भारत का फोटोनिक्स बाजार 2031 तक 10 अरब डॉलर की ओर
भारत का घरेलू फोटोनिक्स बाजार अभी लगभग 2.5 अरब डॉलर आंका गया है और 2031 तक इसके 10 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह अनुमान ऐसे समय में सामने आया है जब देश में हाई-स्पीड डेटा सेंटर, टेलीकॉम नेटवर्क, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी पृष्ठभूमि में 9 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में इंडियन फोटोनिक्स एसोसिएशन (IPA) की शुरुआत 65 संस्थापक सदस्यों के साथ की गई।
फोटोनिक्स क्यों बन रहा है रणनीतिक क्षेत्र
फोटोनिक्स वह विज्ञान और तकनीक है जिसमें प्रकाश को उत्पन्न करने, नियंत्रित करने और पहचानने से जुड़ी प्रणालियों का विकास होता है। इसमें लेजर, ऑप्टिकल फाइबर, सेंसर, इमेजिंग सिस्टम और ऑप्टिकल इंटरकनेक्ट जैसे घटक शामिल होते हैं। यही कारण है कि यह क्षेत्र केवल शोध तक सीमित नहीं है, बल्कि दूरसंचार, डेटा ट्रांसमिशन, चिकित्सा उपकरण, औद्योगिक स्वचालन और रक्षा प्रणालियों में भी इसकी अहम भूमिका है।
डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ ऐसे घटकों की मांग बढ़ रही है जो तेज, भरोसेमंद और कम ऊर्जा खपत वाले संचार को संभव बनाते हैं। फोटोनिक्स इसी जरूरत को पूरा करता है, इसलिए इसे अगली पीढ़ी की तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
डेटा सेंटर और टेलीकॉम से बढ़ रही मांग
भारत में एआई डेटा सेंटर अब 10–40 Gbps क्षमता वाले फोटोनिक्स कनेक्टरों से आगे बढ़कर 100–400 Gbps क्षमता वाले समाधानों की ओर जा रहे हैं। इसका अर्थ है कि डेटा ट्रांसफर की गति और नेटवर्क क्षमता दोनों में बड़ा उन्नयन हो रहा है। ऐसे सिस्टम में ट्रांससीवर जैसे ऑप्टिकल घटक केंद्रीय भूमिका निभाते हैं, क्योंकि ये संचार नेटवर्क में सिग्नल भेजने और प्राप्त करने दोनों का काम करते हैं।
GX Group ने भी अपनी उन्नत फोटोनिक्स सुविधा में दिसंबर 2026 से उत्पादन शुरू करने की योजना घोषित की है। यह संकेत देता है कि घरेलू विनिर्माण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में उद्योग स्तर पर भी निवेश बढ़ रहा है।
नीति समर्थन और उद्योग संगठन की भूमिका
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- फोटोनिक्स प्रकाश-आधारित तकनीकों का क्षेत्र है, जिसमें ऑप्टिकल कम्युनिकेशन और लेजर सिस्टम शामिल हैं।
- ट्रांससीवर ऐसे उपकरण हैं जो संचार नेटवर्क में डेटा भेजने और प्राप्त करने, दोनों कार्य करते हैं।
- Gbps का अर्थ गीगाबिट्स प्रति सेकंड है और यह डेटा ट्रांसफर स्पीड का मानक माप है।
- इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन भारत में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण से जुड़ी सरकारी पहल है।
सरकार भारत सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण के तहत ऑप्टिकल घटकों के घरेलू उत्पादन को समर्थन दे रही है। इससे lasers, detectors, modulators, transceivers और optical interconnect जैसे उत्पादों के लिए स्थानीय विनिर्माण आधार तैयार होने की उम्मीद है।
IPA को भारत का पहला स्वतंत्र उद्योग निकाय बताया गया है, जिसका उद्देश्य फोटोनिक्स क्षेत्र की कंपनियों, तकनीकी जरूरतों और नीति-स्तरीय संवाद को एक मंच पर लाना है। हालांकि अलग-अलग सार्वजनिक आकलनों में बाजार का आकार अलग-अलग बताया गया है, लेकिन सभी अनुमान इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारत में फोटोनिक्स एक तेजी से उभरता हुआ और उच्च संभावनाओं वाला क्षेत्र बन चुका है।
जैसे-जैसे 5G, एआई, क्लाउड और हाई-स्पीड नेटवर्क का विस्तार होगा, फोटोनिक्स की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होती जाएगी। यही वजह है कि यह बाजार आने वाले वर्षों में भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा दोनों के लिए अहम साबित हो सकता है।