जैव विविधता से कमाई का बंटवारा, NBA ने जारी किए 5.68 करोड़ रुपये
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने 30 अगस्त 2026 को एक्सेस एंड बेनिफिट-शेयरिंग (ABS) व्यवस्था के तहत 5.68 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की। यह भुगतान कृषि जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से प्राप्त हुआ और राज्य जैव विविधता बोर्डों, केंद्रशासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों तथा एक राष्ट्रीय शोध संस्थान को भेजा गया।
ABS व्यवस्था क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है
ABS यानी एक्सेस एंड बेनिफिट-शेयरिंग, जैव विविधता कानून के तहत बनाई गई वह व्यवस्था है जिसमें जैव संसाधनों और उनसे जुड़ी पारंपरिक जानकारी के उपयोग से होने वाले लाभों को साझा किया जाता है। इसका आधार जैव विविधता अधिनियम, 2002 और जैव विविधता नियम, 2004 हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जैव संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से होने वाली आय का लाभ केवल उपयोगकर्ता तक सीमित न रहे, बल्कि संबंधित समुदायों और संस्थागत ढांचे तक भी पहुंचे।
राष्ट्रीय स्तर पर NBA इस प्रणाली का संचालन करता है, जबकि राज्य स्तर पर राज्य जैव विविधता बोर्ड और स्थानीय स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समितियां काम करती हैं। यह ढांचा भारत में जैव विविधता शासन को विकेंद्रीकृत और अधिक जवाबदेह बनाता है।
किन फसलों से आई सबसे बड़ी राशि
इस बार ABS निधि का बड़ा हिस्सा भिंडी, खीरा और तरबूज के व्यावसायिक उपयोग से आया। इनमें भिंडी से सबसे अधिक 3.51 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। भिंडी के मामले में 139 किस्में और 28 संकर शामिल थे। तरबूज से जुड़े उपयोग में 662 किस्में और 15 संकर, जबकि खीरे से जुड़े उपयोग में 1,009 किस्में और 14 संकर शामिल रहे।
इन संसाधनों के व्यावसायिक खरीदारों में Nunhems India Private Limited, East West Seeds India Private Limited और Bayer Science and Innovation Private Limited शामिल थे। यह दिखाता है कि बीज विकास, प्रजनन और कृषि नवाचार में जैव संसाधनों की भूमिका कितनी अहम है।
राज्यों को कैसे मिला हिस्सा
चूंकि ये जैव संसाधन खुले बाजारों और व्यापारियों से लिए गए थे, इसलिए व्यक्तिगत स्रोत किसानों की पहचान नहीं हो सकी। ऐसे में NBA ने वास्तविक फसल उत्पादन के आधार पर राशि का वितरण किया। गुजरात को 88.79 लाख रुपये, पश्चिम बंगाल को 78.08 लाख रुपये, मध्य प्रदेश को 64.90 लाख रुपये और ओडिशा को 59.01 लाख रुपये मिले।
इसके अलावा पुणे स्थित CSIR-राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला के National Culture Collection of Industrial Microorganisms को भी एक छोटी राशि आवंटित की गई। यह दर्शाता है कि ABS व्यवस्था केवल राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि शोध और जैव संसाधन संरक्षण से जुड़े संस्थानों को भी लाभ पहुंचाती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जैव विविधता अधिनियम, 2002 भारत में जैव विविधता संरक्षण और लाभ-साझेदारी का प्रमुख कानून है।
- राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की स्थापना इसी अधिनियम के तहत की गई थी।
- ABS व्यवस्था का संबंध Convention on Biological Diversity और Nagoya Protocol से है।
- भारत में जैव विविधता शासन के लिए राज्य जैव विविधता बोर्ड और जैव विविधता प्रबंधन समितियां महत्वपूर्ण संस्थाएं हैं।
अब तक भारत की ABS व्यवस्था के तहत वितरित कुल राशि 191 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। यह आंकड़ा बताता है कि जैव संसाधनों के संरक्षण, उनके न्यायसंगत उपयोग और लाभ-साझेदारी की व्यवस्था देश में लगातार मजबूत हो रही है।