भारतीय सेना ने NEGEV मशीन गनों के लिए चुना स्वदेशी निर्मित MEPRO X6 दृष्टि प्रणाली
भारतीय सेना ने 15 जून 2026 को सेवा में मौजूद NEGEV मशीन गनों के लिए MEPRO X6 टेलीस्कोपिक साइट को आधिकारिक डे-ऑप्टिक (Daytime Optic) के रूप में चुना है। इस परियोजना के तहत इस अत्याधुनिक दृष्टि प्रणाली का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इसका उत्पादन मेप्रोलाइट (Meprolight) और आरआरपी डिफेंस के बीच हुए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Transfer of Technology) समझौते के अंतर्गत होगा, जबकि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) इस कार्यक्रम का प्रमुख ठेकेदार होगा। यह कदम रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और आधुनिक सैन्य उपकरणों के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या है MEPRO X6 टेलीस्कोपिक साइट?
MEPRO X6 एक उन्नत और कॉम्पैक्ट 6x आवर्धन क्षमता वाली टेलीस्कोपिक डे साइट है। यह सैनिकों को लंबी दूरी पर लक्ष्य की पहचान और सटीक निशाना लगाने में सहायता प्रदान करती है। कंपनी के अनुसार इसकी प्रभावी मारक दूरी लगभग 1,000 मीटर तक है। टेलीस्कोपिक साइटें पारंपरिक आयरन साइट्स की तुलना में अधिक स्पष्ट दृश्य और बेहतर लक्ष्य अधिग्रहण क्षमता प्रदान करती हैं, जिससे युद्धक्षेत्र में सटीकता बढ़ती है।
NEGEV मशीन गन परिवार
NEGEV हल्की मशीन गन (Light Machine Gun) श्रृंखला का विकास इजराइल वेपन्स इंडस्ट्रीज (IWI) द्वारा किया गया है। इसका आधुनिक संस्करण NEGEV 7 7.62×51 मिमी गोला-बारूद का उपयोग करता है। यह मशीन गन भारतीय सेना की अग्नि शक्ति को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण हथियार प्रणालियों में से एक मानी जाती है। वर्तमान में इसका निर्माण भारत में मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत कार्यक्रमों के तहत किया जा रहा है।
स्वदेशी निर्माण को मिलेगा बढ़ावा
MEPRO X6 के निर्माण के लिए मेप्रोलाइट और आरआरपी डिफेंस के बीच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौता किया गया है। इस समझौते के अंतर्गत आरआरपी डिफेंस भारत में इन दृष्टि प्रणालियों का निर्माण करेगी और उन्हें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को आपूर्ति करेगी। इस व्यवस्था से उन्नत रक्षा उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी निर्भरता में कमी आएगी।
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की भूमिका
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) इस परियोजना का प्रमुख ठेकेदार (Prime Contractor) है। BEL भारतीय रक्षा क्षेत्र की अग्रणी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है, जो रडार, संचार प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और विभिन्न रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों का निर्माण करती है। इस परियोजना में BEL उत्पादन, आपूर्ति और समन्वय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाएगी।
NEGEV मशीन गनों की आपूर्ति
अप्रैल 2026 में पीएलआर सिस्टम्स, जो इजराइल वेपन्स इंडस्ट्रीज और अडानी समूह का संयुक्त उद्यम है, ने भारतीय सेना को 2,000 NEGEV 7.62×51 मशीन गनों की पहली खेप सौंपी थी। यह आपूर्ति 41,000 मशीन गनों के बड़े अनुबंध का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सेना की आधुनिक युद्धक क्षमता को बढ़ाना है।
प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का महत्व
रक्षा क्षेत्र में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते (ToT) विदेशी तकनीक को घरेलू उद्योग तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इनके माध्यम से देश के भीतर उत्पादन क्षमता विकसित होती है, रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और रक्षा उपकरणों की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित होती है। MEPRO X6 परियोजना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
भारत में मेप्रोलाइट की उपस्थिति
मेप्रोलाइट ने जुलाई 2024 में भारत में एक नई असेंबली लाइन स्थापित की थी। यह सुविधा आरआरपी एस4ई इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड के साथ सहयोग और तकनीकी हस्तांतरण समझौते के तहत स्थापित की गई थी। इससे पहले भारत में MEPRO MOR, M5 और M21 जैसे इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल दृष्टि उपकरणों की असेंबली भी की जा रही थी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय सेना ने 15 जून 2026 को MEPRO X6 को NEGEV मशीन गनों के लिए आधिकारिक डे साइट के रूप में चुना।
- MEPRO X6 एक 6x आवर्धन क्षमता वाली टेलीस्कोपिक दृष्टि प्रणाली है।
- इसकी प्रभावी दूरी लगभग 1,000 मीटर तक बताई जाती है।
- NEGEV मशीन गन का विकास इजराइल वेपन्स इंडस्ट्रीज (IWI) ने किया है।
- NEGEV 7 संस्करण 7.62×51 मिमी गोला-बारूद का उपयोग करता है।
- भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) इस परियोजना का प्रमुख ठेकेदार है।
- अप्रैल 2026 में भारतीय सेना को 2,000 NEGEV मशीन गनों की पहली खेप सौंपी गई थी।
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (ToT) समझौते रक्षा उपकरणों के स्थानीय उत्पादन को सक्षम बनाते हैं।
MEPRO X6 टेलीस्कोपिक साइट का चयन भारतीय सेना की आधुनिक युद्ध क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। स्वदेशी निर्माण, उन्नत लक्ष्य अधिग्रहण तकनीक और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान को भी नई गति प्रदान करेगी।