नासा ने उच्च शक्ति वाले एमपीडी थ्रस्टर का सफल परीक्षण किया
नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी ने 24 फरवरी 2026 को एक नए लिथियम-आधारित मैग्नेटोप्लाज्माडायनेमिक यानी एमपीडी थ्रस्टर का सफल परीक्षण किया। यह परीक्षण अमेरिका में अब तक का सबसे शक्तिशाली इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन परीक्षण माना जा रहा है। इस प्रोटोटाइप ने 120 किलोवाट शक्ति हासिल की, जो भविष्य के गहरे अंतरिक्ष अभियानों और मंगल मिशनों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
क्या है मैग्नेटोप्लाज्माडायनेमिक थ्रस्टर
मैग्नेटोप्लाज्माडायनेमिक थ्रस्टर एक प्रकार का इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम है, जो विद्युत चुंबकीय क्षेत्रों की सहायता से आयनित ईंधन को तेज गति देता है। इस प्रक्रिया से अंतरिक्ष यान को निरंतर और प्रभावी थ्रस्ट प्राप्त होता है। नासा द्वारा परीक्षण किए गए इस प्रोटोटाइप में लिथियम धातु वाष्प को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया गया, जिससे संचालन के दौरान चमकदार प्लाज्मा धारा उत्पन्न हुई।
शक्ति और तापमान की विशेषताएं
इस एमपीडी थ्रस्टर की 120 किलोवाट क्षमता नासा के “साइकी मिशन” में इस्तेमाल किए गए इलेक्ट्रिक थ्रस्टरों से लगभग 25 गुना अधिक है। परीक्षण के दौरान इसका केंद्रीय टंगस्टन इलेक्ट्रोड 5,000 डिग्री फारेनहाइट यानी लगभग 2,800 डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो गया। इतनी अधिक ऊर्जा क्षमता भविष्य में लंबी दूरी के अंतरिक्ष अभियानों के लिए नई संभावनाएं पैदा करती है।
मंगल मिशन में उपयोगिता
नासा के अनुसार मानवयुक्त मंगल मिशनों के लिए 2 से 4 मेगावाट तक शक्ति वाले प्रोपल्शन सिस्टम की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे थ्रस्टरों को लगभग 23,000 घंटे यानी करीब 2.6 वर्षों तक लगातार कार्य करने में सक्षम होना होगा। वर्तमान रासायनिक रॉकेट तकनीक की तुलना में उन्नत इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन से मंगल तक यात्रा का समय काफी कम किया जा सकता है।
न्यूक्लियर इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन की भूमिका
न्यूक्लियर इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन प्रणाली छोटे परमाणु रिएक्टरों की सहायता से बिजली उत्पन्न करती है, जिसका उपयोग इलेक्ट्रोमैग्नेटिक थ्रस्टरों को चलाने में किया जाता है। नासा भविष्य के मंगल अभियानों के लिए इस तकनीक को महत्वपूर्ण मानता है। वर्तमान प्रणालियों से मंगल तक पहुंचने में लगभग नौ महीने लगते हैं, जबकि उन्नत इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन तकनीक इस अवधि को घटाकर 30 से 60 दिनों तक ला सकती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
” नासा का “साइकी मिशन” गहरे अंतरिक्ष में यात्रा के लिए इलेक्ट्रिक थ्रस्टरों का उपयोग करता है। ” 1 किलोवाट बराबर 1,000 वाट होता है, जबकि 1 मेगावाट बराबर 1,000 किलोवाट होता है। ” इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम लंबी अवधि तक प्रभावी थ्रस्ट प्रदान करने के लिए अंतरिक्ष यानों में उपयोग किए जाते हैं। ” न्यूक्लियर इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन भविष्य के मानवयुक्त मंगल अभियानों के लिए महत्वपूर्ण तकनीक मानी जा रही है। नासा का यह सफल परीक्षण अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। उन्नत इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन और न्यूक्लियर ऊर्जा आधारित प्रणालियां भविष्य में तेज, सुरक्षित और लंबी दूरी की अंतरिक्ष यात्राओं को संभव बना सकती हैं।