गुजरात में बिजली ट्रांसमिशन परियोजनाओं के लिए भूमि मुआवजा नीति में बड़ा बदलाव

गुजरात में बिजली ट्रांसमिशन परियोजनाओं के लिए भूमि मुआवजा नीति में बड़ा बदलाव

गुजरात सरकार ने वर्ष 2026 में बिजली ट्रांसमिशन टावरों और ओवरहेड पावर लाइनों के लिए भूमि मुआवजा नीति में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को उनकी भूमि के उपयोग के बदले अधिक पारदर्शी और उचित मुआवजा प्रदान करना है। यह नीति उन किसानों पर लागू होगी जिनकी भूमि बिजली ट्रांसमिशन परियोजनाओं में उपयोग की जा रही है, साथ ही उन परियोजनाओं पर भी लागू होगी जो अभी निर्माणाधीन हैं। नई नीति के तहत मुआवजा तय करने की प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक व्यावहारिक और बाजार आधारित बनाया गया है।

बाजार मूल्य के आधार पर मिलेगा मुआवजा

संशोधित नीति के तहत पहले प्रचलित जन्त्री (सर्किल रेट) आधारित प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है। अब भूमि का मुआवजा संबंधित क्षेत्र के प्रचलित बाजार मूल्य के दोगुने के आधार पर निर्धारित किया जाएगा। यह व्यवस्था ट्रांसमिशन टावरों के लिए उपयोग होने वाली भूमि के साथ-साथ ओवरहेड बिजली लाइनों के राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) कॉरिडोर पर भी लागू होगी। इससे किसानों को उनकी भूमि के वास्तविक मूल्य के अधिक निकट मुआवजा मिलने की संभावना बढ़ेगी।

बाजार दर समिति करेगी मूल्यांकन

भूमि के बाजार मूल्य का निर्धारण करने के लिए एक विशेष बाजार दर समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति में जिला कलेक्टर, प्रभावित भूमि मालिकों के प्रतिनिधि, किसानों द्वारा नामित बाजार मूल्यांकन विशेषज्ञ तथा ट्रांसमिशन सेवा प्रदाता के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य मुआवजा निर्धारण प्रक्रिया को संतुलित, पारदर्शी और सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य बनाना है।

राइट ऑफ वे और टावर क्षेत्र के लिए नई व्यवस्था

नई नीति के अनुसार राइट ऑफ वे कॉरिडोर के लिए मिलने वाला मुआवजा भी समिति द्वारा निर्धारित बाजार मूल्य से जोड़ा जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को बाजार मूल्य का 30 प्रतिशत, नगरपालिकाओं के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में 45 प्रतिशत तथा नगर निगम क्षेत्रों में 60 प्रतिशत मुआवजा दिया जाएगा। इसके अलावा ट्रांसमिशन टावर के आधार क्षेत्र के मुआवजे में भी वृद्धि की गई है। अब टावर के आधार क्षेत्र के चारों ओर प्रत्येक दिशा में एक-एक मीटर अतिरिक्त क्षेत्र को भी मुआवजे के दायरे में शामिल किया जाएगा। इससे किसानों को पहले की तुलना में अधिक भूमि के लिए भुगतान प्राप्त होगा।

भुगतान प्रक्रिया हुई सरल

पहले लागू तीन चरणों वाली भुगतान व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। संशोधित नीति के अनुसार अब परियोजना पर कार्य शुरू होने से पहले ही किसानों को मुआवजे की पूरी 100 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जाएगा। यह प्रावधान किसानों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। साथ ही, नई दरें उन ट्रांसमिशन परियोजनाओं पर भी लागू होंगी जो पहले से निर्माणाधीन हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) वह भूमि कॉरिडोर होता है जिसकी आवश्यकता ओवरहेड बिजली ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण और रखरखाव के लिए होती है।
  • 765 केवी ट्रांसमिशन लाइन के लिए मुआवजे योग्य टावर आधार क्षेत्र 625 वर्गमीटर से बढ़ाकर 729 वर्गमीटर कर दिया गया है।
  • गुजरात में जन्त्री शब्द का उपयोग सरकारी सर्किल रेट या संपत्ति के आधिकारिक मानक मूल्य के लिए किया जाता है।
  • बाजार मूल्य आधारित मुआवजा प्रणाली का उपयोग भूमि अधिग्रहण और विभिन्न आधारभूत संरचना परियोजनाओं में व्यापक रूप से किया जाता है।

गुजरात की संशोधित भूमि मुआवजा नीति किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। बाजार मूल्य आधारित मुआवजा, अग्रिम भुगतान और पारदर्शी मूल्यांकन व्यवस्था जैसी विशेषताएं न केवल किसानों का विश्वास बढ़ाएंगी, बल्कि बिजली ट्रांसमिशन परियोजनाओं के सुचारु और समयबद्ध क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

Originally written on July 4, 2026 and last modified on July 4, 2026.

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