ग्राम सभाओं में कम भागीदारी पर राष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्ट जारी
ग्रामीण लोकतंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत 30 जून 2026 को नई दिल्ली में “राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ग्राम सभा में कम भागीदारी” विषय पर राष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्ट जारी की जाएगी। यह रिपोर्ट राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडी एंड पीआर) द्वारा पंचायती राज मंत्रालय के लिए तैयार की गई है। अध्ययन का उद्देश्य देशभर में ग्राम सभाओं में नागरिकों की भागीदारी, जागरूकता और स्थानीय शासन व्यवस्था की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करना है। यह रिपोर्ट ग्रामीण स्थानीय स्वशासन को अधिक सहभागी और उत्तरदायी बनाने के लिए उपयोगी सुझाव प्रदान करती है।
संविधान में ग्राम सभा का महत्व
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243A के तहत ग्राम सभा का प्रावधान किया गया है। यह प्रावधान 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के माध्यम से जोड़ा गया था। ग्राम सभा किसी गांव के सभी पंजीकृत मतदाताओं की सामान्य सभा होती है और पंचायती राज व्यवस्था में गांव स्तर पर लोकतांत्रिक निर्णय लेने की सबसे महत्वपूर्ण संस्था मानी जाती है। ग्राम सभा स्थानीय विकास योजनाओं, सामाजिक निगरानी, पारदर्शिता और जनभागीदारी सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाती है।
अध्ययन की रूपरेखा और दायरा
यह राष्ट्रीय अध्ययन देश के 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 400 ग्राम पंचायतों में किए गए व्यापक क्षेत्रीय सर्वेक्षण पर आधारित है। अध्ययन के दौरान लगभग 7,790 उत्तरदाताओं से जानकारी एकत्र की गई। रिपोर्ट में अनुसूचित क्षेत्रों के लिए लागू पेसा (पंचायतों का अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार अधिनियम, 1996) वाले क्षेत्रों तथा महिलाओं के नेतृत्व वाली ग्राम पंचायतों को भी शामिल किया गया है, जिससे विभिन्न सामाजिक और प्रशासनिक परिस्थितियों का समग्र आकलन किया जा सके।
भागीदारी और स्थानीय शासन के प्रमुख पहलू
रिपोर्ट में ग्राम सभाओं में लोगों की भागीदारी को प्रभावित करने वाले अनेक पहलुओं का विश्लेषण किया गया है। इनमें नागरिकों की जागरूकता, सूचना एवं संचार व्यवस्था, समावेशिता, संस्थागत उत्तरदायित्व, स्थानीय शासन की कार्यप्रणाली, आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता तथा ग्रामीण नागरिकों की धारणा जैसे विषय शामिल हैं। इन कारकों का अध्ययन विकेंद्रीकरण, सहभागी लोकतंत्र और ग्रामीण स्थानीय स्वशासन की प्रभावशीलता को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- अनुच्छेद 243A को 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के माध्यम से भारतीय संविधान में जोड़ा गया था।
- ग्राम सभा पंचायती राज व्यवस्था की गांव स्तर की संवैधानिक संस्था है, जिसमें गांव के सभी पंजीकृत मतदाता सदस्य होते हैं।
- पेसा (PESA) का पूरा नाम पंचायतों का अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार अधिनियम, 1996 है।
- राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडी एंड पीआर) ग्रामीण विकास और पंचायती राज से संबंधित राष्ट्रीय स्तर का प्रमुख प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान है।
ग्राम सभा ग्रामीण लोकतंत्र की आधारशिला मानी जाती है। यह राष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्ट ग्राम सभाओं में कम भागीदारी के कारणों को समझने और उन्हें दूर करने के लिए नीतिगत दिशा प्रदान करेगी। इससे स्थानीय स्वशासन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और सहभागी बनाने में सहायता मिलेगी, जो लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और ग्रामीण विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।