दुधवा टाइगर रिजर्व में गैंडों की संख्या बढ़कर 53 हुई, 2026 की गणना में दर्ज हुई बढ़ोतरी
उत्तर प्रदेश के दुधवा टाइगर रिजर्व में भारतीय एक सींग वाले गैंडों की संख्या बढ़कर 53 हो गई है। यह जानकारी 25 से 27 जून 2026 के बीच आयोजित चौथी गैंडा गणना (राइनो सेंसस) में सामने आई। गणना के अनुसार रिजर्व में 17 वयस्क नर, 25 वयस्क मादा तथा एक वर्ष से अधिक आयु के 11 शावक मौजूद हैं। हाल के वर्षों में कुछ गैंडों की मृत्यु होने के बावजूद कुल आबादी में पांच की शुद्ध वृद्धि दर्ज की गई है, जो संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाती है।
भारतीय गैंडा और उसका संरक्षण
भारतीय गैंडा, जिसे ग्रेटर वन-हॉर्न्ड राइनोसेरोस भी कहा जाता है, अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) की रेड लिस्ट में असुरक्षित (Vulnerable) श्रेणी में शामिल है। यह प्रजाति भारतीय उपमहाद्वीप की मूल निवासी है और अपने एक काले सींग के लिए प्रसिद्ध है। भारत में इसकी सबसे बड़ी आबादी असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में पाई जाती है, जबकि दुधवा टाइगर रिजर्व जैसे अन्य संरक्षित क्षेत्रों में भी इसकी छोटी लेकिन महत्वपूर्ण आबादी मौजूद है। भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत इसे सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है।
दुधवा में गैंडा पुनर्स्थापन कार्यक्रम
दुधवा टाइगर रिजर्व उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में भारत-नेपाल सीमा के निकट स्थित एक महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्र है। यहां गैंडा पुनर्स्थापन कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 1984-85 में हुई थी, जब असम और नेपाल से सात संस्थापक गैंडों को लाकर बसाया गया। इस पहल का उद्देश्य गैंडों की सुरक्षित और स्थायी आबादी विकसित करना तथा उनकी आनुवंशिक विविधता को बढ़ावा देना था। आज यह कार्यक्रम देश के सफल वन्यजीव पुनर्स्थापन प्रयासों में गिना जाता है।
गैंडा गणना और प्रबंधन व्यवस्था
वर्ष 2026 की गैंडा गणना 20 प्रशिक्षित टीमों द्वारा की गई, जिनमें वन विभाग के अधिकारियों के साथ डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के विशेषज्ञ भी शामिल थे। दुधवा में गैंडों के संरक्षण के लिए दो विशेष राइनो रिहैबिलिटेशन (आरआर-1 और आरआर-2) बाड़े बनाए गए हैं। इनका उपयोग प्रजनन, सुरक्षा और उपयुक्त समय पर गैंडों को प्राकृतिक आवास में छोड़ने के लिए किया जाता है। जुलाई 2026 तक छह गैंडे आरआर-1, 36 गैंडे आरआर-2 में तथा 11 गैंडे खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। इनमें विजय श्री, दीपिका, नकुल, ऋद्धि, हर्ष, दीप्ति, सुषमा और राशि जैसे गैंडे शामिल हैं।
हालिया चुनौतियां और संरक्षण की उपलब्धियां
हाल के समय में दुधवा में तीन गैंडों की मृत्यु दर्ज की गई। इनमें चार वर्षीय नर शावक हिमांशु, मार्च 2026 में दो बाघों के हमले में मारी गई मादा गैंडा राजेश्वरी तथा आठ माह की एक मादा शावक शामिल है, जिसे नेपोलियन नामक प्रभुत्वशाली नर गैंडे ने मार दिया। इन घटनाओं के बावजूद गैंडों की कुल संख्या में वृद्धि यह दर्शाती है कि संरक्षण और प्रबंधन के प्रयास प्रभावी साबित हो रहे हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय गैंडा (ग्रेटर वन-हॉर्न्ड राइनोसेरोस) आईयूसीएन रेड लिस्ट में असुरक्षित (Vulnerable) श्रेणी में सूचीबद्ध है।
- भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत भारतीय गैंडे को सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है।
- दुधवा टाइगर रिजर्व उत्तर प्रदेश के तराई घासभूमि एवं दलदली पारिस्थितिकी तंत्र में स्थित है, जहां बारहसिंगा, बंगाल टाइगर और अनेक दुर्लभ वन्यजीव पाए जाते हैं।
- भारत में गैंडा पुनर्स्थापन और स्थानांतरण कार्यक्रमों का उद्देश्य आनुवंशिक विविधता बढ़ाना तथा विभिन्न संरक्षित क्षेत्रों में सुरक्षित आबादी विकसित करना है।
दुधवा टाइगर रिजर्व में गैंडों की संख्या में हुई वृद्धि भारत के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह दर्शाता है कि वैज्ञानिक प्रबंधन, पुनर्स्थापन कार्यक्रम और सतत निगरानी के माध्यम से संकटग्रस्त प्रजातियों का सफल संरक्षण संभव है। आने वाले वर्षों में इन प्रयासों से भारतीय गैंडे की आबादी को और अधिक सुरक्षित एवं स्थिर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।