नागोया प्रोटोकॉल के तहत भारत बना वैश्विक अग्रणी

नागोया प्रोटोकॉल के तहत भारत बना वैश्विक अग्रणी

भारत ने नागोया प्रोटोकॉल के तहत Internationally Recognised Certificates of Compliance (IRCCs) जारी करने में विश्व स्तर पर पहला स्थान हासिल किया है। मार्च-अप्रैल 2026 तक भारत ने लगभग 3,556 से 3,561 प्रमाणपत्र जारी किए, जबकि वैश्विक स्तर पर ABS Clearing-House में कुल 6,311 प्रमाणपत्र दर्ज किए गए थे। यह उपलब्धि जैव विविधता संरक्षण और आनुवंशिक संसाधनों के न्यायसंगत उपयोग में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।

नागोया प्रोटोकॉल और ABS व्यवस्था

नागोया प्रोटोकॉल जैव विविधता सम्मेलन यानी Convention on Biological Diversity का एक पूरक समझौता है, जिसे वर्ष 2010 में अपनाया गया था। इसका उद्देश्य आनुवंशिक संसाधनों तक पहुंच और उनसे होने वाले लाभों का निष्पक्ष एवं समान वितरण सुनिश्चित करना है। ABS Clearing-House एक अंतरराष्ट्रीय मंच है, जहां सदस्य देश access and benefit-sharing से जुड़ी सूचनाएं साझा करते हैं। इससे पारदर्शिता और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा मिलता है।

IRCC क्या हैं

Internationally Recognised Certificates of Compliance ऐसे आधिकारिक दस्तावेज होते हैं, जो यह प्रमाणित करते हैं कि आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से पहले Prior Informed Consent प्राप्त किया गया है और Mutually Agreed Terms तय किए गए हैं। इन प्रमाणपत्रों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जैविक संसाधनों का उपयोग कानूनी और पारदर्शी तरीके से हो तथा स्थानीय समुदायों और संसाधन प्रदाताओं को उचित लाभ मिले।

भारत की संस्थागत व्यवस्था

भारत की जैव विविधता शासन प्रणाली Biological Diversity Act, 2002 पर आधारित है। इसके तहत National Biodiversity Authority केंद्रीय स्तर पर कार्य करती है, जबकि राज्यों में State Biodiversity Boards और स्थानीय स्तर पर Biodiversity Management Committees काम करती हैं। देशभर में 2,76,653 से अधिक Biodiversity Management Committees गठित की जा चुकी हैं, जो स्थानीय जैव संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन में अहम भूमिका निभा रही हैं।

लाभ-साझाकरण और रिपोर्टिंग

भारत ने 27 फरवरी 2026 को नागोया प्रोटोकॉल के क्रियान्वयन पर अपनी पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में 1 नवंबर 2017 से 31 दिसंबर 2025 की अवधि को शामिल किया गया। इस दौरान 12,830 ABS approvals दर्ज किए गए। इसी अवधि में भारत ने ABS approvals के माध्यम से लगभग 263 करोड़ रुपये अर्जित किए और करीब 145 करोड़ रुपये लाभार्थियों में वितरित किए। लाभों में वित्तीय सहायता, क्षमता निर्माण और technology transfer जैसी व्यवस्थाएं शामिल थीं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • नागोया प्रोटोकॉल Convention on Biological Diversity से जुड़ा समझौता है।
  • ABS Clearing-House जैव विविधता से संबंधित सूचना साझा करने का अंतरराष्ट्रीय मंच है।
  • फ्रांस, स्पेन, अर्जेंटीना, पनामा और केन्या भी IRCCs जारी करने वाले देशों में शामिल हैं।
  • IRCCs का संबंध Prior Informed Consent और Mutually Agreed Terms से होता है।

भारत की यह उपलब्धि वैश्विक जैव विविधता संरक्षण में उसकी मजबूत भागीदारी को दर्शाती है। इससे न केवल पर्यावरणीय संतुलन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय समुदायों और पारंपरिक ज्ञान धारकों को भी आर्थिक और सामाजिक लाभ प्राप्त होंगे।

Originally written on May 25, 2026 and last modified on May 25, 2026.

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