लद्दाख की स्टांजिन त्सांगयांग बनीं कर्गिल की पहली महिला अधिकारी
लद्दाख की स्टांजिन त्सांगयांग ने भारतीय सेना में कमीशन हासिल कर एक नया इतिहास रच दिया है। 5 सितंबर 2026 को चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी से पासआउट होने के बाद वे कर्गिल क्षेत्र की पहली महिला अधिकारी बनीं। उनके साथ 342 कैडेट्स ने प्रशिक्षण पूरा किया, लेकिन यह उपलब्धि इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि यह लद्दाख के दुर्गम जांस्कर क्षेत्र से निकलकर सेना की वर्दी तक पहुंचने की प्रेरक यात्रा है।
जांस्कर से सेना की वर्दी तक का सफर
जांस्कर, लद्दाख का ऊंचाई वाला और बेहद दुर्गम इलाका है, जहां आबादी कम है और संसाधन सीमित रहते हैं। ऐसे क्षेत्र से निकलकर सेना अधिकारी बनना केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का संकेत भी है। स्टांजिन त्सांगयांग ने लद्दाख के लेह स्थित लमडन मॉडल स्कूल में 14 साल तक पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने असम के तेजपुर विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और इसी दौरान एनसीसी से भी जुड़ीं।
ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी की भूमिका
चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी भारतीय सेना के प्रमुख प्रशिक्षण संस्थानों में से एक है। यहीं से शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। महिलाओं के लिए भी यह अकादमी लंबे समय से सेना में प्रवेश का महत्वपूर्ण केंद्र रही है। स्टांजिन का यहीं से कमीशन होना इस बात को रेखांकित करता है कि देश के दूरस्थ इलाकों की महिलाएं भी अब रक्षा सेवाओं में नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।
परिवार, पृष्ठभूमि और प्रेरणा
स्टांजिन के पिता टुंडुप त्सेरिंग एक स्कूल शिक्षक हैं और उनकी मां रिज़गिन लाडोल हैं। कमीशनिंग परेड में शामिल होने के लिए उनके माता-पिता लद्दाख से चेन्नई पहुंचे। यह दृश्य केवल एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि उस भरोसे का भी प्रतीक है जो शिक्षा, अनुशासन और अवसर मिलकर पैदा करते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी, चेन्नई, भारतीय सेना के शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों को प्रशिक्षित करती है।
- भारतीय सेना में अधिकारी बनने के प्रमुख प्रशिक्षण संस्थानों में चेन्नई की OTA और देहरादून की भारतीय सैन्य अकादमी शामिल हैं।
- एनसीसी भारत की त्रि-सेवा युवा संगठन है, जो रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करती है।
- लद्दाख 31 अक्टूबर 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद केंद्र शासित प्रदेश बना।
स्टांजिन त्सांगयांग की उपलब्धि लद्दाख, खासकर जांस्कर और कर्गिल जैसे क्षेत्रों की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा है। यह दिखाती है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियां भी मजबूत इच्छाशक्ति और सही अवसरों के सामने बाधा नहीं बनतीं।