद्योगिक मांग को देखते हुए इन्हें भविष्य की महत्वपूर्ण तकनीक माना जा रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • Atomic Energy Act, 1962 ने लगभग छह दशकों तक भारत के परमाणु क्षेत्र को मुख्यतः राज्य नियंत्रण में रखा।
  • Civil Liability for Nuclear Damage Act, 2010 परमाणु दुर्घटना की स्थिति में दायित्व से जुड़ा कानून है।
  • लोकसभा भारतीय संसद का निचला सदन है।
  • Small Modular Reactors (SMRs) पारंपरिक बड़े रिएक्टरों की तुलना में कम क्षमता वाले और मॉड्यूलर ढंग से लगाए जाने वाले रिएक्टर होते हैं।

SHANTI Act के जरिए भारत ने परमाणु ऊर्जा को एक नए निवेश-आधारित और तकनीक-संचालित ढांचे में ढालने की कोशिश की है। अब असली चुनौती सुरक्षा, पारदर्शिता और नियमन के साथ क्षमता विस्तार को संतुलित रखने की होगी।

Originally written on August 15, 2026 and last modified on August 15, 2026.

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