दिल्ली में 75 धरोहर स्मारकों के संरक्षण के लिए दो नई योजनाओं को मंजूरी

दिल्ली में 75 धरोहर स्मारकों के संरक्षण के लिए दो नई योजनाओं को मंजूरी

दिल्ली सरकार ने 30 जून 2026 को राजधानी की ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण और विकास के लिए दो महत्वपूर्ण योजनाओं को मंजूरी दी। ये योजनाएं पुरातत्व विभाग के अंतर्गत संरक्षित 75 स्मारकों पर लागू होंगी। इनका उद्देश्य ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण, उनके रखरखाव में सुधार तथा आगंतुकों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ये योजनाएं उन स्मारकों पर लागू होंगी जो दिल्ली प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 2004 के अंतर्गत संरक्षित हैं और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकार क्षेत्र से बाहर आते हैं।

मुख्यमंत्री स्मारक गोद लेने की योजना

दिल्ली मुख्यमंत्री स्मारक गोद लेने की योजना के तहत निजी संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) तथा इच्छुक व्यक्तियों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के माध्यम से स्मारकों के संरक्षण में भागीदारी का अवसर दिया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत ‘स्मारक मित्र’ पांच वर्षों के लिए किसी स्मारक को गोद ले सकेंगे। गोद लेने वाली संस्था या व्यक्ति स्मारक पर स्वच्छता, सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था और आगंतुक सुविधाओं जैसी व्यवस्थाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। इससे सरकार पर रखरखाव का बोझ कम होगा और स्मारकों की देखभाल अधिक व्यवस्थित ढंग से हो सकेगी।

संरक्षण कार्यों के लिए अनुदान योजना

दूसरी योजना स्मारकों के संरक्षण, पुनर्स्थापन और विकास कार्यों के लिए अनुदान योजना है। इसके अंतर्गत पात्र और विशेषज्ञ संस्थानों को अधिकतम 2 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। यह योजना संरक्षित धरोहरों के मूल संरक्षण, पुनर्स्थापन, संरचनात्मक सुधार तथा अन्य तकनीकी कार्यों को समर्थन देगी। इसका उद्देश्य ऐतिहासिक इमारतों की मूल संरचना और सांस्कृतिक महत्व को सुरक्षित रखते हुए उनका वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण करना है।

प्रमुख धरोहर स्थल और प्रशासनिक व्यवस्था

गोद लेने योग्य स्मारकों की सूची में मिर्ज़ा ग़ालिब की हवेली, भूली भटियारी का महल, म्यूटिनी मेमोरियल तथा दारा शिकोह पुस्तकालय भवन जैसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं। दिल्ली सरकार का अनुमान है कि इस मॉडल के माध्यम से प्रत्येक स्मारक के रखरखाव पर प्रतिवर्ष लगभग 4.5 लाख रुपये की बचत हो सकती है। योजना के तहत यदि किसी गोद लिए गए स्मारक से स्वीकृत गतिविधियों के माध्यम से आय प्राप्त होती है, तो उस आय का उपयोग केवल उसी स्मारक के रखरखाव, संरक्षण और विकास कार्यों में किया जाएगा। इस आय को निजी लाभ के रूप में उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • दिल्ली प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 2004 दिल्ली में संरक्षित स्मारकों से संबंधित राज्य कानून है।
  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करने वाला केंद्रीय संगठन है, जो राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों का संरक्षण करता है।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल का उपयोग भारत में विरासत संरक्षण, पर्यटन और आधारभूत संरचना परियोजनाओं में किया जाता है।
  • मिर्ज़ा ग़ालिब 19वीं शताब्दी के प्रसिद्ध उर्दू कवि थे, जिनका दिल्ली से गहरा संबंध रहा है।

दिल्ली सरकार की ये दोनों योजनाएं ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में जनभागीदारी और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। स्मारकों को गोद लेने की व्यवस्था, संरक्षण कार्यों के लिए वित्तीय सहायता और आय के पुनर्निवेश की नीति से राजधानी की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से दिल्ली प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्मारक अधिनियम, एएसआई, पीपीपी मॉडल और प्रमुख विरासत स्थलों से जुड़े तथ्य विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।

Originally written on July 1, 2026 and last modified on July 1, 2026.

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