छात्र प्रदर्शनों में पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बनाई उच्चस्तरीय समिति

छात्र प्रदर्शनों में पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बनाई उच्चस्तरीय समिति

सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस अत्याचारों की स्वतंत्र तथ्य-जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की है। यह कदम 20 जुलाई 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर और बिहार में हुए प्रदर्शनों से जुड़ी शिकायतों के बाद उठाया गया, जिनका संबंध परीक्षा पेपर लीक के आरोपों, खासकर NEET से जुड़ी नाराजगी से बताया गया था।

समिति की संरचना और जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित High-Powered Enquiry Committee (HPEC) की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी करेंगे। समिति में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश शालिंदर कौर, पूर्व CBI निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और सेवानिवृत्त मेघालय DGP डॉ. एल.आर. बिश्नोई शामिल हैं।

यह आदेश 18 अगस्त 2026 को तीन न्यायाधीशों की पीठ ने पारित किया, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन शामिल थे। बाद में इसे 20 अगस्त 2026 को अपलोड किया गया। समिति को मामले की स्वतंत्र और तथ्य-आधारित जांच करने का दायित्व दिया गया है।

जांच का दायरा और पुलिस कार्रवाई पर सवाल

समिति को यह देखना होगा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई कानूनन उचित और अनुपातिक थी या नहीं। इसमें पेलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन, आंसू गैस और लाठीचार्ज जैसे भीड़-नियंत्रण उपायों की वैधता और आवश्यकता की जांच भी शामिल है।

अदालत ने विशेष रूप से महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित लक्षित हिंसा, उत्पीड़न और ऑनलाइन या शारीरिक छेड़छाड़ के आरोपों को प्राथमिकता से देखने को कहा है। यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि सार्वजनिक प्रदर्शनों में पुलिस बल प्रयोग और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन का प्रश्न बार-बार सामने आता रहा है।

सबूत सुरक्षित रखने और आगे की प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने समिति को निर्देश दिया है कि वह ड्रोन फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, बॉडी-कैमरा फुटेज और PCR कॉल रिकॉर्ड सुरक्षित कराए। इससे जांच के दौरान घटनाक्रम की सटीक तस्वीर सामने लाने में मदद मिलेगी।

अदालत ने यह भी कहा है कि समिति एक ही अंतिम रिपोर्ट देने के बजाय समय-समय पर अंतरिम निष्कर्ष प्रस्तुत करे। साथ ही, जिन हिरासत में लिए गए नाबालिगों पर गंभीर या जघन्य आरोप नहीं हैं, उनकी रिहाई सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सुप्रीम कोर्ट भारत का सर्वोच्च न्यायालय है और संविधान के अनुच्छेद 124 के तहत कार्य करता है।
  • High-Powered Enquiry Committee एक स्वतंत्र तथ्य-जांच निकाय होता है, जिसे विवादित घटनाओं की जांच के लिए बनाया जाता है।
  • जंतर-मंतर, नई दिल्ली, सार्वजनिक प्रदर्शनों और धरनों के लिए एक प्रमुख स्थल माना जाता है।
  • NEET का पूरा नाम National Eligibility cum Entrance Test है, जिसके आधार पर भारत में मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश होता है।

इस आदेश के जरिए अदालत ने यह संकेत दिया है कि छात्र आंदोलनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच जरूरी है। अब समिति की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि घटनाओं में किस स्तर पर नियमों का पालन हुआ और कहां चूक हुई।

Originally written on August 20, 2026 and last modified on August 20, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *