ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने के लिए वीबी-ग्राम जी मिशन के तहत पहली किस्त जारी
केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 के तहत ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के लिए 25,863 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी है। यह राशि 5 जुलाई 2026 को भोपाल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को जारी की गई। नया कानून 1 जुलाई 2026 से पूरे ग्रामीण भारत में लागू हो चुका है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना तथा आजीविका को मजबूत बनाना है।
वीबी-ग्राम जी अधिनियम, 2025 क्या है?
वीबी-ग्राम जी (Viksit Bharat-Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission – Gramin) अधिनियम, 2025 ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), 2005 का स्थान लिया है। नए कानून के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वैधानिक मजदूरी रोजगार की गारंटी दी गई है। इससे पहले मनरेगा के तहत 100 दिनों के रोजगार की व्यवस्था थी। सरकार का मानना है कि रोजगार के दिनों में वृद्धि से ग्रामीण क्षेत्रों में आय बढ़ेगी, पलायन कम होगा और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिलेगी।
नई मजदूरी दर और वित्तीय व्यवस्था
वीबी-ग्राम जी योजना के अंतर्गत 1 जुलाई 2026 से अंतरिम आधार मजदूरी दर 300 रुपये प्रतिदिन निर्धारित की गई है। वहीं राष्ट्रीय औसत दैनिक मजदूरी बढ़कर 327.4 रुपये हो गई है, जो पहले मनरेगा के तहत 298.8 रुपये प्रतिदिन थी। योजना की वित्तीय भागीदारी में अधिकांश राज्यों के लिए 60:40 का केंद्र-राज्य अनुपात लागू किया गया है। वहीं पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 का विशेष अनुपात रखा गया है, ताकि इन क्षेत्रों को अतिरिक्त सहायता मिल सके। सरकार ने इस नई व्यवस्था के तहत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 95,692.31 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन भी किया है।
राज्यों को पहली किस्त का आवंटन
पहली किस्त के तहत विभिन्न राज्यों को उनकी आवश्यकता और स्वीकृत कार्यों के अनुसार राशि जारी की गई है। उत्तर प्रदेश को 3,210.76 करोड़ रुपये, आंध्र प्रदेश को 2,545.5 करोड़ रुपये तथा राजस्थान को 2,274.37 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। यह राशि मजदूरी भुगतान और ग्रामीण विकास कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए उपयोग की जाएगी। इसके साथ ही राज्य सरकारों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने हिस्से की राशि भी समय पर जारी करें, ताकि श्रमिकों को कानून के अनुसार 15 दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- वीबी-ग्राम जी अधिनियम, 2025 ने मनरेगा, 2005 का स्थान लिया है।
- नई योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है।
- योजना में 300 रुपये प्रतिदिन की अंतरिम आधार मजदूरी निर्धारित की गई है।
- अधिकांश राज्यों के लिए योजना का केंद्र-राज्य वित्तीय अनुपात 60:40 है, जबकि पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 का प्रावधान है।
ग्रामीण रोजगार और आजीविका को मजबूत बनाने की दिशा में वीबी-ग्राम जी अधिनियम एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। रोजगार के दिनों में वृद्धि, बेहतर मजदूरी दर और समयबद्ध भुगतान की व्यवस्था से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है। यह पहल न केवल ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि देश के समग्र ग्रामीण विकास को भी नई दिशा प्रदान करेगी।