चिनाब नदी पर भारत की बड़ी जलविद्युत परियोजनाएं
भारत ने चिनाब नदी प्रणाली से जुड़े दो महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर काम शुरू कर दिया है, जिनकी कुल अनुमानित लागत लगभग 2,600 करोड़ रुपये है। इनमें हिमाचल प्रदेश में 2,352 करोड़ रुपये की लागत वाला चिनाब-ब्यास लिंक टनल प्रोजेक्ट और जम्मू-कश्मीर के सलाल बांध में 268 करोड़ रुपये की लागत वाला सेडिमेंट-बायपास टनल प्रोजेक्ट शामिल है। इन परियोजनाओं को भारत की जल प्रबंधन और ऊर्जा सुरक्षा रणनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चिनाब नदी प्रणाली का महत्व
Chenab River सिंधु नदी प्रणाली की पश्चिमी नदियों में से एक है और यह भारत तथा पाकिस्तान दोनों देशों से होकर बहती है। भारत में चिनाब नदी पर जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में कई बड़े जलविद्युत परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। यह नदी पर्वतीय क्षेत्रों में जलविद्युत उत्पादन की अपार संभावनाएं प्रदान करती है, जिसके कारण भारत लगातार इस क्षेत्र में नई परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहा है।
इंडस वाटर्स ट्रीटी और नदी जल बंटवारा
वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच इंडस वाटर्स ट्रीटी पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसमें World Bank भी एक हस्ताक्षरकर्ता के रूप में शामिल था। इस संधि के तहत रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का उपयोग भारत को दिया गया, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी पश्चिमी नदियों का प्राथमिक उपयोग पाकिस्तान को आवंटित किया गया। हालांकि भारत को इन पश्चिमी नदियों पर सीमित गैर-उपभोगी उपयोग और जलविद्युत उत्पादन का अधिकार प्राप्त है।
प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएं
भारत ने हाल के वर्षों में चिनाब नदी पर कई बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं को तेज गति से आगे बढ़ाया है। पाकल दुल परियोजना की क्षमता 1,000 मेगावाट निर्धारित की गई है, जबकि किरू परियोजना 624 मेगावाट और क्वार परियोजना 540 मेगावाट बिजली उत्पादन करेगी। इसके अलावा रतले परियोजना की क्षमता 850 मेगावाट है। सावालकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की अनुमानित क्षमता 1,856 मेगावाट और लागत लगभग 5,129 करोड़ रुपये बताई गई है। वहीं डुलहस्ती स्टेज-II परियोजना 260 मेगावाट क्षमता के साथ लगभग 3,277 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जा रही है।
सेडिमेंट-बायपास और लिंक टनल की भूमिका
सेडिमेंट-बायपास टनल एक विशेष इंजीनियरिंग संरचना होती है, जिसका उपयोग बांध के जलाशय में जमा होने वाली गादयुक्त पानी को मोड़ने के लिए किया जाता है। इससे बांध की क्षमता और आयु बढ़ती है। वहीं लिंक टनल का उपयोग एक नदी प्रणाली से दूसरी नदी प्रणाली में पानी स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग सिंचाई, बिजली उत्पादन और जल प्रबंधन के लिए किया जाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- चिनाब नदी सिंधु नदी प्रणाली की पश्चिमी नदियों में शामिल है।
- इंडस वाटर्स ट्रीटी पर वर्ष 1960 में हस्ताक्षर किए गए थे।
- विश्व बैंक इस संधि का हस्ताक्षरकर्ता संगठन है।
- एनएचपीसी का पूरा नाम नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन है।
हाल के घटनाक्रमों में भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद इंडस वाटर्स ट्रीटी को निलंबित कर दिया था। इसके अलावा भारत ने किशनगंगा और रतले परियोजनाओं से जुड़े अधिकतम जल भंडारण पर 15 मई 2026 को दिए गए कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के पूरक फैसले को भी अस्वीकार कर दिया। इन कदमों को भारत की रणनीतिक जल नीति और राष्ट्रीय हितों की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।