जंगल युद्ध प्रशिक्षण के जनक ब्रिगेडियर बी.के. पोनवार का निधन
भारतीय सेना में काउंटर-इंसर्जेंसी और जंगल युद्ध प्रशिक्षण को नई पहचान देने वाले ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) बसंत कुमार पोनवार का 77 वर्ष की आयु में मध्य प्रदेश के महू में निधन हो गया। वे छत्तीसगढ़ के कांकेर में स्थापित काउंटर टेररिज्म एंड जंगल वारफेयर कॉलेज के संस्थापक थे और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैयारी को मजबूत करने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
सेना से लेकर जंगल युद्ध प्रशिक्षण तक लंबा सफर
ब्रिगेडियर पोनवार ने दिसंबर 1969 में भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त किया था और उन्हें 1st Battalion of the Maratha Light Infantry में नियुक्त किया गया। वे 1971 के भारत-पाक युद्ध के अनुभवी थे, जिसने भारतीय सैन्य इतिहास में निर्णायक मोड़ लाया। बाद में उन्होंने मिजोरम के वैरेंगटे स्थित आर्मी के काउंटर इंसर्जेंसी एंड जंगल वारफेयर स्कूल के कमांडेंट के रूप में भी सेवा दी।उनकी पहचान केवल एक सैन्य अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे प्रशिक्षक के रूप में भी बनी जिन्होंने जंगल और गुरिल्ला युद्ध की व्यावहारिक ट्रेनिंग को संस्थागत रूप दिया। इसी सोच के आधार पर कांकेर में अगस्त 2005 में काउंटर टेररिज्म एंड जंगल वारफेयर कॉलेज की स्थापना हुई, जहां अब तक 37,000 से अधिक सुरक्षा कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
माओवादी चुनौती के बीच उनकी भूमिका
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में लंबे समय तक माओवादी हिंसा एक बड़ी सुरक्षा चुनौती रही है। ऐसे में ब्रिगेडियर पोनवार का योगदान केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहा। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ सरकार ने पुलिस महानिरीक्षक के रूप में नियुक्त किया, ताकि माओवादी उग्रवाद के खिलाफ अभियानों को और प्रभावी बनाया जा सके।उनकी विशेषज्ञता का लाभ राज्य और केंद्रीय सुरक्षा बलों दोनों को मिला। जंगलों, दुर्गम इलाकों और छिपकर हमला करने वाली रणनीतियों से निपटने के लिए जिस तरह की तैयारी चाहिए, उसमें उनके अनुभव ने एक मजबूत आधार तैयार किया।
सम्मान, अंतरराष्ट्रीय अभ्यास और विरासत
ब्रिगेडियर पोनवार को विशिष्ट सेवा के लिए अति विशिष्ट सेवा पदक और विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया था। उन्होंने 2004 में भारत-अमेरिका के पहले संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास’ की भी निगरानी की थी, जो दोनों देशों के रक्षा सहयोग के लिए एक अहम कदम माना गया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- काउंटर इंसर्जेंसी एंड जंगल वारफेयर स्कूल मिजोरम के वैरेंगटे में स्थित है।
- कांकेर का काउंटर टेररिज्म एंड जंगल वारफेयर कॉलेज अगस्त 2005 में स्थापित हुआ था।
- 1971 के भारत-पाक युद्ध का अंत 16 दिसंबर 1971 को ढाका में पाकिस्तानी सेनाओं के समर्पण के साथ हुआ था।
- अति विशिष्ट सेवा पदक और विशिष्ट सेवा पदक भारतीय सेना के विशिष्ट सेवा सम्मान हैं।
ब्रिगेडियर पोनवार के निधन पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने शोक व्यक्त किया। उनके दो पुत्र भारतीय सेना में सेवा दे रहे हैं, जिससे उनकी सैन्य विरासत आगे भी जारी रहेगी।