चुमुर बना भारत का पहला मॉडल सीमा गांव
पूर्वी लद्दाख का चुमुर गांव भारत-चीन सीमा के निकट देश के पहले मॉडल सीमा गांव के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के तहत संचालित की जा रही है, जिसका उद्देश्य सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बेहतर आधारभूत सुविधाएं, आजीविका के अवसर और जीवन स्तर में सुधार सुनिश्चित करना है। यह पहल सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को भी मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
चुमुर गांव का सामरिक महत्व
चुमुर गांव पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सीमा के निकट लगभग 16,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यह छोटा सा गांव 24 परिवारों और 91 निवासियों का घर है। अत्यधिक ऊंचाई और कठिन जलवायु परिस्थितियों के बावजूद यहां के लोग मुख्य रूप से पशुपालन, पश्मीना उत्पादन और उससे जुड़े कार्यों में संलग्न हैं। सीमा क्षेत्र में स्थित होने के कारण चुमुर का सामरिक महत्व भी काफी अधिक है, जिससे इसका विकास राष्ट्रीय दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।
वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम की विशेषताएं
वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसका उद्देश्य सीमावर्ती गांवों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करना और वहां की आबादी को बेहतर जीवन प्रदान करना है। कार्यक्रम के पहले चरण में 10 मॉडल सीमा गांव विकसित किए जाने की योजना है। इस योजना में आधारभूत ढांचे का विकास, रोजगार सृजन, आजीविका संवर्धन, सभी मौसमों में कार्यशील सुविधाएं तथा नागरिक और रक्षा तंत्र के बीच बेहतर समन्वय को प्राथमिकता दी गई है।
आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा गांव
चुमुर में अत्यधिक ठंड और कठिन मौसम को ध्यान में रखते हुए दक्षिण दिशा की ओर मुख वाले निष्क्रिय सौर ऊर्जा आधारित आवास बनाए जाएंगे, जो माइनस 35 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी रहने योग्य होंगे। प्रत्येक घर में संलग्न शौचालय, अतिरिक्त कमरा, रसोई उद्यान, पशुशाला तथा चारे के भंडारण की सुविधा होगी। इसके अतिरिक्त गांव में वर्षभर सब्जियों की खेती के लिए व्यावसायिक ग्रीनहाउस स्थापित किया जाएगा। जलापूर्ति, स्वच्छता, नवीकरणीय ऊर्जा आधारित बिजली, डिजिटल कनेक्टिविटी, विद्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक भवन, पार्क, सामुदायिक कैफे और पर्यटक सूचना केंद्र जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
परियोजना के तहत कोरजोक-हनले पर्यटन मार्ग से जुड़े विकास कार्य भी किए जाएंगे। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए नए रोजगार अवसर पैदा होंगे। साथ ही पश्मीना आधारित उद्योग, हस्तशिल्प और पशुपालन को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा। यह क्षेत्र लंबे समय से उच्च गुणवत्ता वाले पश्मीना ऊन उत्पादन के लिए प्रसिद्ध रहा है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- चुमुर गांव पूर्वी लद्दाख में 16,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।
- गांव में कुल 24 परिवार और 91 निवासी रहते हैं।
- पश्मीना ऊन चांगथांगी बकरी के मुलायम अंदरूनी रेशों से प्राप्त किया जाता है।
- डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ हाई-एल्टीट्यूड रिसर्च उच्च हिमालयी कृषि और संबंधित तकनीकों पर कार्य करता है।
- वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के तहत भारत में 10 मॉडल सीमा गांव विकसित किए जाने की योजना है।
चुमुर को मॉडल सीमा गांव के रूप में विकसित करने की यह पहल सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास का महत्वपूर्ण उदाहरण है। आधुनिक सुविधाओं, टिकाऊ आवास, बेहतर आजीविका अवसरों और पर्यटन विकास के माध्यम से यह परियोजना स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के साथ-साथ सीमा क्षेत्रों को अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।