दिल्ली लक्ष्मी योजना से महिलाओं को मासिक सहायता की नई शुरुआत
दिल्ली में महिलाओं के लिए शुरू की गई लक्ष्मी योजना ने आर्थिक सहायता को सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने की नई व्यवस्था पेश की है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये दिए जाएंगे, जिसमें राशि का एक हिस्सा बचत साधन में और एक हिस्सा डिजिटल मुद्रा वॉलेट में भेजा जाएगा।
योजना का ढांचा और भुगतान व्यवस्था
दिल्ली लक्ष्मी योजना 21 से 60 वर्ष आयु वर्ग की उन महिलाओं के लिए है, जो कम आय वाले परिवारों से आती हैं। योजना के अनुसार हर लाभार्थी को 2,500 रुपये मासिक सहायता मिलेगी। इसमें 1,500 रुपये लॉक्ड फिक्स्ड डिपॉजिट या रिकरिंग डिपॉजिट में 31 जुलाई 2029 तक रखे जाएंगे, जबकि 1,000 रुपये सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी वॉलेट में जमा किए जाएंगे। यह संरचना केवल नकद सहायता नहीं, बल्कि बचत और डिजिटल भुगतान दोनों को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पात्रता और पंजीकरण की प्रक्रिया
योजना का लाभ पाने के लिए महिला का दिल्ली की पंजीकृत मतदाता होना जरूरी है। साथ ही, परिवार पिछले 10 वर्षों से दिल्ली में रह रहा हो और पिछले वर्ष घरेलू बिजली खपत 2,400 यूनिट से अधिक न हो। ऑनलाइन पंजीकरण पोर्टल 1 अगस्त 2026 को खोला गया था। लॉन्च तक 9.22 लाख से अधिक महिलाओं ने पंजीकरण कराया, जबकि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 6.52 लाख आवेदन पूरे पाए गए।
लॉन्च के दिन मिली मंजूरी और बजट प्रावधान
योजना के शुभारंभ के दिन पहली 4,000 से 4,190 स्वीकृति चिट्ठियां जारी की गईं। कुछ रिपोर्टों में लगभग 2,500 महिलाओं को मौके पर मंजूरी प्रमाणपत्र मिलने की बात भी सामने आई। दिल्ली सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना पर 5,100 करोड़ रुपये का बजट रखा है। सरकार का लक्ष्य 17 लाख से अधिक महिलाओं तक इसका लाभ पहुंचाना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी, केंद्रीय बैंक द्वारा जारी की जाने वाली डिजिटल मुद्रा होती है।
- फिक्स्ड डिपॉजिट और रिकरिंग डिपॉजिट भारत में बचत के लोकप्रिय बैंकिंग साधन हैं।
- टॉकटोरा स्टेडियम नई दिल्ली का प्रमुख इनडोर स्थल है, जहां राजनीतिक, सांस्कृतिक और खेल आयोजन होते रहे हैं।
- दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है, लेकिन यहां विधानसभा और मुख्यमंत्री की व्यवस्था भी है।
दिल्ली लक्ष्मी योजना का स्वरूप इसे सामान्य नकद सहायता योजनाओं से अलग बनाता है, क्योंकि इसमें तत्काल राहत के साथ बचत और डिजिटल लेनदेन दोनों पर जोर दिया गया है। आने वाले महीनों में इसके क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक पहुंच इसकी वास्तविक प्रभावशीलता तय करेंगे।