दक्षिण भारतीय सिनेमा की दिग्गज साउकार जानकी का निधन
दक्षिण भारतीय सिनेमा की वरिष्ठ अभिनेत्री संकरामांची जानकी, जिन्हें साउकार जानकी के नाम से जाना जाता था, का 21 अगस्त 2026 को चेन्नई, तमिलनाडु में 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में लंबे समय तक सक्रिय रहीं जानकी ने कई पीढ़ियों के दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ी।
शुरुआत से ही बनीं अलग पहचान
साउकार जानकी का फिल्मी सफर 1950 की तेलुगु फिल्म शवुकार से शुरू हुआ, जिसका निर्देशन एल. वी. प्रसाद ने किया था। इसी फिल्म के बाद उन्हें स्क्रीन नाम साउकार जानकी के रूप में व्यापक पहचान मिली। कुछ संदर्भों में फिल्म के शीर्षक को साउकार भी लिखा गया, और यही नाम आगे चलकर उनके करियर से जुड़ गया।
चार भाषाओं में लंबा और प्रभावशाली करियर
जानकी का करियर कई दशकों तक फैला रहा और वे दक्षिण भारतीय सिनेमा की उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में रहीं, जिन्होंने अलग-अलग भाषाओं में लगातार काम किया। उनके फिल्मी सफर को लेकर प्रकाशित विवरणों में संख्या में थोड़ा अंतर मिलता है; कुछ जगह लगभग 400 फिल्मों का उल्लेख है, जबकि कुछ रिकॉर्ड में यह संख्या 450 से अधिक बताई गई है। यह उनके लंबे और बहुआयामी करियर की व्यापकता को दर्शाता है।
उनकी अंतिम स्क्रीन उपस्थिति 2023 की तेलुगु फिल्म अन्नी मांची शकुनमुले में रही, जिसका निर्देशन नंदिनी रेड्डी ने किया था। इस फिल्म में उन्होंने दादी की भूमिका निभाई थी। इससे स्पष्ट होता है कि वे उम्र के अंतिम चरण तक भी अभिनय से जुड़ी रहीं।
सम्मान, उपलब्धियां और सार्वजनिक सम्मान
साउकार जानकी को 2022 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। यह भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। इससे पहले उन्हें 1969 में कलैमामणि पुरस्कार मिला था, जो तमिलनाडु सरकार द्वारा कला और संस्कृति के क्षेत्र में योगदान के लिए दिया जाता है। इसके अलावा उन्हें कई नंदी पुरस्कार भी मिले, जो आंध्र प्रदेश में तेलुगु सिनेमा, रंगमंच और टेलीविजन से जुड़े प्रमुख राज्य स्तरीय सम्मान हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पद्म श्री भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
- कलैमामणि तमिलनाडु सरकार का कला और संस्कृति के क्षेत्र का प्रमुख सम्मान है।
- नंदी पुरस्कार आंध्र प्रदेश में तेलुगु सिनेमा, थिएटर और टेलीविजन से जुड़े हैं।
- एल. वी. प्रसाद तेलुगु और तमिल सिनेमा के प्रसिद्ध फिल्मकारों में गिने जाते हैं।
साउकार जानकी का निधन दक्षिण भारतीय सिनेमा के एक लंबे और समृद्ध अध्याय के अंत जैसा है। उनकी बहुभाषी मौजूदगी, सशक्त अभिनय और दशकों तक बनी लोकप्रियता उन्हें भारतीय फिल्म इतिहास में एक यादगार स्थान देती है।