मिथिला मखाना की समुद्री निर्यात शुरुआत से बिहार को नई वैश्विक पहचान

मिथिला मखाना की समुद्री निर्यात शुरुआत से बिहार को नई वैश्विक पहचान

बिहार के मिथिला क्षेत्र के जीआई-टैग वाले मखाने ने पहली बार समुद्री मार्ग से ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच बनाकर निर्यात के नए चरण में प्रवेश किया है। अगस्त 2026 में भेजी गई यह खेप न केवल कृषि निर्यात के लिहाज से अहम है, बल्कि इससे मिथिला मखाने की अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान और मजबूत होने की उम्मीद है।

समुद्री मार्ग से निर्यात का नया अध्याय

यह खेप पटना के पास बिहटा के सिकंदरपुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित इंटीग्रेटेड यूनिट ऑफ इर्रेडिएशन-कम-पैकहाउस से रवाना की गई। वहां से माल को कोलकाता के रास्ते समुद्री परिवहन के लिए भेजा गया। इससे पहले मखाने के निर्यात में अक्सर हवाई मार्ग का उपयोग होता था, लेकिन समुद्री मार्ग अपनाने से लागत कम होने और बड़े पैमाने पर निर्यात की संभावना बढ़ने की उम्मीद है।

यह खेप सीधे दरभंगा जिले के किसानों से खरीदी गई थी और इसे सात कंटेनरों में पैक किया गया। निर्यात से पहले वैज्ञानिक गुणवत्ता परीक्षण, इर्रेडिएशन और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पैकेजिंग की गई, ताकि लंबी दूरी की यात्रा के दौरान उत्पाद की गुणवत्ता बनी रहे।

किसानों को मिला बेहतर मूल्य

इस निर्यात सौदे का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय किसानों को मिला। रिपोर्ट के अनुसार, किसानों को स्थानीय बाजार दरों की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत अधिक लाभ मार्जिन प्राप्त हुआ। यह संकेत देता है कि जीआई-टैग और निर्यात-उन्मुख आपूर्ति श्रृंखला किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

मखाना, जिसे अंग्रेजी में फॉक्स नट या लोटस सीड भी कहा जाता है, बिहार की प्रमुख कृषि उपजों में शामिल है। मिथिला क्षेत्र और विशेष रूप से दरभंगा इसके उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में निर्यात बाजार का विस्तार राज्य के लिए मूल्य संवर्धन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों के लिहाज से अहम है।

जीआई टैग और एपीडा की भूमिका

मिथिला मखाना को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग प्राप्त है। भारत में जीआई पंजीकरण Geographical Indications of Goods (Registration and Protection) Act, 1999 के तहत होता है। जीआई टैग किसी उत्पाद को उसके विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र, गुणवत्ता और प्रतिष्ठा से जोड़ता है।

इस निर्यात को APEDA यानी कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण का प्रशासनिक और लॉजिस्टिक सहयोग मिला। APEDA वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय है, जो भारत से कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • जीआई टैग उन उत्पादों को दिया जाता है जिनकी विशेष पहचान किसी भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी होती है।
  • भारत में जीआई पंजीकरण Geographical Indications of Goods (Registration and Protection) Act, 1999 के तहत होता है।
  • APEDA का पूरा नाम Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority है।
  • मखाना को अंग्रेजी में fox nut या lotus seed कहा जाता है।

ऑस्ट्रेलिया को यह पहली समुद्री खेप और इससे पहले कनाडा को भेजी गई मूल्यवर्धित मखाना खेप यह दिखाती है कि बिहार का यह पारंपरिक उत्पाद अब वैश्विक बाजार में स्थायी जगह बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

Originally written on August 8, 2026 and last modified on August 8, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *