तेलंगाना पुलिस ने आपातकालीन सेवाओं में एआई का बढ़ाया उपयोग

तेलंगाना पुलिस ने आपातकालीन सेवाओं में एआई का बढ़ाया उपयोग

तेलंगाना पुलिस ने आपातकालीन सेवाओं को अधिक प्रभावी और तेज़ बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित तकनीकों का व्यापक उपयोग शुरू किया है। राज्य के एकीकृत आपातकालीन प्रतिक्रिया नेटवर्क में 112 और डायल 100 सेवाओं के माध्यम से आने वाली लाखों कॉलों में से वास्तविक आपात स्थितियों की पहचान करना बड़ी चुनौती रहा है। इसी समस्या के समाधान के लिए एआई आधारित फ़िल्टरिंग प्रणाली लागू की गई है, जिससे फर्जी, दोहराव वाली और अनावश्यक कॉलों को अलग कर वास्तविक जरूरतमंदों तक तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।

आपातकालीन कॉल प्रबंधन में एआई की भूमिका

तेलंगाना के आपातकालीन प्रतिक्रिया नेटवर्क में 112 राष्ट्रीय आपातकालीन नंबर तथा डायल 100 पुलिस हेल्पलाइन के रूप में कार्य करते हैं। प्रतिदिन लगभग 16 लाख कॉल प्राप्त होने के बावजूद इनमें वास्तविक आपातकालीन कॉलों का अनुपात केवल लगभग 0.28 प्रतिशत है। एआई आधारित कॉल फ़िल्टरिंग तकनीक इन कॉलों का विश्लेषण कर आवश्यक मामलों को प्राथमिकता देती है, जिससे पुलिस की प्रतिक्रिया क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

साइबर अपराध हेल्पलाइन हुई अधिक प्रभावी

तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो ने 1930 साइबर अपराध हेल्पलाइन पर एआई आधारित वॉयस असिस्टेंट भी तैनात किया है। यह प्रणाली अंग्रेज़ी, तेलुगु और हिंदी भाषाओं में कॉल स्वीकार करती है, बातचीत को अंग्रेज़ी में ट्रांसक्राइब करती है तथा स्वतः संरचित शिकायत रिपोर्ट तैयार करती है। इस तकनीक के कारण कॉल करने वालों का प्रतीक्षा समय लगभग समाप्त हो गया है और साइबर ठगी से जुड़े मामलों में चोरी की गई धनराशि को शीघ्र फ्रीज़ कराने की प्रक्रिया भी तेज़ हुई है। वर्ष 2025 में तेलंगाना में साइबर अपराध शिकायतों में लगभग 3 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर इन शिकायतों में 24 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।

सोशल मीडिया निगरानी और बाल सुरक्षा

तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो ने सोशल मीडिया पर संकट या आत्महत्या संबंधी संकेतों की पहचान के लिए भी एआई आधारित निगरानी प्रणाली विकसित की है। इस पहल के माध्यम से अनेक संवेदनशील मामलों में समय रहते हस्तक्षेप संभव हुआ। इसके अतिरिक्त, 24 जून 2026 को राज्य पुलिस ने ‘सी-साइट’ नामक भारत के पहले स्वदेशी एआई प्लेटफ़ॉर्म को लागू किया, जिसका उपयोग बाल यौन शोषण से जुड़े अपराधियों की पहचान, डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण तथा बच्चों के विरुद्ध अपराधों की जांच में किया जाएगा।

डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और भविष्य की योजनाएँ

तेलंगाना सरकार ‘तेलंगाना डेटा एक्सचेंज (टीजीडीईएक्स)’ को भारत की पहली राज्य-स्तरीय एआई आधारित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के रूप में विकसित कर रही है। इसका विकास भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु द्वारा किया जा रहा है। इस मंच का उपयोग स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और सुशासन जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा। इसके साथ ही राज्य ने आपदा प्रबंधन के लिए ड्रोन तथा डिजिटल संचार प्रणालियों के उपयोग और अमराबाद टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की निगरानी हेतु एआई आधारित सर्विलांस प्रणाली का भी प्रस्ताव रखा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • 112 भारत की राष्ट्रीय आपातकालीन हेल्पलाइन है, जिसे इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम के तहत संचालित किया जाता है।
  • 1930 राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर है, जिसका उपयोग वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर अपराधों की शिकायत दर्ज कराने के लिए किया जाता है।
  • पुलिसिंग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कॉल ट्रायेज, पैटर्न पहचान, डिजिटल साक्ष्य विश्लेषण और अपराध जांच को अधिक प्रभावी बनाने के लिए किया जाता है।
  • तेलंगाना डेटा एक्सचेंज (टीजीडीईएक्स) का उद्देश्य स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और प्रशासन में एआई आधारित नवाचारों को बढ़ावा देना है।

तेलंगाना द्वारा अपनाई गई एआई आधारित पहलें यह दर्शाती हैं कि आधुनिक तकनीक का उपयोग केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिक सुरक्षा, साइबर अपराध नियंत्रण, बाल संरक्षण और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकता है। भविष्य में ऐसी तकनीकों का विस्तार देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रभावी मॉडल साबित हो सकता है।

Originally written on June 25, 2026 and last modified on June 25, 2026.

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