जैव विविधता दिवस पर स्थानीय संरक्षण की चर्चा
हर वर्ष 22 मई को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया जाता है। यह दिवस जैव विविधता संरक्षण के महत्व को समझाने और पर्यावरणीय संतुलन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। वर्ष 2026 की थीम “स्थानीय स्तर पर कार्य, वैश्विक प्रभाव के लिए” रखी गई है। इस अवसर पर ओडिशा की जनजातीय बीज संरक्षण परंपराएं, सामुदायिक बीज बैंक और मोटे अनाजों की विविधता को जलवायु-अनुकूल कृषि और जैव विविधता संरक्षण के महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
क्या है अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस
संयुक्त राष्ट्र द्वारा 22 मई को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया जाता है। यह दिवस जैव विविधता सम्मेलन से जुड़ा है, जिसे वर्ष 1992 में रियो डी जेनेरियो में आयोजित पृथ्वी सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षर के लिए खोला गया था। इसका उद्देश्य पारिस्थितिकी तंत्र, प्रजातियों और आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
ओडिशा में बीज संरक्षण की परंपरा
ओडिशा के जनजातीय और वर्षा आधारित क्षेत्रों में पारंपरिक बीज संरक्षण की समृद्ध परंपरा मौजूद है। आदिवासी किसान पीढ़ियों से पारंपरिक बीजों और कृषि पद्धतियों को सुरक्षित रखते आए हैं। राज्य में महिला बीज संरक्षक विभिन्न प्रकार के मोटे अनाज और स्थानीय फसलों के बीजों को संरक्षित करती हैं, जो विशेष मिट्टी और वर्षा परिस्थितियों के अनुकूल होते हैं।
सामुदायिक बीज बैंक की भूमिका
सामुदायिक बीज बैंक स्थानीय स्तर पर पारंपरिक बीजों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था है। ओडिशा के पूर्वी घाट क्षेत्रों में कोंध और परजा समुदाय की महिलाएं ऐसे बीज बैंकों से जुड़ी हैं। यहां बाजरा, दालें और धान की स्थानीय किस्मों को संरक्षित किया जाता है। इससे फसलों की आनुवंशिक विविधता बनी रहती है और पहाड़ी क्षेत्रों की कृषि प्रणाली को मजबूती मिलती है।
जलवायु-अनुकूल कृषि में मोटे अनाज
मोटे अनाज जैसे रागी, बाजरा और ज्वार कम पानी में उगाए जा सकते हैं और शुष्क क्षेत्रों के लिए उपयुक्त माने जाते हैं। ये फसलें जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने में अधिक सक्षम होती हैं। ओडिशा में फसल कटाई के बाद बीज चयन की पारंपरिक प्रक्रिया आज भी अपनाई जाती है, जिससे स्थानीय जलवायु के अनुसार फसलों की अनुकूलता बनी रहती है।
संस्थागत सहयोग और परियोजनाएं
डाइवर्सीफार्म-इंडिया परियोजना का संचालन फ्रिड्टजोफ नानसेन संस्थान और एम.एस. स्वामीनाथन अनुसंधान फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है। यह परियोजना सामुदायिक बीज बैंकों के माध्यम से छोटे किसानों की खाद्य सुरक्षा, पोषण और आजीविका को मजबूत करने पर कार्य करती है। इसके अलावा वासन और श्री अन्न अभियान ने 2018 से 2024 के बीच ओडिशा के 30 जिलों में 253 सहभागी किस्म परीक्षण आयोजित किए।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
” अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस हर वर्ष 22 मई को मनाया जाता है। ” वर्ष 2026 की थीम “Acting locally for global impact” है। ” जैव विविधता सम्मेलन पर 1992 में रियो डी जेनेरियो में हस्ताक्षर शुरू हुए थे। ” मोटा अनाज शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में उगाई जाने वाली छोटी बीज वाली फसलें हैं। जैव विविधता संरक्षण और पारंपरिक कृषि पद्धतियां आज के जलवायु संकट के दौर में अत्यंत महत्वपूर्ण बन गई हैं। ओडिशा के सामुदायिक बीज बैंक और जनजातीय बीज संरक्षण मॉडल स्थानीय स्तर पर किए गए ऐसे प्रयासों का उदाहरण हैं, जिनका प्रभाव वैश्विक पर्यावरणीय संतुलन पर भी पड़ सकता है।