जयपुर बैठक से BRICS व्यापार सहयोग को मिली नई दिशा
भारत की BRICS अध्यक्षता के तहत जयपुर में हुई 16वीं BRICS व्यापार मंत्रियों की बैठक 7 अगस्त 2026 को संपन्न हुई। सवाई मान महल में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने की, जबकि राज्य मंत्री जितिन प्रसाद और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल भी मौजूद रहे। बैठक में व्यापार सुगमता, बाजार पहुंच, आपूर्ति शृंखलाओं की मजबूती और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
2030 तक आर्थिक साझेदारी की रूपरेखा तय
बैठक का सबसे अहम परिणाम BRICS Economic Partnership 2030 की रणनीति को अंतिम रूप देना रहा, जिसे अब आगामी नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में BRICS नेताओं के समक्ष रखा जाएगा। इसके साथ ही मंत्रियों ने Jaipur Consensus और MSME credit से जुड़े मार्गदर्शक सिद्धांतों को भी अपनाया। इन कदमों का उद्देश्य छोटे व्यवसायों के लिए वित्त तक पहुंच आसान बनाना और वैश्विक व्यापार वित्त अंतर को कम करने की दिशा में ठोस पहल करना है।
आधिकारिक आकलन के अनुसार दुनिया में व्यापार वित्त की कमी लगभग 2.5 ट्रिलियन डॉलर तक मानी जाती है। इसी चुनौती को देखते हुए नकदी प्रवाह आधारित ऋण व्यवस्था पर जोर दिया गया, ताकि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को अधिक व्यावहारिक आधार पर ऋण मिल सके।
वैश्विक मूल्य शृंखलाओं पर BRICS का फोकस
बैठक में 2026 से 2030 तक के लिए Global Value Chains action plan को भी मंजूरी दी गई। इसके तहत BRICS Technical Council और BRICS Connect पहल की परिकल्पना की गई है। इसका मकसद सदस्य देशों के बीच तकनीकी समन्वय बढ़ाना, व्यापारिक संपर्क मजबूत करना और उत्पादन से लेकर वितरण तक की अंतरराष्ट्रीय शृंखलाओं में BRICS की भूमिका को अधिक प्रभावी बनाना है।
BRICS एक ऐसा समूह है जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल रहे हैं, और हाल के वर्षों में इसमें नए सदस्य भी जुड़े हैं। यह मंच उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार, निवेश और विकास सहयोग का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।
भारत की प्राथमिकताएं और WTO पर रुख
पीयूष गोयल ने बैठक में भारत का रुख स्पष्ट करते हुए किसानों के हितों की रक्षा, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के ढांचे में Special and Differential Treatment को बनाए रखने पर जोर दिया। यह प्रावधान विकासशील देशों को अधिक समय, तकनीकी सहायता और नीतिगत लचीलापन देता है। भारत का यह रुख ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक व्यापार नियमों पर लगातार बहस जारी है और विकासशील देशों के लिए संतुलित व्यवस्था की मांग तेज है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- BRICS का विस्तार मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से हुआ था।
- विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना 1995 में हुई थी।
- Global Value Chains का अर्थ वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन व वितरण की सीमा-पार चरणबद्ध प्रक्रिया से है।
- MSME का अर्थ Micro, Small and Medium Enterprises है, जो कई अर्थव्यवस्थाओं में रोजगार और उत्पादन का बड़ा आधार हैं।
जयपुर बैठक ने BRICS के भीतर व्यापार सहयोग, छोटे उद्यमों की वित्तीय पहुंच और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में साझेदारी को नई गति दी है। अब नजर नई दिल्ली शिखर सम्मेलन पर रहेगी, जहां इन प्रस्तावों पर आगे की दिशा तय होगी।