यूपी में देश का पहला बड़ा बायोपॉलिमर प्लांट अक्टूबर में शुरू होने को तैयार
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में देश का पहला बड़े पैमाने का बायोपॉलिमर प्लांट तैयार किया जा रहा है, जिसकी कमीशनिंग अक्टूबर 2026 में प्रस्तावित है। यह परियोजना गोंला गोकर्णनाथ स्थित बलरामपुर चीनी मिल्स की कुंभी शुगर यूनिट परिसर में विकसित की जा रही है और इसे एक पूरी तरह एकीकृत औद्योगिक परिसर के रूप में बनाया जा रहा है।
गन्ने से बनेगा बायोप्लास्टिक का नया औद्योगिक मॉडल
यह संयंत्र स्थानीय स्तर पर उगाए जाने वाले गन्ने को पहले चीनी में बदलेगा और फिर उसी कच्चे माल से पॉलीलैक्टिक एसिड यानी PLA तैयार करेगा। PLA एक बायोडिग्रेडेबल थर्मोप्लास्टिक है, जिसका उपयोग पैकेजिंग और डिस्पोजेबल उत्पादों में किया जाता है। इस परियोजना को कृषि-आधारित कच्चे माल से औद्योगिक उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बायोपॉलिमर और PLA जैसे पदार्थ नवीकरणीय जैविक स्रोतों, जैसे पौधों की बायोमास, स्टार्च या शुगर-आधारित फीडस्टॉक से बनाए जाते हैं। इसलिए इन्हें पारंपरिक पेट्रोलियम-आधारित प्लास्टिक के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
परियोजना की लागत, स्थान और निर्माण की स्थिति
इस परियोजना की आधारशिला 22 फरवरी 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रखी थी। हालिया आधिकारिक संदर्भों में इसकी लागत 3,080 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि 2025 की शुरुआती अनुमानित लागत 2,850 करोड़ रुपये थी।
लखीमपुर खीरी के जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने 20 अगस्त 2026 को संयंत्र का निरीक्षण कर उत्पादन प्रक्रिया, तकनीकी ढांचे और निर्माण प्रगति की समीक्षा की। परिसर में शुगर उत्पादन और बायोप्लास्टिक निर्माण को एक ही स्थान पर जोड़ने की योजना इसे खास बनाती है।
पर्यावरणीय महत्व और उत्पादन क्षमता
इस प्लांट में Zero Liquid Discharge यानी ZLD प्रणाली का उपयोग किया जाएगा। यह औद्योगिक अपशिष्ट जल प्रबंधन की ऐसी व्यवस्था है, जिसमें तरल अपशिष्ट को परिसर से बाहर नहीं छोड़ा जाता। इससे पर्यावरणीय दबाव कम करने में मदद मिलती है।
परियोजना से प्लेट, कप और बैग जैसे उत्पाद बनाए जाने की योजना है, जो तीन से छह महीने के भीतर प्राकृतिक रूप से विघटित हो सकते हैं। अक्टूबर 2026 में कमीशनिंग के बाद नवंबर 2026 से वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पॉलीलैक्टिक एसिड (PLA) एक बायोडिग्रेडेबल पॉलिएस्टर है, जो नवीकरणीय संसाधनों से बनाया जाता है।
- Zero Liquid Discharge (ZLD) उद्योगों में अपशिष्ट जल को बाहर छोड़े बिना प्रबंधन करने की तकनीक है।
- उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन के लिए देश के प्रमुख राज्यों में शामिल है।
- बायोप्लास्टिक का उपयोग पैकेजिंग, डिस्पोजेबल टेबलवेयर और कैरी बैग जैसे उत्पादों में किया जाता है।
यह परियोजना भारत में कृषि-आधारित औद्योगिक नवाचार और पर्यावरण-अनुकूल सामग्री के विस्तार की दिशा में एक अहम उदाहरण बन सकती है।