नाफेड और एनसीसीएफ को किसानों से सीधे खरीद का निर्देश, सहकारिता क्षेत्र में नई पहल

नाफेड और एनसीसीएफ को किसानों से सीधे खरीद का निर्देश, सहकारिता क्षेत्र में नई पहल

केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने 23 जून 2026 को राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड) और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ) को किसानों से सीधे दालों और तिलहनों की खरीद सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इस पहल का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना, बिचौलियों की भूमिका कम करना और भुगतान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है। सरकार ने इस व्यवस्था को जून 2028 तक पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

नाफेड और एनसीसीएफ की भूमिका

नाफेड भारत की प्रमुख राष्ट्रीय स्तर की सहकारी संस्था है, जो कृषि उत्पादों के विपणन, खरीद और भंडारण से संबंधित कार्य करती है। यह किसानों और बाजार के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करती है। दूसरी ओर, एनसीसीएफ उपभोक्ता हितों और आवश्यक वस्तुओं की खरीद एवं वितरण से जुड़ी राष्ट्रीय सहकारी संस्था है। दोनों संस्थाएं देश के सहकारिता ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने में योगदान देती हैं। सरकार का मानना है कि इनके माध्यम से किसानों तक सीधे पहुंच बनाकर कृषि विपणन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

किसानों से सीधे खरीद की नई व्यवस्था

दालें और तिलहन भारत की खाद्य सुरक्षा तथा खाद्य तेल आपूर्ति श्रृंखला के महत्वपूर्ण घटक हैं। अब इन फसलों की खरीद सीधे किसानों से की जाएगी और भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाएगा। इस प्रणाली से किसानों को समय पर भुगतान मिलने की संभावना बढ़ेगी तथा खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। बिचौलियों की संख्या कम होने से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकता है। साथ ही डिजिटल भुगतान व्यवस्था वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा देगी।

नई डिजिटल और प्रबंधन पहलें

नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नाफेड ने चार महत्वपूर्ण पहलें शुरू कीं, जिनका उद्देश्य खरीद, भंडारण और प्रबंधन प्रणाली को आधुनिक बनाना है। सबसे प्रमुख पहल नाफेक्स डॉट इन (Nafex.in) है, जो दालों और तिलहनों की डिजिटल नीलामी के लिए विकसित किया गया मंच है। इससे खरीदारों और विक्रेताओं के बीच अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी लेन-देन संभव होगा। दूसरी पहल “दृष्टि” (DRISHTI) है, जो दालों और तिलहनों की इन्वेंट्री प्रबंधन प्रणाली के रूप में कार्य करेगी। इसके माध्यम से भंडारण और उपलब्धता की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी। इसके अतिरिक्त, ईआरपी (Enterprise Resource Planning) प्रणाली को संस्थागत प्रबंधन और संचालन को अधिक कुशल बनाने के लिए शुरू किया गया है। यह विभिन्न प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रियाओं को एकीकृत करने में सहायता करेगी।

नाफेड कल्याण छात्रवृत्ति कार्यक्रम

नाफेड ने “नाफेड कल्याण” नामक एक नई छात्रवृत्ति योजना की भी घोषणा की है। यह योजना किसान परिवारों के बच्चों की उच्च शिक्षा और करियर विकास को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की गई है। संस्था ने अपने लाभ का 1 प्रतिशत हिस्सा छात्रवृत्ति कार्यक्रम के लिए आवंटित करने की योजना बनाई है। इससे ग्रामीण और कृषि पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सहायता मिलेगी तथा सामाजिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

नाफेड की बढ़ती वित्तीय क्षमता

नाफेड ने हाल के वर्षों में उल्लेखनीय वित्तीय वृद्धि दर्ज की है। जहां कभी इसका वार्षिक कारोबार लगभग 500 करोड़ रुपये था, वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। अब संस्था ने 50,000 करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह वृद्धि दर्शाती है कि सहकारी संस्थाएं आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकती हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • नाफेड का पूरा नाम राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (National Agricultural Cooperative Marketing Federation) है।
  • एनसीसीएफ का पूरा नाम राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (National Cooperative Consumers’ Federation) है।
  • नाफेक्स डॉट इन दालों और तिलहनों की डिजिटल नीलामी के लिए विकसित मंच है।
  • नाफेड ने अपने लाभ का 1 प्रतिशत हिस्सा छात्रवृत्ति कार्यक्रम के लिए आवंटित करने की घोषणा की है।

किसानों से सीधे खरीद और डिजिटल प्रबंधन प्रणालियों की शुरुआत भारतीय सहकारिता आंदोलन को नई दिशा देने वाली पहल मानी जा रही है। इससे कृषि विपणन अधिक पारदर्शी बनेगा, किसानों की आय बढ़ाने में सहायता मिलेगी और सहकारी संस्थाओं की भूमिका और मजबूत होगी। आने वाले वर्षों में यह मॉडल कृषि क्षेत्र में दक्षता और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

Originally written on June 24, 2026 and last modified on June 24, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *