नदेंडला भास्कर राव का निधन, आंध्र प्रदेश की राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त

नदेंडला भास्कर राव का निधन, आंध्र प्रदेश की राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त

अविभाजित आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के सह-संस्थापक नदेंडला भास्कर राव का 22 अप्रैल 2026 को हैदराबाद में 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे उम्र संबंधी बीमारियों के कारण एक निजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में उपचाराधीन थे। उनका निधन आंध्र प्रदेश की राजनीति के एक ऐसे युग का अंत माना जा रहा है, जिसने राज्य की सत्ता, दलगत संघर्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों को गहराई से प्रभावित किया।

नदेंडला भास्कर राव का नाम विशेष रूप से वर्ष 1984 के उस राजनीतिक घटनाक्रम के लिए याद किया जाता है, जब उन्होंने केवल 31 दिनों के लिए मुख्यमंत्री पद संभाला था। यह घटना भारतीय राजनीति में “सेव डेमोक्रेसी” आंदोलन के कारण ऐतिहासिक बन गई थी।

31 दिन की ऐतिहासिक मुख्यमंत्री पद की अवधि

वर्ष 1984 में जब एन.टी. रामाराव (एनटीआर) हृदय शल्य चिकित्सा के लिए अमेरिका गए हुए थे, उसी दौरान तेलुगु देशम पार्टी के भीतर राजनीतिक विद्रोह हुआ। नदेंडला भास्कर राव ने टीडीपी के कुछ विधायकों और कांग्रेस (आई) के समर्थन से मुख्यमंत्री पद संभाल लिया।

हालांकि, यह सरकार केवल 31 दिनों तक ही चल सकी। राज्यभर में “सेव डेमोक्रेसी” आंदोलन शुरू हुआ, जिसमें एनटीआर की वापसी की मांग की गई। जनता और राजनीतिक दबाव इतना बढ़ा कि केंद्र सरकार को तत्कालीन राज्यपाल ठाकुर राम लाल को वापस बुलाना पड़ा और अंततः एनटीआर को फिर से मुख्यमंत्री पद पर बहाल किया गया। यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की एक दुर्लभ और चर्चित घटना मानी जाती है।

टीडीपी के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका

नदेंडला भास्कर राव वर्ष 1982 में एन.टी. रामाराव के साथ तेलुगु देशम पार्टी के सह-संस्थापकों में शामिल थे। उन्होंने पार्टी के शुरुआती संगठन और विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1983 के विधानसभा चुनावों में टीडीपी की ऐतिहासिक जीत के बाद वे पहली टीडीपी सरकार में वित्त मंत्री बने।

हालांकि, 1984 के राजनीतिक संकट और एनटीआर से टकराव के बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। इसके बावजूद उनका राजनीतिक प्रभाव लंबे समय तक बना रहा।

लंबा राजनीतिक सफर और बदलते दल

गुंटूर जिले के मूल निवासी भास्कर राव का राजनीतिक जीवन कई दशकों तक फैला रहा। वे विजयवाड़ा पूर्व, वेमुरु और तेनाली विधानसभा क्षेत्रों से विधायक रहे। उन्होंने 1978 में कांग्रेस से विधायक के रूप में पहली जीत दर्ज की थी।

बाद में 1998 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर खम्मम से लोकसभा चुनाव भी जीता। वर्ष 2019 में वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। यह उनके लंबे और बहुआयामी राजनीतिक सफर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव था।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • नदेंडला भास्कर राव ने 1984 में अविभाजित आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में केवल 31 दिन कार्य किया।
  • “सेव डेमोक्रेसी” आंदोलन के बाद एन.टी. रामाराव को दोबारा मुख्यमंत्री बनाया गया था।
  • तेलुगु देशम पार्टी (TDP) की स्थापना 1982 में एन.टी. रामाराव और अन्य नेताओं ने मिलकर की थी।
  • ठाकुर राम लाल 1984 के राजनीतिक संकट के दौरान आंध्र प्रदेश के राज्यपाल थे।

नदेंडला भास्कर राव भले ही कई राजनीतिक विवादों से जुड़े रहे हों, लेकिन आंध्र प्रदेश की राजनीति में उनका योगदान और प्रभाव लंबे समय तक महसूस किया जाता रहेगा। उनके पुत्र नदेंडला मनोहर वर्तमान में जन सेना पार्टी के वरिष्ठ नेता और आंध्र प्रदेश की टीडीपी-नीत एनडीए सरकार में मंत्री हैं। 24 अप्रैल को उनके अंतिम संस्कार के साथ राज्य की राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय औपचारिक रूप से समाप्त हो जाएगा।

Originally written on April 22, 2026 and last modified on April 22, 2026.

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