डीआरडीओ ने लंबी दूरी की स्वदेशी क्रूज मिसाइल LRLACM का सफल परीक्षण किया

डीआरडीओ ने लंबी दूरी की स्वदेशी क्रूज मिसाइल LRLACM का सफल परीक्षण किया

भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 15 जून 2026 को ओडिशा तट के निकट स्थित डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप से स्वदेशी रूप से विकसित लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LRLACM) का सफल उड़ान परीक्षण किया। यह मिसाइल भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना के लिए विकसित की गई एक अत्याधुनिक लंबी दूरी की सटीक प्रहार क्षमता वाली प्रणाली है। इस सफल परीक्षण को भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और लंबी दूरी की सामरिक क्षमता के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

क्या है LRLACM?

लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल एक ऐसी निर्देशित मिसाइल है जो अपने पूरे उड़ान मार्ग में शक्ति-संचालित (Powered Flight) रहती है और पूर्व निर्धारित मार्ग का अनुसरण करते हुए लक्ष्य तक पहुंचती है। यह विशेष रूप से भूमि पर स्थित रणनीतिक लक्ष्यों पर सटीक हमला करने के लिए विकसित की गई है। इसे व्यापक रूप से टॉमहॉक श्रेणी की लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों के समान वर्ग में रखा जाता है, जो दुनिया की प्रमुख भूमि-आक्रमण मिसाइल प्रणालियों में गिनी जाती हैं।

परीक्षण की प्रमुख विशेषताएं

15 जून 2026 को किए गए उड़ान परीक्षण के दौरान मिसाइल के कई महत्वपूर्ण तंत्रों का सफल सत्यापन किया गया। इनमें शामिल हैं—

  • प्रणोदन प्रणाली (Propulsion System)
  • मार्गदर्शन प्रणाली (Guidance System)
  • नेविगेशन प्रणाली (Navigation System)
  • नियंत्रण प्रणाली (Control System)
  • वारहेड डिलीवरी क्षमता

डीआरडीओ के अनुसार परीक्षण के दौरान निर्धारित सभी मिशन उद्देश्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिया गया।

लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता

एलआरएलएसीएम की अनुमानित मारक क्षमता लगभग 1,000 से 1,500 किलोमीटर बताई गई है। इस लंबी दूरी के कारण यह मिसाइल शत्रु क्षेत्र में स्थित महत्वपूर्ण सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम है। कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता इसे दुश्मन के रडार से बचने में भी सहायता प्रदान करती है।

पूरी तरह स्वदेशी विकास

इस मिसाइल का विकास पूरी तरह भारत में किया गया है। इसके विभिन्न उपतंत्रों का निर्माण डीआरडीओ की अनेक प्रयोगशालाओं द्वारा किया गया है। बेंगलुरु स्थित एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ADE) इस परियोजना की प्रमुख प्रयोगशाला रही है। इसके अलावा भारतीय उद्योग जगत के विभिन्न साझेदारों ने भी इसके विकास और निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

निर्भय परियोजना से मिली तकनीकी आधारशिला

एलआरएलएसीएम के विकास में उन तकनीकों का उपयोग किया गया है जिन्हें पहले निर्भय क्रूज मिसाइल कार्यक्रम के अंतर्गत विकसित और परिपक्व किया गया था। निर्भय परियोजना ने भारत को लंबी दूरी की स्वदेशी क्रूज मिसाइल तकनीक विकसित करने का आधार प्रदान किया, जिसके परिणामस्वरूप अब अधिक उन्नत और प्रभावी प्रणाली के रूप में एलआरएलएसीएम सामने आई है।

तीनों सेनाओं के लिए उपयोगी

यह मिसाइल भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना तीनों के लिए विकसित की गई है। इससे भारत की संयुक्त सैन्य क्षमता (Joint Capability) में वृद्धि होगी और विभिन्न युद्ध परिस्थितियों में लंबी दूरी से सटीक प्रहार करने की क्षमता मजबूत होगी।

आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल

एलआरएलएसीएम का सफल परीक्षण रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। स्वदेशी तकनीक और घरेलू उद्योगों की भागीदारी से विकसित यह प्रणाली भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता और रक्षा उत्पादन क्षमता को नई मजबूती प्रदान करती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • डीआरडीओ ने LRLACM का सफल परीक्षण 15 जून 2026 को किया।
  • परीक्षण ओडिशा तट के निकट डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया।
  • एलआरएलएसीएम एक लंबी दूरी की भूमि-आक्रमण क्रूज मिसाइल है।
  • इसकी अनुमानित मारक क्षमता 1,000 से 1,500 किलोमीटर है।
  • एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ADE), बेंगलुरु इस परियोजना की प्रमुख प्रयोगशाला है।
  • मिसाइल के विकास में निर्भय कार्यक्रम की तकनीकों का उपयोग किया गया है।
  • क्रूज मिसाइलें कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए निर्धारित मार्ग का अनुसरण कर सकती हैं।
  • डीआरडीओ भारत के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत प्रमुख रक्षा अनुसंधान संगठन है।

एलआरएलएसीएम का सफल परीक्षण भारत की रक्षा तकनीक और सामरिक क्षमता में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। लंबी दूरी, उच्च सटीकता और पूर्ण स्वदेशी विकास वाली यह मिसाइल भारतीय सशस्त्र बलों की मारक क्षमता को नई ऊंचाई प्रदान करेगी तथा आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को और अधिक मजबूत बनाएगी।

Originally written on June 15, 2026 and last modified on June 15, 2026.

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