नासा ने नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप का निर्माण पूरा किया
नासा ने नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप के अंतिम असेंबली कार्य को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जो वर्ष 2026 में प्रस्तावित लॉन्च से पहले एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। मैरीलैंड स्थित गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर में निर्मित यह वेधशाला अब तक विकसित सबसे शक्तिशाली सर्वेक्षण दूरबीनों में से एक मानी जा रही है। इसे हबल और जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के बाद नासा का अगला बड़ा अंतरिक्ष मिशन माना जा रहा है।
यह टेलीस्कोप डार्क एनर्जी, डार्क मैटर, आकाशगंगा निर्माण और दूरस्थ ग्रह प्रणालियों का अभूतपूर्व स्तर पर अध्ययन करेगा। इसकी उन्नत तकनीक वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड की संरचना और उसके विस्तार को पहले से कहीं अधिक स्पष्ट रूप से समझने में मदद करेगी।
रोमन टेलीस्कोप की खास विशेषताएं
रोमन स्पेस टेलीस्कोप को दृश्य (Visible) और निकट-अवरक्त (Near-Infrared) प्रकाश में ब्रह्मांड का अवलोकन करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका मुख्य दर्पण 2.4 मीटर चौड़ा है, जो आकार में हबल स्पेस टेलीस्कोप के समान है।
हालांकि इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका अत्यंत व्यापक फील्ड ऑफ व्यू है, जो हबल की तुलना में लगभग 100 गुना अधिक है। इसका मतलब है कि यह एक ही तस्वीर में अंतरिक्ष के बहुत बड़े हिस्से को कैप्चर कर सकता है। नासा के अनुसार, यह हबल की तुलना में लगभग 1000 गुना तेजी से सर्वेक्षण डेटा एकत्र कर सकता है, जिससे बड़े पैमाने पर ब्रह्मांडीय मानचित्रण संभव होगा।
डार्क एनर्जी और डार्क मैटर पर विशेष फोकस
इस मिशन का एक प्रमुख उद्देश्य डार्क एनर्जी और डार्क मैटर को बेहतर ढंग से समझना है। ये दोनों मिलकर ब्रह्मांड का अधिकांश हिस्सा बनाते हैं, लेकिन इन्हें सीधे देखा नहीं जा सकता।
डार्क मैटर आकाशगंगाओं की गति को प्रभावित करता है, जबकि डार्क एनर्जी को ब्रह्मांड के तेजी से फैलने का कारण माना जाता है। रोमन टेलीस्कोप आकाशगंगाओं के बड़े त्रि-आयामी मानचित्र तैयार करेगा और यह पता लगाएगा कि समय के साथ ब्रह्मांडीय संरचनाएं कैसे बदली हैं। इससे वैज्ञानिक ब्रह्मांड की उत्पत्ति और भविष्य के बारे में बेहतर सिद्धांत विकसित कर सकेंगे।
बार-बार स्कैन और सुपरनोवा की खोज
रोमन टेलीस्कोप को एक ही आकाशीय क्षेत्र को बार-बार स्कैन करने के लिए तैयार किया गया है। इससे वैज्ञानिक सुपरनोवा विस्फोट जैसी अल्पकालिक ब्रह्मांडीय घटनाओं का पता लगा सकेंगे।
यदि किसी क्षेत्र को लगातार देखा जाए, तो अचानक होने वाले परिवर्तन आसानी से पकड़े जा सकते हैं। नासा का अनुमान है कि यह मिशन हजारों सुपरनोवा की पहचान करेगा, जिससे ब्रह्मांडीय विस्तार और अंतरिक्ष के विकास को समझने में महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नैन्सी ग्रेस रोमन को “मदर ऑफ हबल” कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अंतरिक्ष खगोल विज्ञान को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
- रोमन स्पेस टेलीस्कोप लैग्रेंज पॉइंट-2 (L2) से कार्य करेगा, जो पृथ्वी से लगभग 10 लाख मील दूर स्थित है।
- जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप भी L2 बिंदु पर ही कार्य कर रहा है।
- इस टेलीस्कोप को स्पेसएक्स के फाल्कन हेवी रॉकेट के माध्यम से लॉन्च किया जाएगा।
रोमन टेलीस्कोप में कोरोनाग्राफ नामक एक विशेष उपकरण भी लगाया गया है, जो चमकीले तारों की रोशनी को रोककर उनके आसपास मौजूद हल्के ग्रहों को देखने में मदद करता है। इससे बृहस्पति जैसे गैस दानव एक्सोप्लैनेट्स की प्रत्यक्ष तस्वीर लेना संभव हो सकता है। हालांकि यह अभी पृथ्वी जैसे ग्रहों की खोज पर केंद्रित नहीं है, लेकिन यह तकनीक भविष्य में रहने योग्य ग्रहों की खोज के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगी। नासा का यह मिशन अंतरिक्ष विज्ञान के नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।