छत्तीसगढ़ ने तिलापिया निर्यात से अंतर्देशीय मत्स्य पालन में नई पहचान बनाई
छत्तीसगढ़ ने 20 अगस्त 2026 को मूल्यवर्धित तिलापिया उत्पादों के निर्यात की शुरुआत कर देश के अंतर्देशीय राज्यों के लिए एक नई मिसाल पेश की है। यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि छत्तीसगढ़ भारत का पहला ऐसा अंतर्देशीय राज्य बन गया है, जिसने तिलापिया उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया। राज्य ने 382 टन तिलापिया उत्पाद अमेरिका भेजे और रायपुर में अधिसूचित तिलापिया क्लस्टर की समीक्षा भी की गई।
तिलापिया निर्यात से बढ़ी राज्य की औद्योगिक क्षमता
तिलापिया एक मीठे पानी की मछली है, जिसकी खेती तालाबों, टैंकों, पिंजरों और रीसर्कुलेटरी सिस्टम में की जाती है। इसकी मांग इसलिए बढ़ रही है क्योंकि इसे बड़े पैमाने पर व्यावसायिक मत्स्य पालन के लिए उपयुक्त माना जाता है। छत्तीसगढ़ में तिलापिया निर्यात की शुरुआत यह दिखाती है कि राज्य अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि मूल्यवर्धन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भी अपनी जगह बना रहा है।
राज्य में जीनोमिक रूप से उन्नत फार्म्ड तिलापिया यानी GIFT जैसी चयनित नस्लों का उपयोग भी मत्स्य पालन को अधिक उत्पादक बनाने में सहायक माना जाता है। इससे किसानों को बेहतर उत्पादन, बाजार में प्रतिस्पर्धा और निर्यात योग्य गुणवत्ता हासिल करने में मदद मिलती है।
मत्स्य क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की बढ़ती भूमिका
छत्तीसगढ़ ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत लगभग 900 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया है। इस निवेश के बाद राज्य की मछली उत्पादन क्षमता बढ़कर लगभग 10 लाख टन तक पहुंच गई है। राज्य की मत्स्य अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से तालाबों, जलाशयों और टैंकों जैसे अंतर्देशीय जल संसाधनों पर आधारित है, जो इसे समुद्र तटीय राज्यों से अलग पहचान देती है।
यह उपलब्धि उन राज्यों के लिए भी संकेत है जिनके पास समुद्री तट नहीं है, लेकिन वे वैज्ञानिक मत्स्य पालन, प्रसंस्करण और निर्यात के जरिए बड़ा बाजार बना सकते हैं। छत्तीसगढ़ का मॉडल अंतर्देशीय मत्स्य पालन को औद्योगिक स्वरूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन रहा है।
रायपुर समीक्षा बैठक और संस्थागत सहयोग
रायपुर में हुई समीक्षा बैठक की अध्यक्षता मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने की। बैठक में राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड, समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण और नाबार्ड के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसके साथ ही 1,300 से अधिक मछुआरे, निर्यातक और उद्यमी भी इस समीक्षा प्रक्रिया से जुड़े।
इस तरह का संस्थागत समन्वय निर्यात-आधारित मत्स्य अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है, क्योंकि इसमें उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, वित्तीय सहायता और बाजार पहुंच—सभी पहलू एक साथ काम करते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- छत्तीसगढ़ भारत का पहला अंतर्देशीय राज्य है, जिसने तिलापिया उत्पादों का निर्यात शुरू किया।
- तिलापिया एक मीठे पानी की मछली है और इसे तालाब, टैंक, पिंजरा तथा रीसर्कुलेटरी सिस्टम में पाला जाता है।
- प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना भारत में मत्स्य क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र सरकार की प्रमुख योजना है।
- MPEDA यानी Marine Products Export Development Authority भारत से समुद्री उत्पादों के निर्यात से जुड़ी वैधानिक संस्था है।
भारत के मत्स्य क्षेत्र ने 198 लाख टन उत्पादन और 73,890.46 करोड़ रुपये के समुद्री निर्यात तक पहुंचकर अपनी क्षमता दिखाई है। ऐसे में छत्तीसगढ़ का तिलापिया निर्यात न केवल राज्य के लिए, बल्कि देश के मूल्यवर्धित मत्स्य व्यापार के लिए भी एक अहम कदम माना जा रहा है।