डिजिटल सेंसरशिप या सुरक्षा – टेलीग्राम से इंस्टाग्राम तक सारी सोशल मीडिया कंपनियों को क्यों घेर रही है सरकार?

डिजिटल सेंसरशिप या सुरक्षा – टेलीग्राम से इंस्टाग्राम तक सारी सोशल मीडिया कंपनियों को क्यों घेर रही है सरकार?

इंटरनेट की दुनिया में इस समय एक खामोश जंग चल रही है। एक तरफ दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया और मैसेजिंग कंपनियां हैं, जिनके पास करोड़ों यूजर्स का डेटा और प्रभाव है, तो दूसरी तरफ भारत सरकार है। पिछले कुछ समय में टेलीग्राम (Telegram) से लेकर इंस्टाग्राम (Instagram) और यूट्यूब जैसी दिग्गज कंपनियों को सरकार की तरफ से लगातार नोटिस भेजे जा रहे हैं। मामला सिर्फ एक साधारण चेतावनी का नहीं है, बल्कि नए नियमों के तहत इन कंपनियों की पूरी आजादी को बदलने की तैयारी है। आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ इतनी सख्त रुख अपना लिया है? टेलीग्राम पर कुछ समय के लिए अस्थाई पाबंदियां क्यों लगानी पड़ीं और सरकार के नए ‘आईटी नियम 2026’ (IT Rules 2026) इन कंपनियों से क्या चाहते हैं?

टेलीग्राम बनाम सरकार: परीक्षा में धांधली से लेकर फिल्मों की पाइरेसी तक

जुलाई 2026 की शुरुआत में भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) ने टेलीग्राम को एक बेहद कड़ा नोटिस जारी किया। इस नोटिस में टेलीग्राम को साफ तौर पर 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया गया है कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर धड़ल्ले से चल रही फिल्मों और ओटीटी (OTT) कंटेंट की पाइरेसी को तुरंत रोके। अगर टेलीग्राम ऐसा करने में नाकाम रहता है, तो उसके खिलाफ गंभीर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि इस कदम का मकसद भारत की क्रिएटर इकोनॉमी, फिल्म इंडस्ट्री और डिस्ट्रीब्यूटर्स के बिजनेस को बचाना है। लेकिन टेलीग्राम के साथ सरकार का विवाद सिर्फ पाइरेसी तक सीमित नहीं है। इससे ठीक कुछ दिन पहले, जून 2026 में नीट-यूजी (NEET-UG) की दोबारा होने वाली परीक्षा के दौरान सरकार ने टेलीग्राम पर देशव्यापी अस्थाई पाबंदियां लगा दी थीं। इसके साथ ही सरकार ने टेलीग्राम को आदेश दिया था कि वह भारत में अपने ‘मैसेज एडिटिंग फीचर’ को ब्लॉक करे। इसके पीछे की वजह बेहद चौंकाने वाली थी। जांच एजेंसियों को पता चला कि पेपर लीक करने वाले गिरोह टेलीग्राम के इस फीचर का गलत इस्तेमाल कर रहे थे। वे पुराने पोस्ट में एडिटिंग करके नए पेपर डाल देते थे और उसे पहले से लीक हुआ पेपर बताकर छात्रों से करोड़ों रुपये वसूल रहे थे। टेलीग्राम का यह रवैया कि वह यूजर्स की प्राइवेसी के नाम पर डेटा शेयर नहीं करता और ग्रुप्स की निगरानी नहीं करता, अब उसके लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुका है। टेलीग्राम बनाम सरकार: परीक्षा में धांधली से लेकर फिल्मों की पाइरेसी तक

आईटी नियम 2026: जिसने बदल दिए सोशल मीडिया के कायदे

भारत सरकार ने डिजिटल दुनिया को सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियमों में बड़ा संशोधन किया है, जिसे ‘आईटी संशोधन नियम 2026’ कहा जा रहा है। 20 फरवरी 2026 से लागू हुए इन नए नियमों ने सोशल मीडिया कंपनियों के ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour) यानी कानूनी सुरक्षा कवच को खतरे में डाल दिया है। पहले नियम यह था कि अगर किसी यूजर ने फेसबुक, इंस्टाग्राम या टेलीग्राम पर कोई गलत या गैरकानूनी चीज पोस्ट की है, तो उसके लिए कंपनी जिम्मेदार नहीं होती थी। कंपनी को अदालत या सरकार के कहने पर उसे हटाना होता था। लेकिन अब नियम पूरी तरह बदल चुके हैं। नए नियमों के तहत इन प्लेटफॉर्म्स को ‘पैसिव होस्ट’ (सिर्फ प्लेटफॉर्म देने वाला) से बदलकर ‘एक्टिव मॉडरेटर’ (सामग्री की जांच करने वाला) बनने पर मजबूर कर दिया गया है। नियमों के मुताबिक, यदि कोई कंपनी सरकार के आदेशों और तय समय-सीमा का पालन नहीं करती है, तो उससे ‘सेफ हार्बर’ का अधिकार छीन लिया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि यूजर की किसी भी गलत पोस्ट के लिए सीधे उस सोशल मीडिया कंपनी पर मुकदमा चलाया जा सकेगा और भारी जुर्माना या जेल की सजा भी हो सकती है। आईटी नियम 2026: जिसने बदल दिए सोशल मीडिया के कायदे

टेक कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती: 2 घंटे का टाइमर और डीपफेक पर लगाम

नए नियमों में सरकार ने कंपनियों को संभलने का बिल्कुल समय नहीं दिया है। समय-सीमा को इतना कड़ा कर दिया गया है कि कंपनियों को अब 24 घंटे सातों दिन एक्टिव रहना पड़ रहा है।

टेकडाउन की नई समय-सीमा
  • हाई-रिस्क और डीपफेक कंटेंट: बिना सहमति के पोस्ट की गई अश्लील तस्वीरें (NCII) और एआई (AI) द्वारा बनाए गए भ्रामक डीपफेक वीडियो की शिकायत मिलने पर कंपनियों को इसे सिर्फ 2 घंटे के भीतर हटाना होगा।
  • सामान्य गैरकानूनी कंटेंट: किसी भी अदालत या सरकारी नोटिस के मिलने के बाद कंपनियों के पास आपत्तिजनक सामग्री हटाने के लिए अधिकतम 3 घंटे का समय होता है।
  • शिकायत निवारण: पहले यूजर्स की शिकायतों को सुलझाने के लिए 15 दिन मिलते थे, जिसे घटाकर अब सिर्फ 7 दिन कर दिया गया है। कुछ गंभीर मामलों में इसे 36 घंटे के भीतर सुलझाना अनिवार्य है।

इसके अलावा, सरकार ने पहली बार एआई द्वारा तैयार की गई सामग्री को ‘सिंथेटिकली जनरेटेड इन्फॉर्मेशन’ (SGI) का कानूनी नाम दिया है। इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स (जिन्हें सिग्निफिकेंट सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज कहा जाता है और जिनके 50 लाख से ज्यादा यूजर्स हैं) के लिए अब यह जरूरी है कि वे यूजर से अपलोडिंग के समय ही डिक्लेरेशन लें कि क्या यह कंटेंट एआई से बना है। इसके साथ ही कंपनियों को ऐसे वीडियो और ऑडियो पर एक स्थायी वॉटरमार्क और मेटाडेटा लगाना होगा, जिससे यह पता चल सके कि इसे किस कंप्यूटर या सॉफ्टवेयर से बनाया गया है।

सरकार आखिर क्या चाहती है?

इस पूरी सख्ती के पीछे सरकार का एक बहुत बड़ा एजेंडा है, जिसे वह ‘ओपन, सेफ, ट्रस्टेड और अकाउंटेबल इंटरनेट’ कहती है। सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया कंपनियां भारत से अरबों रुपये का बिजनेस कमाती हैं, लेकिन जब देश की सुरक्षा, परीक्षाओं की शुचिता या नागरिकों की प्राइवेसी की बात आती है, तो ये कंपनियां अमेरिकी या यूरोपीय कानूनों की दुहाई देकर बच निकलने की कोशिश करती हैं। सरकार इन नोटिसों और कड़े नियमों के जरिए इन कंपनियों को पूरी तरह भारत के कानूनों के प्रति जवाबदेह बनाना चाहती है। सरकार चाहती है कि ये कंपनियां अपनी टेक टीम और नोडल अधिकारियों को इस तरह तैनात करें कि वे भारतीय कानून व्यवस्था और जांच एजेंसियों के साथ रियल-टाइम में सहयोग कर सकें। साफ है कि अब सोशल मीडिया कंपनियों के लिए भारत में सिर्फ एक ‘मंच’ बनकर रहना मुमकिन नहीं होगा। उन्हें भारतीय समाज और कानून के दायरे में रहकर ही अपना बिजनेस चलाना होगा, वरना सरकार की तरफ से आने वाले ये नोटिस उनके ऐप के बंद होने का रास्ता भी साफ कर सकते हैं।

सोशल मीडिया और नए नियमों से जुड़े कुछ दिलचस्प आंकड़े

  • 50 लाख से अधिक यूजर्स: भारत में इस आंकड़े को पार करने वाले प्लेटफॉर्म्स को ‘सिग्निफिकेंट सोशल मीडिया इंटरमीडियरी’ (SSMI) माना जाता है, जिन पर सबसे सख्त नियम लागू होते हैं।
  • हर 3 महीने में याद दिलाना: नए नियमों के अनुसार, अब कंपनियों को हर तीन महीने में अपने यूजर्स को यह नोटिफिकेशन भेजना होगा कि गलत जानकारी या डीपफेक फैलाने पर उनका अकाउंट हमेशा के लिए डिलीट किया जा सकता है।
  • स्मार्टफोन फिल्टर को छूट: नियम इतने भी सख्त नहीं हैं कि आपकी खूबसूरत तस्वीरों पर रोक लगा दें। स्मार्टफोन कैमरों द्वारा किए जाने वाले ऑटोमैटिक टच-अप, ब्राइटनेस सुधार या फिल्टर को इस एआई पाबंदी (SGI) के दायरे से बाहर रखा गया है।
Originally written on July 6, 2026 and last modified on July 6, 2026.

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