दिल्ली में सूखा-क्षेत्र कृषि पर वैश्विक मंथन, 50 साल की साझेदारी पर फोकस

दिल्ली में सूखा-क्षेत्र कृषि पर वैश्विक मंथन, 50 साल की साझेदारी पर फोकस

नई दिल्ली में 10 सितंबर 2026 से तीन दिवसीय ग्लोबल ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 की शुरुआत हुई। राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में आयोजित इस सम्मेलन में भारत सहित एशिया, अफ्रीका और अमेरिका के वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, किसान प्रतिनिधि और विकास साझेदार शामिल हो रहे हैं। यह आयोजन सूखा-प्रवण और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में खेती की चुनौतियों और समाधान पर केंद्रित है।

सूखा-क्षेत्र खेती क्यों है अहम

ड्राईलैंड या शुष्क-भूमि कृषि उन क्षेत्रों की खेती को कहा जाता है, जहां वर्षा सीमित और अनियमित होती है। ऐसे इलाके शुष्क, अर्ध-शुष्क और शुष्क उप-आर्द्र क्षेत्रों में मिलते हैं। इन क्षेत्रों में उत्पादन काफी हद तक नमी संरक्षण, सूखा-सहिष्णु किस्मों और पानी के कुशल उपयोग पर निर्भर करता है। इसलिए इस तरह की कृषि खाद्य सुरक्षा, जल प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

आईसीएआर-आईसीआरआईसैट साझेदारी के 50 वर्ष

यह कांग्रेस भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और अंतरराष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (ICRISAT) की साझेदारी के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर से भी जुड़ी है। आईसीएआर भारत की शीर्ष कृषि अनुसंधान संस्था है, जबकि आईसीआरआईसैट हैदराबाद स्थित एक अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थान है, जो अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के लिए उपयुक्त फसलों पर काम करता है। इस साझेदारी ने सूखा-क्षेत्र कृषि, फसल सुधार और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।

कांग्रेस के प्रमुख विषय और संभावित नतीजे

सम्मेलन की थीम है “Transforming Dryland Agriculture with South–South Cooperation” यानी दक्षिण-दक्षिण सहयोग के जरिए सूखा-क्षेत्र कृषि में बदलाव। इसके तहत छह मुख्य विषयों पर चर्चा हो रही है—प्रजनन, जलवायु सहनशीलता, पोषण और बाजार, खेती प्रणालियां, बीज प्रणाली, तथा युवा और लैंगिक समावेशन।

कार्यक्रम में CGIAR के साथ विशेष सत्र भी रखे गए हैं। आयोजन का समापन नई द्विपक्षीय समझौता-ज्ञापनों (MoUs) और दिल्ली घोषणा-पत्र पर सहमति के साथ होने की उम्मीद है, जिसे “3D” के नाम से भी संदर्भित किया जा रहा है। अंतिम दिन 12 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र के दक्षिण-दक्षिण सहयोग दिवस के साथ मेल खाता है। यह आयोजन संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 से भी जुड़ा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ग्लोबल ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 का आयोजन नई दिल्ली के राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में हो रहा है।
  • आईसीएआर भारत की शीर्ष कृषि अनुसंधान संस्था है, जो कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के तहत काम करती है।
  • आईसीआरआईसैट का मुख्यालय हैदराबाद में है और यह अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसलों पर शोध करता है।
  • दक्षिण-दक्षिण सहयोग विकासशील देशों के बीच कृषि, तकनीक, स्वास्थ्य और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग का ढांचा है।

यह कांग्रेस सूखा-क्षेत्र कृषि को केवल उत्पादन के मुद्दे के रूप में नहीं, बल्कि जलवायु, पोषण, बाजार और समावेशन से जुड़े व्यापक एजेंडे के रूप में सामने लाती है। ऐसे में दिल्ली में हो रहा यह मंथन भविष्य की कृषि नीतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा तय करने में अहम माना जा रहा है।

Originally written on September 10, 2026 and last modified on September 10, 2026.

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