डीईआरसी नियुक्ति विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का उपराज्यपाल कार्यालय को नोटिस

डीईआरसी नियुक्ति विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का उपराज्यपाल कार्यालय को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2026 को दिल्ली बिजली नियामक आयोग यानी डीईआरसी में नियुक्तियों से जुड़े विवाद पर उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना के कार्यालय को नोटिस जारी किया। यह मामला डीईआरसी के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति को लेकर दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच जारी मतभेद से संबंधित है। यह विवाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में प्रशासनिक अधिकारों और संवैधानिक शक्तियों की व्याख्या से भी जुड़ा हुआ है।

डीईआरसी क्या है

दिल्ली बिजली नियामक आयोग एक वैधानिक नियामक संस्था है जो दिल्ली में बिजली क्षेत्र के नियमन का कार्य करती है। इसका गठन विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत किया गया था। आयोग बिजली दरों का निर्धारण, वितरण कंपनियों की निगरानी और उपभोक्ता हितों की सुरक्षा जैसे कार्य करता है। भारत में प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के लिए विद्युत नियामक आयोग की व्यवस्था इसी कानून के अंतर्गत की गई है।

नियुक्ति विवाद और संवैधानिक प्रश्न

दिल्ली सरकार का आरोप है कि उपराज्यपाल ने डीईआरसी अध्यक्ष की नियुक्ति में अनावश्यक देरी की। सरकार के अनुसार उपराज्यपाल कार्यालय ने यह जानने के लिए कानूनी राय मांगी कि क्या नियुक्ति के लिए दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की सहमति आवश्यक है। मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा की पीठ ने उपराज्यपाल कार्यालय के प्रधान सचिव के माध्यम से नोटिस जारी किया।

सुप्रीम कोर्ट की पूर्व कार्यवाही

जुलाई 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने डीईआरसी में अध्यक्ष पद पर लंबे समय तक गतिरोध रहने पर आयोग को “हेडलैस” यानी नेतृत्वहीन बताया था। इसके बाद अगस्त 2023 में अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति जयंत नाथ को डीईआरसी का एडहॉक अध्यक्ष नियुक्त किया था। यह नियुक्ति तब की गई थी जब दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल किसी नाम पर सहमत नहीं हो पाए थे।

दिल्ली संशोधन अधिनियम, 2023 पर विवाद

दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली संशोधन अधिनियम, 2023 को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इस कानून के तहत नियुक्तियों से जुड़े कुछ मामलों में उपराज्यपाल को अधिक अधिकार दिए गए हैं। नवंबर 2023 में यह मामला सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ के समक्ष लंबित था। संविधान पीठ उन मामलों की सुनवाई करती है जिनमें महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न शामिल होते हैं।

चयन समिति और अन्य नियुक्तियां

नवंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने डीईआरसी के दो सदस्यों की नियुक्ति से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को चयन समिति गठन पर उपराज्यपाल कार्यालय से निर्देश लेने को कहा था। 18 मई 2026 को अदालत ने डीईआरसी में अन्य सदस्यों की नियुक्ति में देरी को लेकर दिल्ली सरकार को भी नोटिस जारी किया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • डीईआरसी का गठन विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत हुआ था।
  • दिल्ली के उपराज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 239 के तहत की जाती है।
  • अनुच्छेद 239AA राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली से संबंधित विशेष प्रावधान देता है।
  • संविधान पीठ में सुप्रीम कोर्ट के पांच या उससे अधिक न्यायाधीश शामिल होते हैं।

डीईआरसी नियुक्ति विवाद दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच अधिकारों के टकराव का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रशासनिक शक्तियों की सीमाओं को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Originally written on May 18, 2026 and last modified on May 18, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *