देवदुर्गा में सोना-तांबा खोज से खनिज अन्वेषण में तेलंगाना की नई एंट्री
तेलंगाना ने कर्नाटक के रायचूर जिले के देवदुर्गा तालुक के लिंगदहल्लि गांव में सोना और तांबा खोज कार्यक्रम शुरू किया है। 199.13 वर्ग किलोमीटर में फैला यह ब्लॉक राज्य की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है, क्योंकि यह कंपनी की महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की खोज में पहली एंट्री है।
देवदुर्गा ब्लॉक क्यों अहम है
देवदुर्गा कर्नाटक का खनिज-समृद्ध क्षेत्र है और यहां सोना तथा तांबा जैसे धात्विक खनिजों की संभावना को लेकर अन्वेषण शुरू किया गया है। यह ब्लॉक केंद्रीय खान मंत्रालय की नीलामी प्रक्रिया के जरिए आवंटित हुआ था। ऐसे ब्लॉकों का उद्देश्य केवल खनिजों की मौजूदगी की पुष्टि करना नहीं, बल्कि आगे चलकर संसाधन आकलन और संभावित खनन की तैयारी करना भी होता है।
सोना और तांबा दोनों ही औद्योगिक, विद्युत और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। तांबा बिजली के तारों, उपकरणों और औद्योगिक ढांचे में व्यापक रूप से उपयोग होता है, जबकि सोना वित्तीय और औद्योगिक दोनों क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाता है।
SCCL के लिए रणनीतिक विस्तार
सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड का इतिहास 136 वर्षों से अधिक पुराना है और यह अब तक मुख्य रूप से कोयला खनन के लिए जानी जाती रही है। देवदुर्गा परियोजना के साथ कंपनी ने पहली बार सोना और तांबा जैसे खनिजों की खोज के क्षेत्र में कदम रखा है। यह विस्तार संकेत देता है कि सार्वजनिक क्षेत्र की खनन कंपनियां अब पारंपरिक कोयला कारोबार से आगे बढ़कर विविध खनिज संसाधनों की ओर भी देख रही हैं।
खनिज अन्वेषण में लाइसेंस, सर्वेक्षण और भूवैज्ञानिक आकलन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। इस परियोजना के जरिए क्षेत्र की भूगर्भीय क्षमता को समझने और भविष्य की खनन संभावनाओं का मूल्यांकन करने में मदद मिलेगी।
प्रशासनिक तैयारी और ऊर्जा से जुड़ा पहलू
इस परियोजना से जुड़े प्रशासनिक कदम भी तेजी से आगे बढ़े हैं। बेंगलुरु में 6 अगस्त 2026 को कर्नाटक खान एवं भूविज्ञान विभाग के निदेशक रंगप्पा और SCCL के निदेशक के. वी. वेंकटेश्वरलु के बीच अन्वेषण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके बाद 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान SCCL के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. बुद्ध प्रकाश ज्योति ने अन्वेषण लाइसेंस की घोषणा की।
दौरे के दौरान तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्का ने कर्नाटक के ऊर्जा मंत्री के. जे. जॉर्ज से SCCL और कर्नाटक पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के बीच संयुक्त उपक्रम पर भी चर्चा की। यह बातचीत कोयले की उपलब्धता और ताप विद्युत संयंत्रों की जरूरतों से जुड़ी थी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सोना और तांबा दोनों को धात्विक खनिज माना जाता है और इनका उपयोग उद्योग, बिजली और वित्तीय क्षेत्र में होता है।
- सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड भारत की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की खनन कंपनियों में से एक है।
- रायचूर जिला कर्नाटक में स्थित है और खनिज तथा ऊर्जा गतिविधियों के लिए जाना जाता है।
- भारत में खनिज अन्वेषण आम तौर पर केंद्रीय खान मंत्रालय की नीलामी और लाइसेंस व्यवस्था के तहत होता है।
देवदुर्गा में शुरू हुआ यह अन्वेषण कार्यक्रम खनिज खोज, ऊर्जा सुरक्षा और सार्वजनिक क्षेत्र की खनन कंपनियों के विस्तार, तीनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।