ग्लासगो में दिलीप गावित की रिकॉर्ड दौड़ से भारत का 1-2 फिनिश
ग्लासगो में 29 और 30 जुलाई 2026 को हुए कॉमनवेल्थ गेम्स के पुरुषों की 100 मीटर टी47 फाइनल में भारत ने शानदार 1-2 फिनिश दर्ज किया। दिलीप महादू गावित ने 10.71 सेकंड के गेम्स रिकॉर्ड और सीजन-बेस्ट समय के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनकाथ ने 10.83 सेकंड में रजत पदक हासिल किया।
टी47 वर्ग और 100 मीटर स्प्रिंट का महत्व
पैरा एथलेटिक्स में टी47 वर्ग उन खिलाड़ियों के लिए होता है जिनके एक हाथ की ऊपरी भुजा में विकलांगता होती है। यह 100 मीटर दौड़ मानक ट्रैक पर वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स के नियमों के तहत कराई जाती है। 100 मीटर स्प्रिंट ट्रैक एंड फील्ड की सबसे तेज और सबसे प्रतिस्पर्धी स्पर्धाओं में गिनी जाती है, इसलिए इसमें मिली हर बड़ी जीत एथलीट की गति, तकनीक और मानसिक मजबूती का संकेत मानी जाती है।
भारत के लिए ऐतिहासिक परिणाम
इस फाइनल में भारत के दोनों धावकों ने पोडियम पर जगह बनाकर देश के लिए बड़ी उपलब्धि दर्ज की। दिलीप गावित का 10.71 सेकंड का प्रदर्शन न केवल स्वर्ण पदक दिलाने वाला रहा, बल्कि यह गेम्स रिकॉर्ड भी बना। वहीं, मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनकाथ ने 10.83 सेकंड के साथ रजत जीता और अपना सीजन-बेस्ट समय दर्ज किया। इंग्लैंड के केविन सैंटोस ने 10.85 सेकंड के साथ कांस्य पदक हासिल किया।
गावित की पृष्ठभूमि और आगे की राह
22 वर्षीय दिलीप महादू गावित महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाके से आते हैं। बचपन में देरी से हुए इलाज के कारण उन्होंने अपना बायां हाथ खो दिया था। बाद में उनकी पहचान हुई और वैजनाथ काले ने उन्हें प्रशिक्षण दिया। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह उपलब्धि उनकी मेहनत और निरंतर प्रगति को दिखाती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स, पैरा एथलेटिक्स की अंतरराष्ट्रीय शासी संस्था है, जो खिलाड़ियों को टी47 जैसे खेल वर्गों में बांटती है।
- टी47 वर्ग उन एथलीटों के लिए होता है जिनके एक हाथ की ऊपरी भुजा में विकलांगता होती है।
- 100 मीटर दौड़ एथलेटिक्स की सबसे छोटी और सबसे तेज ट्रैक स्पर्धाओं में से एक है।
- गेम्स रिकॉर्ड किसी प्रतियोगिता के इतिहास में सबसे तेज समय को दर्शाता है, जबकि सीजन-बेस्ट उस सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन होता है।
इस 1-2 फिनिश के साथ भारत ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना तीसरा स्वर्ण पदक हासिल किया और कुल पदक संख्या 15 तक पहुंच गई। अब दिलीप गावित का लक्ष्य जापान में होने वाले पैरा एशियन गेम्स और 2028 पैरालंपिक्स पर है।