कर्नाटक की नई एयरोस्पेस नीति से उद्योग विस्तार को रफ्तार
कर्नाटक मंत्रिमंडल ने 9 सितंबर 2026 को कर्नाटक एयरोस्पेस नीति 2026-2031 को मंजूरी दी। यह नीति एयरोस्पेस, रक्षा, विमानन और अंतरिक्ष अनुसंधान एवं विकास को एक व्यापक ढांचे में लाती है और इसका लक्ष्य बेंगलुरु से बाहर भी इस उद्योग का विस्तार करना है। राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों में 60,000 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा है।
बेंगलुरु से आगे बढ़ेगा एयरोस्पेस इकोसिस्टम
कर्नाटक पहले से ही देश के प्रमुख एयरोस्पेस और रक्षा निर्माण केंद्रों में शामिल है। बेंगलुरु में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कई इकाइयां विमानन और रक्षा उत्पादन से जुड़ी हैं। नई नीति का फोकस इस मजबूत आधार को राज्य के अन्य जिलों तक फैलाने पर है, ताकि औद्योगिक गतिविधियां केवल एक शहर तक सीमित न रहें।
एयरोस्पेस क्षेत्र में विमान निर्माण, रक्षा उत्पादन, एवियोनिक्स, रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल जैसी गतिविधियां शामिल होती हैं। ऐसे में यह नीति केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि सप्लाई चेन, परीक्षण ढांचे और कौशल विकास को भी बढ़ावा देने की दिशा में देखी जा रही है।
बड़े प्रोजेक्ट और निवेश प्रोत्साहन
नीति में बड़े विनिर्माण प्रोजेक्ट्स के लिए राज्य प्रोत्साहनों का उल्लेख है। इसमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स की 40 विमानों के निर्माण की योजना और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की 97 लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के उत्पादन की योजना जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नीति में क्षेत्रवार पूंजीगत सब्सिडी का भी प्रावधान है, जिसकी दरें 25% से 35% के बीच बताई गई हैं। हालांकि, वास्तविक लाभ परियोजना के आकार, स्थान और पात्रता शर्तों पर निर्भर करेंगे। इस तरह की औद्योगिक नीतियां आम तौर पर भूमि, कर-संबंधी राहत, पूंजी सहायता और सेक्टर-विशिष्ट सुविधा उपलब्ध कराती हैं।
एक ही बैठक में कई औद्योगिक फैसले
इसी दिन मंत्रिमंडल ने चिक्कबल्लापुर में भारत की पहली ड्रोन-टेस्टिंग सुविधा को भी मंजूरी दी, जिस पर लगभग 42.83 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह सुविधा ड्रोन के प्रमाणन, परीक्षण और नियंत्रित मूल्यांकन के लिए उपयोगी होगी।
इसके अलावा, औद्योगिक कार्यस्थलों के पास 10,000 मकानों वाली श्रमिक आवास योजना, आईआईआईटी-बेंगलुरु में 35 करोड़ रुपये का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हब और स्टार्टअप नीति 2026-2030 को भी मंजूरी दी गई। नई स्टार्टअप नीति के तहत पात्र स्टार्टअप 25 लाख रुपये तक के तकनीकी समाधान सीधे राज्य विभागों के सामने प्रस्तुत कर सकेंगे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन एक सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है।
- लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट भारत में विकसित स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम है।
- ड्रोन-टेस्टिंग सुविधा का उपयोग प्रमाणन, परीक्षण और नियंत्रित मूल्यांकन के लिए किया जाता है।
- कर्नाटक, खासकर बेंगलुरु, भारत के प्रमुख एयरोस्पेस और रक्षा निर्माण केंद्रों में गिना जाता है।
कुल मिलाकर, यह नीति कर्नाटक को एयरोस्पेस, ड्रोन, एआई और स्टार्टअप जैसे उभरते क्षेत्रों का मजबूत औद्योगिक केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।