डीआरडीओ की प्रज्ञा और ADC-150 से भारत की सुरक्षा और नौसैनिक क्षमता मजबूत
भारत ने आंतरिक सुरक्षा और नौसैनिक लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने की दिशा में दो महत्वपूर्ण स्वदेशी रक्षा उपलब्धियां हासिल की हैं। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित एआई-आधारित सैटेलाइट इमेजिंग सिस्टम “प्रज्ञा” गृह मंत्रालय को सौंपा गया है, जबकि भारतीय नौसेना ने एयर ड्रॉपेबल कंटेनर ADC-150 के सफल परीक्षण पूरे किए हैं। ये दोनों प्रणालियां निगरानी, आपातकालीन प्रतिक्रिया और सैन्य संचालन की दक्षता को बेहतर बनाने के लिए तैयार की गई हैं।
इन प्रणालियों का महत्व ऐसे समय में और बढ़ जाता है जब भारत को सीमाई सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी अभियानों और समुद्री रणनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। स्वदेशी तकनीक आधारित ये उपकरण राष्ट्रीय सुरक्षा को अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम माने जा रहे हैं।
प्रज्ञा से रियल-टाइम सुरक्षा संचालन को मजबूती
गृह मंत्रालय को सौंपा गया “प्रज्ञा” एक एआई-सक्षम सैटेलाइट इमेजिंग सिस्टम है, जिसे डीआरडीओ के सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स (CAIR) ने विकसित किया है। इसे डीआरडीओ अध्यक्ष और रक्षा अनुसंधान एवं विकास सचिव समीर वी. कामत ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को सौंपा।
यह प्रणाली संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी, आंतरिक सुरक्षा अभियानों और आतंकवाद-रोधी प्रयासों में सहायता करेगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से यह रियल-टाइम डेटा विश्लेषण कर त्वरित निर्णय लेने में मदद करती है। इससे सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया क्षमता और सटीकता दोनों में सुधार होगा।
ADC-150 से नौसेना की आपातकालीन आपूर्ति क्षमता बढ़ी
डीआरडीओ और भारतीय नौसेना ने एयर ड्रॉपेबल कंटेनर ADC-150 के चार सफल इन-फ्लाइट रिलीज परीक्षण पूरे किए। ये परीक्षण 21 फरवरी से 1 मार्च 2026 के बीच गोवा तट के पास P8I विमान से अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में किए गए।
ADC-150 एक स्वदेशी प्रणाली है, जिसे 150 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका उपयोग समुद्र में तट से दूर तैनात नौसैनिक जहाजों तक आवश्यक सामग्री, चिकित्सा सहायता और अन्य आपातकालीन उपकरण तेजी से पहुंचाने के लिए किया जाएगा। इससे युद्धकाल और आपदा दोनों स्थितियों में नौसेना की प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ेगी।
कई DRDO प्रयोगशालाओं का संयुक्त योगदान
ADC-150 के विकास में डीआरडीओ की कई प्रयोगशालाओं ने मिलकर काम किया। विशाखापत्तनम स्थित नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लेबोरेटरी (NSTL) ने मुख्य विकास केंद्र की भूमिका निभाई। पैराशूट प्रणाली का विकास आगरा स्थित एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ADRDE) ने किया।
बेंगलुरु स्थित सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थिनेस एंड सर्टिफिकेशन (CEMILAC) ने उड़ान प्रमाणन प्रदान किया, जबकि हैदराबाद की डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL) ने परीक्षणों के दौरान तकनीकी सहायता दी। जल्द ही इस प्रणाली को भारतीय नौसेना में शामिल किए जाने की संभावना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- प्रज्ञा एक एआई-आधारित सैटेलाइट इमेजिंग सिस्टम है, जिसे डीआरडीओ ने आंतरिक सुरक्षा सहायता के लिए विकसित किया है।
- CAIR का पूरा नाम Centre for Artificial Intelligence and Robotics है।
- ADC-150 एक स्वदेशी एयर ड्रॉपेबल कंटेनर है, जो 150 किलोग्राम तक का पेलोड ले जा सकता है।
- P8I भारतीय नौसेना का लंबी दूरी का समुद्री गश्ती और निगरानी विमान है।
ये दोनों रक्षा उपलब्धियां ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को मजबूत करती हैं। प्रज्ञा और ADC-150 जैसी स्वदेशी प्रणालियां विदेशी रक्षा उपकरणों पर निर्भरता कम करती हैं और सामरिक स्वायत्तता को बढ़ाती हैं। आज के जटिल सुरक्षा वातावरण में रियल-टाइम निगरानी और तेज लॉजिस्टिक सहायता बेहद आवश्यक हो चुकी है। डीआरडीओ की ये नवाचार भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य तैयारी को नई मजबूती प्रदान करेंगे।