छोटी नदियों के पुनर्जीवन के लिए राष्ट्रीय मिशन स्वच्छ गंगा का नया एसआरआर फ्रेमवर्क
भारत की छोटी नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन को नई दिशा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) ने स्मॉल रिवर रीजुवेनेशन (एसआरआर) फ्रेमवर्क का मसौदा तैयार किया है। यह नया ढांचा छोटी नदियों के लिए अलग रणनीति अपनाने पर बल देता है और गंगा जैसी बड़ी नदियों के लिए उपयोग किए जाने वाले मॉडल से इसे अलग करता है। इसमें स्थानीय परिस्थितियों, वैज्ञानिक अध्ययन, प्रकृति-आधारित समाधानों और सामुदायिक भागीदारी को प्राथमिकता दी गई है, ताकि छोटी नदियों के जल प्रवाह, जल गुणवत्ता और पारिस्थितिकीय संतुलन को प्रभावी ढंग से बहाल किया जा सके।
एसआरआर फ्रेमवर्क क्या है?
स्मॉल रिवर रीजुवेनेशन (एसआरआर) फ्रेमवर्क भारत की छोटी नदी प्रणालियों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए तैयार किया गया एक मसौदा नीति दस्तावेज है। इसका उद्देश्य बड़े इंजीनियरिंग ढांचों पर निर्भर रहने के बजाय प्रत्येक नदी की भौगोलिक, जलवैज्ञानिक और पारिस्थितिक विशेषताओं के आधार पर अलग-अलग योजना तैयार करना है। इस फ्रेमवर्क में पुनर्जीवन (Rejuvenation) का अर्थ केवल नदी की सफाई नहीं, बल्कि उसके प्राकृतिक जल प्रवाह, बेहतर जल गुणवत्ता और पारिस्थितिकीय कार्यों की पुनर्स्थापना से है।
वैज्ञानिक अध्ययन पर विशेष जोर
एसआरआर फ्रेमवर्क में किसी भी नदी पुनर्जीवन परियोजना से पहले व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन करने का प्रावधान है। इसके अंतर्गत जलविज्ञान (Hydrology), भू-जल विज्ञान (Hydrogeology), पारिस्थितिकीय मूल्यांकन, जल गुणवत्ता परीक्षण तथा भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) के माध्यम से स्थानिक मानचित्रण किया जाएगा। इसके आधार पर विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार किया जाएगा, जिसमें जल स्रोत संरक्षण, ठोस एवं तरल अपशिष्ट नियंत्रण, पारिस्थितिकीय बहाली, नदी चैनल सुधार तथा लोगों और नदी के बीच संबंध मजबूत करने जैसी गतिविधियों को शामिल किया जाएगा।
ग्रामीण और शहरी नदियों के लिए अलग रणनीति
इस नीति में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की छोटी नदियों के लिए अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक जल संपर्क, स्थानीय जल संचयन और पारंपरिक जल संरचनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं शहरी छोटी नदियों के लिए निरंतर जल प्रवाह बनाए रखने, वर्षा जल निकासी (अर्बन रनऑफ) के बेहतर प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सामुदायिक भागीदारी और नदी संरक्षण
एनएमसीजी ने इस फ्रेमवर्क को ‘निर्मल गंगा’ और ‘अविरल गंगा’ की अवधारणाओं से जोड़ा है, जो क्रमशः स्वच्छता और निरंतर जल प्रवाह पर आधारित हैं। हालांकि, मसौदे में स्पष्ट किया गया है कि छोटी नदियों की जलग्रहण क्षमता, प्रवाह पैटर्न और प्रदूषण के स्रोत बड़ी नदियों से अलग होते हैं, इसलिए उनके संरक्षण के लिए अलग रणनीति आवश्यक है। फ्रेमवर्क के अनुसार नदी किनारे रहने वाले समुदायों को नदी संरक्षण और रखरखाव की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी दी जाएगी। इस प्रकार नदी प्रबंधन केवल जागरूकता अभियानों तक सीमित न रहकर स्थानीय सहभागिता पर आधारित होगा।
वित्तपोषण और कार्यान्वयन
एसआरआर फ्रेमवर्क में महंगे और स्वतंत्र आधारभूत ढांचों के निर्माण से बचने की बात कही गई है। इसके बजाय केंद्र और राज्य सरकारों की मौजूदा योजनाओं के धन का समन्वित उपयोग करते हुए नदी पुनर्जीवन, प्रदूषण नियंत्रण और पारिस्थितिकीय संरक्षण के कार्य किए जाएंगे। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग और परियोजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- राष्ट्रीय मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी), जल शक्ति मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
- जीआईएस (Geographic Information System) का उपयोग स्थानिक मानचित्रण और भौगोलिक विश्लेषण के लिए किया जाता है।
- डीपीआर (Detailed Project Report) किसी परियोजना की तकनीकी योजना, लागत और क्रियान्वयन का विस्तृत दस्तावेज होता है।
- हाइड्रोजियोलॉजी (Hydrogeology) भूजल की गति, भंडारण और सतही जल के साथ उसकी अंतःक्रिया का अध्ययन है।
छोटी नदियों के पुनर्जीवन के लिए प्रस्तावित एसआरआर फ्रेमवर्क भारत में नदी संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह स्थानीय आवश्यकताओं, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामुदायिक सहभागिता पर आधारित मॉडल प्रस्तुत करता है, जिससे छोटी नदियों की पारिस्थितिकी, जल गुणवत्ता और प्राकृतिक प्रवाह को दीर्घकालिक रूप से संरक्षित किया जा सकेगा।