मुरली श्रीशंकर ने लगातार दूसरा कॉमनवेल्थ सिल्वर जीतकर रचा इतिहास

मुरली श्रीशंकर ने लगातार दूसरा कॉमनवेल्थ सिल्वर जीतकर रचा इतिहास

भारतीय लंबी कूद खिलाड़ी मुरली श्रीशंकर ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में रजत पदक जीत लिया। 27 वर्षीय श्रीशंकर ने 8.09 मीटर की छलांग लगाई। इस स्पर्धा में जमैका के ताजाय गेल ने 8.15 मीटर के साथ स्वर्ण और स्कॉटलैंड के स्टीफन मैकेंजी ने 8.08 मीटर के साथ कांस्य पदक जीता।

लगातार दूसरा कॉमनवेल्थ पदक

यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि मुरली श्रीशंकर अब कॉमनवेल्थ गेम्स में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष लंबी कूद खिलाड़ी बन गए हैं। इससे पहले उन्होंने बर्मिंघम 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी रजत पदक जीता था। लगातार दो संस्करणों में पदक जीतना उनकी निरंतरता और बड़े मंच पर प्रदर्शन की क्षमता को दिखाता है।

भारतीय एथलेटिक्स के लिए अहम उपलब्धि

लंबी कूद एथलेटिक्स की उन स्पर्धाओं में शामिल है, जहां एक सही और सटीक टेक-ऑफ के साथ दूरी तय करना निर्णायक होता है। खिलाड़ी को बोर्ड से बिना फाउल किए छलांग लगानी होती है और रेत में बने सबसे नजदीकी निशान तक दूरी मापी जाती है। ऐसे में कुछ सेंटीमीटर का अंतर भी पदक का रंग बदल सकता है। श्रीशंकर का 8.09 मीटर का प्रयास इसी प्रतिस्पर्धा की तीव्रता को दर्शाता है।

ग्लासगो 2026 और स्पर्धा का महत्व

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आयोजन 23 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक स्कॉटलैंड के ग्लासगो में हो रहा है। यह बहु-खेल आयोजन कॉमनवेल्थ ऑफ नेशंस के खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच माना जाता है। पुरुषों की लंबी कूद एथलेटिक्स कार्यक्रम का हिस्सा है और इसमें तकनीक, गति तथा संतुलन का संयुक्त प्रदर्शन देखा जाता है। श्रीशंकर का पदक भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक और सकारात्मक संकेत है, खासकर तब जब देश के ट्रैक एंड फील्ड खिलाड़ी वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रहे हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • कॉमनवेल्थ गेम्स एक बहु-खेल आयोजन है, जिसमें कॉमनवेल्थ ऑफ नेशंस के देश भाग लेते हैं।
  • पुरुषों की लंबी कूद एथलेटिक्स की सबसे पुरानी आधुनिक ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धाओं में से एक मानी जाती है।
  • लंबी कूद में वैध प्रयास के लिए खिलाड़ी को फाउल लाइन पार किए बिना टेक-ऑफ करना होता है।
  • बर्मिंघम 2022 में भी मुरली श्रीशंकर ने इसी स्पर्धा में रजत पदक जीता था।

ग्लासगो में मिला यह रजत पदक न सिर्फ श्रीशंकर की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के लिए भी एक महत्वपूर्ण परिणाम है। लगातार दो कॉमनवेल्थ पदक उनके स्थिर प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता को मजबूत करते हैं।

Originally written on July 30, 2026 and last modified on July 30, 2026.

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