तमिलनाडु ने तैयार की व्यापक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन रणनीति
तमिलनाडु सरकार ने स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य की दिशा में एक व्यापक ऊर्जा परिवर्तन रणनीति तैयार की है। इस योजना का केंद्र सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, विद्युत ग्रिड विस्तार तथा परियोजना स्वीकृति प्रक्रियाओं में सुधार है। राज्य सरकार पुराने नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों के आधुनिकीकरण, नई अनुसंधान सुविधाओं की स्थापना और दीर्घकालिक क्षमता विस्तार के माध्यम से ऊर्जा क्षेत्र को नई दिशा देने की तैयारी कर रही है।
नवीकरणीय ऊर्जा के लिए नई नीति रूपरेखा
तमिलनाडु एक मानकीकृत नवीकरणीय ऊर्जा नीति तैयार कर रहा है, जिसका उद्देश्य परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाना और अनावश्यक मध्यस्थों की भूमिका को समाप्त करना है। राज्य सरकार वर्ष 1995 से किए गए निवेशों की समीक्षा भी कर रही है ताकि पुराने सौर और पवन ऊर्जा संयंत्रों के पुनर्सशक्तीकरण (रिपावरिंग) को बढ़ावा दिया जा सके और नए निवेश आकर्षित किए जा सकें। रिपावरिंग के तहत पुराने उपकरणों को अधिक आधुनिक और दक्ष तकनीकों से बदला जाता है, जिससे ऊर्जा उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है।
क्षमता विस्तार और ऊर्जा लक्ष्यों पर फोकस
राज्य सरकार अगले चार से पांच वर्षों में 10,000 से 15,000 मेगावाट अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ने की योजना बना रही है। इस विस्तार में मुख्य रूप से सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बैटरी भंडारण प्रणालियों को प्राथमिकता दी जाएगी। तमिलनाडु के ऊर्जा विभाग की 2025-26 नीति के अनुसार वर्ष 2030 तक कुल ऊर्जा खपत का 50 प्रतिशत हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही 2030 तक कार्बन उत्सर्जन में 70 प्रतिशत तक कमी लाने का भी उद्देश्य निर्धारित किया गया है।
बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने की तैयारी
राज्य सरकार एक एकीकृत नवीकरणीय ऊर्जा नीति पर भी कार्य कर रही है, जिसका उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना, ऊर्जा भंडारण को बढ़ावा देना और विद्युत आपूर्ति को अधिक विश्वसनीय बनाना है। अनुमान है कि तमिलनाडु की अधिकतम बिजली मांग वर्तमान लगभग 20.7 गीगावाट से बढ़कर वर्ष 2034-35 तक 35.5 गीगावाट तक पहुंच सकती है। इस बढ़ती मांग को देखते हुए ऊर्जा अवसंरचना के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और ऊर्जा भंडारण परियोजनाएं
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-II के अंतर्गत 624 सर्किट किलोमीटर नई ट्रांसमिशन लाइनें तथा ओट्टापिडारम और समुगरेंगापुरम में दो नए सबस्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इस परियोजना से 2025-26 तक अतिरिक्त 2.8 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड से जोड़ने में सहायता मिलेगी। ऊर्जा पर्याप्तता योजना के अनुसार 2034-35 तक लगभग 98 गीगावाट अनुबंधित क्षमता की आवश्यकता होगी, जिसमें लगभग 18 गीगावाट सौर ऊर्जा, 12 गीगावाट पवन ऊर्जा और 11.7 गीगावाट ऊर्जा भंडारण क्षमता शामिल होगी।
अनुसंधान, नवाचार और पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं
तमिलनाडु उभरती प्रौद्योगिकियों और उद्योग सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक अनुसंधान एवं विकास इकाई तथा उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की योजना बना रहा है। इसके अतिरिक्त विभिन्न विभागों और हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय के लिए विशेष परियोजनाएं भी शुरू की गई हैं। राज्य ने चेन्नई में रूफटॉप सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी को 2027 तक 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। वहीं कुंदाह में 500 मेगावाट की पंप्ड स्टोरेज परियोजना, वेल्लिमलाई की 1.1 गीगावाट परियोजना और अलीयार की 2.4 गीगावाट परियोजना भी ऊर्जा भंडारण क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- तमिलनाडु भारत के अग्रणी पवन ऊर्जा उत्पादक राज्यों में से एक है।
- बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली सौर और पवन ऊर्जा के उतार-चढ़ाव को संतुलित करने में मदद करती है।
- रिपावरिंग का अर्थ पुराने नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों को अधिक आधुनिक और कुशल उपकरणों से बदलना है।
- ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर परियोजनाएं नवीकरणीय ऊर्जा को उत्पादन केंद्रों से उपभोक्ता क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए विकसित की जाती हैं।
तमिलनाडु की यह व्यापक स्वच्छ ऊर्जा रणनीति राज्य को हरित ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में वृद्धि, ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं का विस्तार और आधुनिक विद्युत अवसंरचना के विकास से राज्य न केवल अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा कर सकेगा, बल्कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के राष्ट्रीय प्रयासों में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।