कर्नाटक में हिंदाल्को का सुपरफाइन एथ प्लांट, फायर-सेफ्टी मटेरियल में आत्मनिर्भरता की दिशा
हिंदाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने कर्नाटक के बेलगावी में भारत का पहला ग्रीनफील्ड सुपरफाइन प्रिसिपिटेटेड एल्युमिनियम ट्राइहाइड्रेट (PPT ATH) विनिर्माण संयंत्र शुरू किया है। यह विशेष एल्युमिना-आधारित सामग्री अग्नि-सुरक्षा से जुड़े उत्पादों में इस्तेमाल होती है और इसके घरेलू उत्पादन से आयात पर निर्भरता घटने की उम्मीद है।
क्या है सुपरफाइन PPT ATH और क्यों है अहम
प्रिसिपिटेटेड एल्युमिनियम ट्राइहाइड्रेट, जिसे ATH भी कहा जाता है, एल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड-आधारित एक खनिज यौगिक है। इसे पॉलिमर में फ्लेम-रिटार्डेंट फिलर के रूप में उपयोग किया जाता है। सुपरफाइन PPT ATH का उपयोग खास तौर पर हैलोजन-फ्री फ्लेम-रिटार्डेंट सामग्री, पॉलिमर इंसुलेटर और थर्मल इंसुलेशन उत्पादों में होता है। यह सामग्री आग को फैलने से रोकने और विषैली गैसों के उत्सर्जन को कम करने में मदद करती है।
उत्पादन क्षमता और चरणबद्ध विस्तार
बेलगावी स्थित इस संयंत्र की पहले चरण में वार्षिक उत्पादन क्षमता 30,000 टन रखी गई है। कंपनी ने इसे चरणबद्ध तरीके से 60,000 टन प्रति वर्ष तक बढ़ाने की योजना बनाई है, यानी शुरुआती क्षमता से दोगुनी। यह विस्तार घरेलू बाजार में बढ़ती मांग को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर बिजली, बुनियादी ढांचे और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्रों में।
हरित ऊर्जा से चलने वाला विशेष संयंत्र
हिंदाल्को ने इस इकाई को अपनी तरह का दुनिया का एकमात्र स्पेशलिटी एल्युमिना प्लांट बताया है, जो पूरी तरह नवीकरणीय ऊर्जा पर आधारित है। इसकी ऊर्जा जरूरतें सौर, पवन और बायोमास स्रोतों से पूरी की जाती हैं। संयंत्र में पूरी तरह स्वचालित प्रक्रिया नियंत्रण प्रणाली भी लगाई गई है, जिसे कंपनी के इन-हाउस “फ्लास्क-टू-फैक्ट्री” अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी कार्यक्रम के तहत विकसित किया गया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- हिंदाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड आदित्य बिड़ला समूह की धातु क्षेत्र की प्रमुख कंपनी है।
- बेलगावी कर्नाटक का एक प्रमुख शहर है और नया PPT ATH संयंत्र यहीं स्थापित किया गया है।
- ATH का पूरा नाम Aluminium Trihydrate है, जिसका उपयोग फ्लेम-रिटार्डेंट एडिटिव के रूप में होता है।
- HFFR का अर्थ है Halogen-Free Flame-Retardant, जिसका उपयोग केबल इंसुलेशन और सुरक्षा सामग्री में किया जाता है।
यह संयंत्र भारत में विशेष अग्नि-सुरक्षा सामग्री के घरेलू उत्पादन को मजबूती देता है। साथ ही, यह औद्योगिक विनिर्माण में हरित ऊर्जा और उन्नत तकनीक के संयोजन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी बनता है।