पीएमएफएमई बाज़ार ने छोटे खाद्य उद्यमों को बड़ा मंच दिया
नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में 24 अगस्त 2026 को पीएमएफएमई बाज़ार और पीएमएफएमई कॉन्क्लेव 2026 का उद्घाटन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य देश के सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को एक साझा मंच देना था, जहां छोटे उद्यमी, उत्पादक समूह और खरीदार सीधे जुड़ सकें। कार्यक्रम में 500 से अधिक हितधारकों की भागीदारी रही, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि ग्रामीण और स्थानीय खाद्य उद्यम अब औपचारिक बाजार व्यवस्था का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं।
सूक्ष्म खाद्य उद्यमों के लिए औपचारिकता की दिशा
पीएमएफएमई का पूरा नाम प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना है। इसे जून 2020 में शुरू किया गया था। इस योजना का मकसद छोटे खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को संगठित, तकनीकी रूप से सक्षम और बाजार से बेहतर रूप से जोड़ना है। इसके तहत ऋण-आधारित सहायता भी दी जाती है, ताकि छोटे उद्यम अपने कारोबार का विस्तार कर सकें और अधिक व्यवस्थित ढंग से काम कर सकें।
अगस्त 2026 तक योजना के ऋण-लिंक्ड घटक के तहत दो लाख से अधिक स्वीकृतियां दर्ज की गईं। यह आंकड़ा बताता है कि देश में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए वित्तीय सहायता की मांग लगातार बढ़ रही है।
बाज़ार में स्थानीय उत्पादों को मिला राष्ट्रीय मंच
पीएमएफएमई बाज़ार में देश के 25 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रदर्शक शामिल हुए। इनमें स्वयं सहायता समूह, किसान उत्पादक संगठन, सहकारी संस्थाएं और व्यक्तिगत सूक्ष्म उद्यमी मौजूद थे। प्रदर्शनी में स्थानीय, जातीय और पारंपरिक खाद्य उत्पादों को प्रमुखता दी गई, जिससे क्षेत्रीय स्वाद और पारंपरिक प्रसंस्करण विधियों को पहचान मिली।
यहां मोटे अनाज आधारित उत्पाद, मसाले, अचार, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, स्नैक्स और पारंपरिक पेय पदार्थ प्रदर्शित किए गए। ऐसे आयोजन छोटे उत्पादकों को केवल बिक्री का अवसर नहीं देते, बल्कि ब्रांडिंग, पैकेजिंग और गुणवत्ता मानकों को समझने का भी मौका देते हैं।
वित्त, तकनीक और बाजार से जुड़ाव पर फोकस
कॉन्क्लेव में सूक्ष्म खाद्य उद्यमों के लिए वित्त, तकनीक और बाजार तक पहुंच जैसे मुद्दों पर चर्चा केंद्रित रही। आयोजन का एक बड़ा उद्देश्य जमीनी स्तर के उद्यमों को आधुनिक खुदरा, डिजिटल वाणिज्य, संस्थागत खरीद और निर्यात बाजारों से जोड़ना था। इससे छोटे उत्पादकों के लिए केवल स्थानीय बिक्री तक सीमित रहने की बाधा कम हो सकती है।
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में ऐसे मंच इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि भारत में बड़ी संख्या में छोटे उद्यम अनौपचारिक ढांचे में काम करते हैं। जब उन्हें संस्थागत समर्थन, बाजार संपर्क और गुणवत्ता सुधार का अवसर मिलता है, तो उनकी आय और प्रतिस्पर्धा क्षमता दोनों बढ़ सकती हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पीएमएफएमई योजना जून 2020 में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के तहत शुरू की गई थी।
- इस योजना का पूरा नाम प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना है।
- स्वयं सहायता समूह और किसान उत्पादक संगठन इस योजना के प्रमुख संस्थागत घटक हैं।
- पीएमएफएमई बाज़ार में मोटे अनाज आधारित उत्पादों को भी प्रमुखता दी गई।
पीएमएफएमई बाज़ार और कॉन्क्लेव ने यह संदेश दिया कि छोटे खाद्य उद्यमों को केवल सहायता नहीं, बल्कि बाजार, तकनीक और पहचान का भी मंच चाहिए। यही औपचारिकीकरण की दिशा में इस योजना की सबसे बड़ी उपयोगिता है।