टेरिटोरियल आर्मी का नया साइबर हैकाथॉन, डिजिटल रक्षा को मिलेगा मंच
भारतीय टेरिटोरियल आर्मी ने 21 अगस्त 2026 को साइबरपीस के साथ मिलकर टेरियर साइबर क्वेस्ट 2026 (TCQ 3.0) की शुरुआत की। यह राष्ट्रीय हैकाथॉन देश की डिजिटल सुरक्षा, रक्षा तकनीक और स्वदेशी साइबर समाधानों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। प्रतियोगिता में छात्रों, स्टार्टअप्स, सुरक्षा शोधकर्ताओं और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के लिए अलग-अलग ट्रैक रखे गए हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर साइबर नवाचार की पहल
टेरियर साइबर क्वेस्ट, टेरिटोरियल आर्मी की साइबर हैकाथॉन श्रृंखला का तीसरा संस्करण है। 2026 संस्करण के लिए पंजीकरण 30 जुलाई 2026 से शुरू हुए थे और अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 अगस्त 2026 कर दी गई। इसे एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता के रूप में आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य साइबर रक्षा से जुड़े व्यावहारिक और तकनीकी समाधान खोजना है।
इस पहल का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि आज साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, सूचना विश्वसनीयता और डिजिटल अवसंरचना की मजबूती से सीधे जुड़ चुकी है।
तीन ट्रैक, तीन अलग-अलग चुनौतियाँ
TCQ 3.0 में तीन प्रमुख प्रतियोगिता ट्रैक रखे गए हैं। Bug Hunting ट्रैक में ऑनलाइन कैप्चर-द-फ्लैग क्वालिफायर और 36 घंटे का लाइव सैंडबॉक्स फाइनल होगा। इस चरण में प्रतिभागियों को सिमुलेटेड क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर में कमजोरियों की पहचान कर उन्हें दस्तावेज़ित करना होगा।
AI Kavach ट्रैक में मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधान मांगे गए हैं, जिनका उपयोग स्वचालित साइबर रक्षा, संभावित खतरों की पूर्व चेतावनी और असामान्य गतिविधियों की पहचान में किया जा सके। वहीं National Creators Challenge में डिजिटल क्रिएटर्स को डीपफेक, फिशिंग और गलत सूचना के खिलाफ जागरूकता अभियान तैयार करने होंगे।
चयन प्रक्रिया और फाइनल की समय-सीमा
सभी पंजीकरणों की ऑनलाइन स्क्रीनिंग और शॉर्टलिस्टिंग 1 सितंबर से 10 सितंबर 2026 के बीच होगी। इसके बाद चयनित प्रतिभागी नई दिल्ली में 6 अक्टूबर से 8 अक्टूबर 2026 तक होने वाले ग्रैंड फिनाले में आमने-सामने मुकाबला करेंगे। समापन समारोह 9 अक्टूबर 2026 को आयोजित किया जाएगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- टेरिटोरियल आर्मी भारतीय सेना की एक अंशकालिक रिजर्व फोर्स है।
- कैप्चर-द-फ्लैग साइबर सुरक्षा प्रतियोगिताओं का एक मानक प्रारूप है, जिसमें हमलावर और रक्षक दोनों तरह की क्षमताओं की परीक्षा होती है।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग साइबर सुरक्षा में खतरे की पहचान और असामान्य पैटर्न पकड़ने के लिए किया जाता है।
- डीपफेक, फिशिंग और गलत सूचना आज के डिजिटल माहौल की प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं।
कुल मिलाकर, टेरियर साइबर क्वेस्ट 2026 युवाओं, तकनीकी समुदाय और कंटेंट क्रिएटर्स को एक ऐसे मंच पर लाता है जहाँ नवाचार और राष्ट्रीय सुरक्षा एक साथ जुड़ते हैं। नई दिल्ली में होने वाला फाइनल इस दिशा में महत्वपूर्ण परिणाम दे सकता है।