डब्ल्यूटीओ समीक्षा में भारत की व्यापार नीति पर वैश्विक नजर

डब्ल्यूटीओ समीक्षा में भारत की व्यापार नीति पर वैश्विक नजर

जिनेवा में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की आठवीं व्यापार नीति समीक्षा पूरी हो गई है। 21 और 23 जुलाई 2026 को हुई बैठकों में भारत की 1 जनवरी 2021 से 31 दिसंबर 2025 तक की व्यापार नीतियों, सुधारों और चुनौतियों पर सदस्य देशों ने विस्तृत चर्चा की। इस समीक्षा के जरिए भारत की बाह्य व्यापार व्यवस्था, नीति दिशा और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में उसकी भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकलन किया गया।

डब्ल्यूटीओ की व्यापार नीति समीक्षा क्यों अहम है

व्यापार नीति समीक्षा तंत्र डब्ल्यूटीओ के तीन प्रमुख कार्यों में से एक है। इसके तहत सदस्य देशों की व्यापार और उससे जुड़ी नीतियों की नियमित समीक्षा की जाती है। यह प्रक्रिया पारदर्शिता बढ़ाने, नीतिगत समझ विकसित करने और वैश्विक व्यापार व्यवस्था में भरोसा बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। डब्ल्यूटीओ की स्थापना 1 जनवरी 1995 को हुई थी और भारत इसके संस्थापक सदस्यों में शामिल है।

भारत पर किन मुद्दों पर चर्चा हुई

समीक्षा के दौरान भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सीमा शुल्क आधुनिकीकरण, व्यापार सुगमता और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से जोड़ने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने किया। भारत को 44 डब्ल्यूटीओ सदस्यों से 1,094 लिखित प्रश्न मिले, जबकि 68 सदस्य देशों ने दोनों सत्रों में अपनी राय रखी।कुछ सदस्य देशों ने उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना, शुल्क संरचना, गुणवत्ता नियंत्रण आदेश, आयात प्रतिस्थापन नीतियों और व्यापार उपचार उपायों के बार-बार उपयोग पर चिंता भी जताई। साथ ही, डब्ल्यूटीओ सदस्यों ने भारत द्वारा मत्स्य सब्सिडी समझौते को स्वीकार किए जाने का उल्लेख किया, जिसे जून 2022 में 12वें डब्ल्यूटीओ मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में अपनाया गया था।

निर्यात, संरचनात्मक चुनौतियां और आगे की दिशा

डब्ल्यूटीओ सचिवालय की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल वस्तु एवं सेवा निर्यात 863.1 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। यह वित्त वर्ष 2021-22 की तुलना में 6.3% अधिक है। हालांकि रिपोर्ट में उच्च व्यापार लागत, नियामकीय जटिलता, बुनियादी ढांचे की कमी और वैश्विक एकीकरण को गहरा करने में बाधाओं जैसी संरचनात्मक चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया।यह समीक्षा ऐसे समय में हुई है जब भारत 2047 के विकसित भारत लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में व्यापार नीति, निर्यात क्षमता और वैश्विक बाजारों से जुड़ाव भारत की आर्थिक रणनीति के केंद्रीय तत्व बने हुए हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • विश्व व्यापार संगठन (WTO) का मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में स्थित है।
  • ट्रेड पॉलिसी रिव्यू मैकेनिज्म की व्यवस्था 1995 के माराकेश समझौते के तहत की गई थी।
  • डब्ल्यूटीओ का मत्स्य सब्सिडी समझौता 2022 में अपनाया गया था और यह हानिकारक मछली पकड़ने वाली सब्सिडियों से जुड़ा है।
  • भारत में एमएसएमई की परिभाषा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 के तहत तय की गई है।

डब्ल्यूटीओ समीक्षा ने एक बार फिर दिखाया कि भारत की व्यापार नीति अब केवल घरेलू सुधारों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक नियमों, प्रतिस्पर्धा और बाजार पहुंच के व्यापक संदर्भ में देखी जा रही है।

Originally written on July 24, 2026 and last modified on July 24, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *